Basmati export: ईरान-इजराइल के युद्ध का असर अब भारत के चावल निर्यात पर भी दिखने लगा है. युद्ध की वजह से समुद्री माल ढुलाई (फ्रेट) और बीमा की लागत तेजी से बढ़ रही है, जिससे निर्यातकों के लिए जहाज (वेसल) बुक करना मुश्किल हो गया है. कई निर्यातकों का कहना है कि इसी कारण भारत से चावल का निर्यात धीमा पड़ने लगा है. अगर ऐसी स्थिति बहुत समय तक बनी रही तो चावल का निर्यात करना मुश्किल हो जाएगा.
भारत दुनिया में चावल का सबसे बड़ा निर्यातक है और वैश्विक चावल निर्यात में उसकी हिस्सेदारी 40 प्रतिशत से ज्यादा है. आम तौर पर भारत जितना चावल निर्यात करता है, वह थाईलैंड, वियतनाम और पाकिस्तान जैसे अगले तीन बड़े निर्यातकों के कुल निर्यात से भी ज्यादा होता है.
खरीदारों के लिए आयात करना हुआ और महंगा
न्यूज एजेंसी रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, निर्यातकों का कहना है कि बढ़ते फ्रेट रेट से खरीदार और विक्रेता दोनों चिंतित हैं, जिसके कारण नए निर्यात सौदों पर साइन होने की रफ्तार काफी धीमी हो गई है. ओलम एग्री इंडिया के सीनियर वाइस प्रेसिडेंट नितिन गुप्ता का कहना है कि फ्रेट रेट हर दिन बढ़ रहे हैं. शिपिंग कंपनियां अब वार सरचार्ज और इमरजेंसी फ्यूल सरचार्ज (EFS) भी जोड़ रही हैं, जिससे खरीदारों के लिए आयात करना और महंगा होता जा रहा है.
हॉर्मुज रूट जहज के लिए है अहम
हॉर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में समुद्री आवाजाही लगभग रुक जाने के बाद से शिपिंग बीमा और माल ढुलाई (फ्रेट) की लागत लगातार बढ़ रही है. यह रास्ता दुनिया के करीब 20 प्रतिशत तेल की आपूर्ति के लिए अहम माना जाता है. यहां रुकावट आने से वैश्विक ऊर्जा कीमतें भी बढ़ गई हैं, जिसमें जहाजों में इस्तेमाल होने वाले बंकर फ्यूल की कीमत भी शामिल है.
गैर-बासमती चावल के पुराने ऑर्डर
निर्यातकों का कहना है कि फिलहाल गैर-बासमती चावल के पुराने ऑर्डर पूरे किए जा रहे हैं और जो जहाज बंदरगाह पर खड़े हैं, उनमें लोडिंग का काम सामान्य रूप से चल रहा है. लेकिन नए ऑर्डर के लिए लॉजिस्टिक्स और जहाज की व्यवस्था करना मुश्किल हो गया है. चावल निर्यातक कंपनी सत्यम बालाजी के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर हिमांशु अग्रवाल के अनुसार, नए निर्यात सौदों के लिए शिपिंग की व्यवस्था करना बड़ी चुनौती बन गया है.
फिलहाल पर्याप्त चावल का स्टॉक है
उन्होंने कहा कि आयात करने वाले देशों के पास फिलहाल पर्याप्त चावल का स्टॉक है और काफी मात्रा में माल पहले से रास्ते में भी है. इसलिए अभी खरीदारों की ओर से घबराहट में खरीदारी नहीं हो रही है. वहीं, दिल्ली के एक निर्यातक के अनुसार, भारत से भेजे जा रहे बासमती चावल के कई शिपमेंट बीच रास्ते में ही रुक गए हैं. ईरान, इराक, कतर और सऊदी अरब जैसे मध्य-पूर्व के बड़े बाजारों के लिए जा रहे जहाज हॉर्मुज जलडमरूमध्य के प्रभावी रूप से बंद होने की वजह से आगे नहीं बढ़ पा रहे हैं. उन्होंने कहा कि विक्रेताओं को यह भी पता नहीं है कि जहाज कब अनलोड होंगे और उन्हें भुगतान कब मिलेगा.
रुपये के कमजोर होने से निर्यातकों को फायदा
इस साल भारत में चावल का उत्पादन रिकॉर्ड स्तर तक पहुंच गया है. एक निर्यातक मुकेश जैन का कहना है कि भारत के पास निर्यात की मांग पूरी करने के लिए पर्याप्त चावल उपलब्ध है. साथ ही रुपये के कमजोर होने से निर्यात को कुछ फायदा भी मिल रहा है. लेकिन लॉजिस्टिक्स में आ रही दिक्कतें और शिपिंग की बाधाएं नए निर्यात समझौते करने में बड़ी रुकावट बन रही हैं.
आलू किसानों को भी नुकसान
बता दें कि ईरान- इजराइल युद्ध के चलते गुजरात के आलू किसानों को नुकसान हो रहा है. बनासकांठा में आलू की कीमतें तेजी से गिर गई हैं, क्योंकि खाड़ी देशों को होने वाला निर्यात अचानक धीमा पड़ गया है. इससे किसानों और व्यापारियों दोनों को भारी नुकसान का सामना करना पड़ रहा है. बनासकांठा हर साल बहुत बड़ी मात्रा में आलू पैदा करता है और इसका बड़ा हिस्सा प्रोसेस्ड प्रोडक्ट के रूप में खाड़ी देशों में भेजा जाता है.