10 दिनों से समुद्र में फंसी है 3.5 करोड़ अंडों की बड़ी खेप, 28 फरवरी को भारत से हुई थी सप्लाई.. ये है वजह

ईरान- इजरायल युद्ध के कारण तमिलनाडु के नामक्कल से भेजे गए करीब 3.5 करोड़ अंडों की खेप 10 दिनों से समुद्र में फंसी हुई है. निर्यात प्रभावित होने से पोल्ट्री किसानों को नुकसान का डर है. APEDA दुबई की शिपिंग कंपनियों से बातचीत कर रहा है ताकि शिपमेंट जल्द अपने गंतव्य तक पहुंच सके.

Kisan India
नोएडा | Updated On: 13 Mar, 2026 | 05:53 PM

Egg Business: ईरान-इजरायल युद्ध के कारण तमिलनाडु के नामक्कल से भेजे गए करीब 3.5 करोड़ अंडों की एक बड़ी खेप पिछले 10 दिनों से समुद्र में फंसी हुई है. इस बीच कृषि और प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (APEDA) ने कहा है कि वह दुबई की शिपिंग कंपनियों से बातचीत कर रहा है, ताकि इन खेपों को सुरक्षित तरीके से उनके गंतव्य तक पहुंचाया जा सके. नामक्कल के निर्यातकों के अनुसार, 28 फरवरी को एक ही जहाज में करीब 70 कंटेनर भेजे गए थे. हर कंटेनर में लगभग 5 लाख अंडे थे, जिन्हें मध्य-पूर्व के देशों में निर्यात किया जा रहा था. लेकिन चल रहे युद्ध की वजह से जहाज अब तक तय बंदरगाह तक नहीं पहुंच पाया है.

पोल्ट्री किसानों को डर है कि अगर ये खेप वापस नामक्कल लौट आई, तो घरेलू बाजार  पर इसका बुरा असर पड़ेगा. पहले से ही बाजार में मांग कम है और सप्लाई ज्यादा है. ऐसे में इतने बड़े पैमाने पर अंडे वापस आने से कीमतें और गिर सकती हैं. किसानों का कहना है कि निर्यात के लिए भेजे जाने वाले अंडे कोल्ड-चेन सिस्टम में पैक होते हैं और उन पर निर्माण (मैन्युफैक्चरिंग) और एक्सपायरी डेट भी छपी होती है. इसलिए उन्हें लंबे समय तक स्टोर करना मुश्किल होता है.

APEDA से तुरंत हस्तक्षेप करने की अपील

ऑल इंडिया पोल्ट्री प्रोडक्ट एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन के सचिव वाल्सन परमेश्वरन ने द न्यू इंडियन एक्सप्रेस से कहा कि संगठन ने सरकार और APEDA से तुरंत हस्तक्षेप करने की अपील की है, ताकि निर्यातकों और पोल्ट्री किसानों को इस संकट से राहत मिल सके. उन्होंने कहा कि कुछ कंटेनर अभी समुद्र में जहाजों के साथ खड़े हैं, जबकि बड़ी संख्या में कंटेनर मुंबई के जवाहरलाल नेहरू पोर्ट पर ही फंसे हुए हैं. करीब 6 करोड़ अंडों की खेप अभी तक अपने गंतव्य बाजारों तक नहीं पहुंच पाई है.

निर्यातकों का कहना है कि वे लगातार APEDA के साथ बैठकों में हिस्सा ले रहे हैं और उनसे जरूरी कदम उठाने की मांग की है. APEDA ने भरोसा दिलाया है कि इस मामले को शिपिंग मंत्रालय के सामने उठाया जाएगा और जल्द कोई समाधान निकल सकता है. निर्यातकों का कहना है कि निर्यात जारी रखने और घरेलू बाजार को प्रभावित होने से बचाने के लिए सरकार का सहयोग जरूरी है.

वैश्विक पोर्ट ऑपरेटर कंपनी के साथ बातचीत चल रही है

APEDA की चेन्नई क्षेत्रीय प्रमुख शोभना कुमार ने कहा कि प्राधिकरण दुबई की एक वैश्विक पोर्ट ऑपरेटर कंपनी के साथ बातचीत कर रहा है, ताकि इन खेपों को आगे भेजने की व्यवस्था की जा सके. उन्होंने कहा कि बातचीत सकारात्मक दिशा में बढ़ रही है और उम्मीद है कि शिपमेंट जल्द ही अपने गंतव्य की ओर रवाना हो पाएंगे.

घटकर लगभग 4.60 रुपये प्रति पीस हुई कीमत

बता दें कि ईरान-अजरायल जंग के चलते भारत में अंडों की कीमतें  कम हो गई हैं. कुछ देर पहले ही खबर सामने आई थी कि कर्नाटक में भी पिछले कुछ हफ्तों में अंडों की कीमतों में तेज गिरावट देखी गई है. नेशनल एग कोऑर्डिनेशन कमेटी (NECC) के अनुसार, अंडे की कीमत 7.06 रुपये प्रति पीस से घटकर लगभग 4.60 रुपये प्रति पीस रह गई है. इससे किसानों को नुकसान उठाना पड़ रहा है. कई किसानों को कहना है कि कीमत में गिरावट आने के चलते वे लागत भी नहीं निकाल पा रहे हैं. कहा जा रहा है कि ईरान-इजराइल जंग के चलते अंडा निर्यात में गिरावट आई है. इसके चलते कीमतें कम हो गईं.

पिछले 15 दिनों में कई कारणों से कीमतें गिरी हैं

कहा जा रहा है कि पिछले 15 दिनों में कई कारणों से कीमतें गिरी हैं. इनमें खाड़ी देशों को होने वाले निर्यात में रुकावट, मौसम के अनुसार मांग में बदलाव और धार्मिक आयोजनों के कारण खपत में कमी शामिल है. उन्होंने कहा कि कर्नाटक में हर दिन करीब 2.2 करोड़ अंडों का उत्पादन होता है. इसमें होसपेटे सबसे बड़ा उत्पादन केंद्र है, इसके बाद मैसूर का स्थान आता है. कर्नाटक में उत्पादित अंडों को निर्यात के लिए तमिलनाडु के नामक्कल स्थित प्लांट में भेजा जाता है.

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Published: 13 Mar, 2026 | 05:49 PM
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