खाद के बढ़ते इस्तेमाल को कम करने और विदेश से आयात घटाने के लिए केंद्र सरकार फर्टिलाइजर मिशन लाने की योजना पर काम कर रही है. एक्सपर्ट का मानना है कि आगामी 1 फरवरी को पेश होने वाले बजट (Budget 2026) में फर्टिलाइजर मिशन की घोषणा की जा सकती है. इससे पहले केंद्र सरकार की ओर से शुरू किए गए दलहन, तिलहन मिशन, मिलेट्स मिशन को भी मिली सफलता को देखते हुए फर्टिलाइजर मिशन पर जोर दिया जा रहा है.
बीते साल से 55 लाख टन ज्यादा फर्टिलाइजर इस्तेमाल की गई
कृषि में बढ़ते खाद और केमिकल इस्तेमाल ने मिट्टी की ताकत तो घटाई ही है और विदेशी फर्टिलाइजर उत्पादों पर निर्भरता भी बढ़ा दी है. आंकड़े बताते हैं कि साल 2024-25 में फर्टिलाइजर की बिक्री 655.94 लाख टन तक पहुंच गई, जो बीते वित्तवर्ष की 600.79 लाख टन थी. यानी इस साल किसानों ने 55 लाख टन से अधिक फर्टिलाइजर का इस्तेमाल किया है. यह स्थिति खेती और कृषि उत्पादों को सेहतमंद बनाए रखने की दिशा आने वाले समय में बड़ी बाधा बन सकता है.
बायो फर्टिलाइजर सहित विकल्पों को बढ़ावा देने की योजना
ऐसे में सरकार ने फर्टिलाइजर आयात और केमिकल के इस्तेमाल को कम करने के लिए फर्टिलाइजर मिशन की योजना बनाई है. रिपोर्ट के अनुसार सरकार आने वाले बजट में फर्टिलाइजर पर मिशन की घोषणा कर सकती है. इस मिशन का मकसद केमिकल फर्टिलाइजर के इस्तेमाल को कम करना और सब्सिडी बिल में कटौती करना है. सूत्रों के अनुसार बिजनेस लाइन की रिपोर्ट ने कहा गया है कि इस मिशन में मौजूदा केमिकल फर्टिलाइजर के आयात को कम से कम 20 फीसदी तक घटाने के लिए बायो फर्टिलाइजर सहित विकल्पों को बढ़ावा देने के लिए प्रोत्साहन भी शामिल हो सकते हैं.
फर्टिलाइजर मिशन को 10 साल के लक्ष्य साथ घोषित होने की संभावना
रिपोर्ट में कहा गया कि इस मिशन के लिए पांच से दस साल का समय और खास लक्ष्य चाहिए. सालाना बिक्री में 6-7 फीसदी की कमी भी मौजूदा बढ़ते ट्रेंड को संतुलित कर देगी, जिससे खपत मौजूदा स्तर पर बनी रहेगी. इसे फर्टिलाइजर में आत्मनिर्भरता के लिए मिशन नाम दिया जा सकता है, जिसका लक्ष्य 10 सालों में फर्टिलाइजर आयात में 20 फीसदी की कटौती करना है.
फर्टिलाइजर बिक्री और इस्तेमाल रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचा
2024-25 में भारत में फर्टिलाइजर की बिक्री अब तक के सबसे ऊंचे स्तर 655.94 लाख टन पर पहुंच गई, जो FY24 में 600.79 लाख टन थी. पिछला उच्चतम स्तर 2020-21 में 621.91 लाख टन था.
ताजा आधिकारिक आंकड़ों से पता चलता है कि पिछले वित्त वर्ष के दौरान यूरिया की बिक्री 387.92 लाख टन तक पहुंच गई, जो 2023-24 में 357.81 लाख टन से 8.4 फीसदी अधिक है. म्यूरेट ऑफ पोटाश (MOP) में 33.9 फीसदी की बढ़ोत्तरी दर्ज की गई. इसी तरह सभी पोषक तत्वों का मिश्रण वाली खाद यानी कॉम्प्लेक्स फर्टिलाइजर की बिक्री 116.8 लाख टन से बढ़कर 149.72 लाख टन हो गया, जो 28.2 फीसदी की बढ़त को दिखाता है. हालांकि, डाई अमोनियम फॉस्फेट (DAP) की बिक्री 109.74 टन से घटकर 96.28 टन हो गई, जिसकी वजह नवंबर 2024 के मध्य तक इसकी कमी थी.
फर्टिलाइजर सब्सिडी के लिए 1,67,899.5 करोड़ रुपये के बजट अनुमान के मुकाबले सरकार ने 30 जून तक 41,482.33 करोड़ रुपये बांटे हैं. जबकि, फॉस्फेटिक और पोटाश फर्टिलाइजर पर सब्सिडी को बाद में शुरुआती 49,000 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 75,000 करोड़ रुपये कर दिया गया.
विशेषज्ञों ने योजना में बदलाव की वकालत की
इन आंकड़ों को देखते हुए PM-PRANAM योजना को प्रस्तावित मिशन के साथ मिलाने के बारे में सोचा जा रहा है. क्योंकि पिछली योजना को भी इसी उद्देश्य के साथ बढ़ावा दिया गया था. PM-PRANAM योजना के तहत राज्यों को रासायनिक उर्वरकों के इस्तेमाल को कम करने के लिए वित्तीय प्रोत्साहन दिया जाता है. बढ़ती बिक्री के बीच कई विशेषज्ञों ने इस योजना में बदलाव की वकालत की है.
ICAR विकसित कर सकता है नई टेक्नोलॉजी
सूत्रों ने बताया कि हालांकि यह प्रस्तावित फर्टिलाइजर मिशन का हिस्सा नहीं है, लेकिन ‘प्राकृतिक खेती पर मिशन’ के लिए अधिक आवंटन हो सकता है. क्योंकि इसे अपनाने का सीधा संबंध रासायनिक उर्वरकों के इस्तेमाल को कम करने से है. ICAR को ऐसी नई टेक्नोलॉजी विकसित करने का काम भी सौंपा जा सकता है जिसमें नाइट्रोजन, फास्फोरस और पोटाश का कम इस्तेमाल हो.