Paddy scam: केंद्र सरकार ने 2025-26 सीजन के दौरान पंजाब में कथित धान खरीद घोटाले की जांच के निर्देश दिए हैं. आरोप है कि पंजाब की मंडियों में 6,000 से 10,000 करोड़ रुपये तक की फर्जी धान खरीद दिखाई गई. यह आरोप संगरूर के एक कमीशन एजेंट और राइस मिल मालिक ने लगाए हैं. आरोपों के मुताबिक मंडियों में किसानों के नाम पर फर्जी ‘जे-फॉर्म’ जारी किए गए, जिनके जरिए किसानों के खातों में भुगतान हुआ. बाद में यह रकम किसानों, कमीशन एजेंटों, राइस मिलर्स और खरीद एजेंसियों के अधिकारियों में बांटी गई. इसके बाद राज्य के बाहर से एमएसपी से करीब 600 रुपये प्रति क्विंटल सस्ता धान खरीदकर उसे पंजाब में एमएसपी पर खरीदा हुआ दिखाया गया.
द ट्रिब्यून की रिपोर्ट के मुताबिक, केंद्रीय वित्त मंत्रालय के राजस्व विभाग के निर्देश पर पंजाब सरकार के खाद्य, नागरिक आपूर्ति और उपभोक्ता मामलों के विभाग ने सभी जिला खाद्य एवं आपूर्ति नियंत्रकों को अपने-अपने आवंटन समितियों की बैठक बुलाकर मामले की जांच करने को कहा है. सभी जिलों से 13 फरवरी तक रिपोर्ट जमा करने के निर्देश दिए गए हैं. पंजाब के सभी जिलों के जिला खाद्य एवं आपूर्ति नियंत्रकों (DFSC) ने सोमवार से आवंटन समितियों की बैठकें शुरू कर दी हैं.
पूरी रिपोर्ट केंद्र सरकार को भेजी जाएगी
पंजाब के खाद्य एवं आपूर्ति मंत्री लाल चंद कटारूचक ने कहा कि उन्हें इस मामले की जानकारी नहीं है. वहीं, विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी का कहना है कि राइस मिलर ने प्रधानमंत्री और केंद्र सरकार के सात अन्य वरिष्ठ अधिकारियों व जांच एजेंसियों को शिकायत भेजी है. अधिकारी ने कहा कि अभी तक शिकायत के आरोप साबित नहीं हुए हैं और विभाग की सख्ती के चलते फर्जी धान खरीद की संभावना कम है. फिर भी सभी खरीद की जांच की जा रही है और पूरी रिपोर्ट केंद्र सरकार को भेजी जाएगी.
फर्जी जे-फॉर्म के जरिए किसानों के खातों में पैसा डाला गया
केंद्र सरकार के अधिकारियों को दी गई इस शिकायत में बताया गया है कि कैसे कथित घोटाला हुआ. शिकायत के अनुसार, फर्जी जे-फॉर्म के जरिए किसानों के खातों में पैसा डाला गया. इसके बाद कमीशन एजेंट ने धान को राइस मिल में भेजने का गेट पास जारी किया. राइस मिलर ने बिना धान मिले ही उसकी प्राप्ति दिखा दी और बदले में नकद भुगतान हासिल किया.
इस तरह किया गया फर्जीवाड़ा
शिकायत में आरोप लगाया गया है कि इस कथित घोटाले में कमीशन एजेंट को प्रति क्विंटल 45 रुपये कमीशन और 55 रुपये मंडी खर्च के रूप में मिले. खरीद एजेंसी के कर्मचारियों को 50 रुपये और मंडी बोर्ड के कर्मचारियों को 10 रुपये प्रति क्विंटल दिए गए. कुछ मिलर्स और कमीशन एजेंट्स ने यूपी और बिहार से बिना टैक्स चुकाए धान मंगाकर कमी पूरी की. मंडियों में खरीद खत्म होने के बाद खरीद एजेंसी और एफसीआई के फील्ड स्टाफ ने बिना स्टॉक मौजूद हुए भी भौतिक सत्यापन में धान का भंडारण दिखा दिया, जिसके बदले हर राइस मिल से 10 हजार से 30 हजार रुपये लिए गए.
राइस मिलर को करीब 4 लाख रुपये का फायदा होता है
शिकायत के अनुसार, इस तरह 290 क्विंटल की एक खेप से ही राइस मिलर को करीब 4 लाख रुपये का फायदा होता है, और हर साल लाखों टन धान की खरीद से घोटाले की बड़ी रकम का अंदाजा लगाया जा सकता है. शिकायत में यह भी कहा गया है कि पिछले साल पंजाब में बाढ़ आई थी, जिससे अधिक नमी और हाइब्रिड बीजों के इस्तेमाल के कारण फसल को नुकसान हुआ था. इसके बावजूद कई बाढ़ प्रभावित जिलों में धान की खरीद 2024-25 के बराबर ही दिखाई गई. इस पर राज्य सरकार ने अमृतसर, तरनतारन और फाजिल्का जैसे जिलों में धान खरीद की जांच के आदेश भी दिए थे.