Sugar export ban: भारत सरकार ने घरेलू बाजार में चीनी की कीमतों को नियंत्रित करने के लिए बड़ा फैसला लिया है. सरकार ने तत्काल प्रभाव से सितंबर 2026 तक चीनी के निर्यात पर रोक लगा दी है. इस फैसले का मकसद देश में चीनी की उपलब्धता बनाए रखना और बढ़ती कीमतों को काबू में रखना है.
सरकार का मानना है कि इस साल देश में चीनी उत्पादन मांग के मुकाबले कम रह सकता है. लगातार दूसरे साल ऐसी स्थिति बनने की आशंका जताई जा रही है. इसी वजह से सरकार ने एहतियात के तौर पर निर्यात रोकने का फैसला लिया है.
क्यों लिया गया यह फैसला?
बिजनेस लाइन की खबर के अनुसार इस बार कई प्रमुख गन्ना उत्पादक राज्यों में गन्ने की पैदावार कमजोर रही है. मौसम में बदलाव और कम उत्पादन की वजह से चीनी उत्पादन पर असर पड़ा है. इसके अलावा मौसम वैज्ञानिकों ने अल नीनों के असर को लेकर भी चिंता जताई है. आशंका है कि अल नीनो की वजह से इस साल मॉनसून प्रभावित हो सकता है, जिससे अगले सीजन में गन्ना उत्पादन और घट सकता है. सरकार को डर है कि अगर अभी निर्यात जारी रहा तो आने वाले महीनों में घरेलू बाजार में चीनी की कमी और महंगाई बढ़ सकती है.
पहले दी गई थी निर्यात की अनुमति
भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा चीनी उत्पादक देश माना जाता है. इससे पहले सरकार ने चीनी मिलों को 15.9 लाख मीट्रिक टन चीनी निर्यात करने की अनुमति दी थी. उस समय उम्मीद थी कि उत्पादन घरेलू जरूरतों से ज्यादा रहेगा. लेकिन बाद में हालात बदल गए. रिपोर्ट के मुताबिक 15.9 लाख टन में से करीब 8 लाख टन चीनी के निर्यात के लिए सौदे किए गए थे और 6 लाख टन से ज्यादा चीनी विदेश भेजी भी जा चुकी है. अब नए आदेश के बाद आगे का निर्यात रोक दिया गया है.
किन मामलों में मिलेगी छूट?
सरकार ने साफ किया है कि कुछ पुराने निर्यात ऑर्डर पूरे किए जा सकेंगे. जिन खेपों की लोडिंग पहले से शुरू हो चुकी है या जहाज भारतीय बंदरगाह पर पहुंच चुका है, उन्हें निर्यात की अनुमति मिलेगी. इसके अलावा जिन मामलों में कस्टम प्रक्रिया पहले पूरी हो चुकी है, वहां भी चीनी भेजी जा सकेगी.
दुनिया के बाजार पर भी पड़ेगा असर
भारत चीनी निर्यात करने वाले बड़े देशों में शामिल है. ऐसे में भारत के इस फैसले का असर अंतरराष्ट्रीय बाजार पर भी देखने को मिल सकता है. विशेषज्ञों का कहना है कि भारत से निर्यात रुकने के बाद दुनिया में चीनी की कीमतें बढ़ सकती हैं. इसका फायदा ब्राजील और थाईलैंड जैसे देशों को मिल सकता है, जो एशिया और अफ्रीका के बाजारों में अपनी हिस्सेदारी बढ़ा सकते हैं. भारत के फैसले के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्ची और सफेद चीनी की कीमतों में तेजी भी देखने को मिली है.
व्यापारियों की बढ़ी चिंता
मुंबई के कई कारोबारियों का कहना है कि सरकार ने फरवरी में अतिरिक्त निर्यात कोटा दिया था, जिसके बाद कई कंपनियों ने विदेशों में चीनी बेचने के समझौते किए थे. अब अचानक निर्यात रोक लगने से उन व्यापारियों के सामने मुश्किल खड़ी हो सकती है, जिन्हें अपने ऑर्डर पूरे करने हैं.
आम लोगों पर असर?
सरकार का उद्देश्य घरेलू बाजार में चीनी की कीमतों को नियंत्रित रखना है. अगर उत्पादन कम रहता है तो त्योहारों और शादी के सीजन में चीनी की कीमतें बढ़ सकती हैं. सरकार चाहती है कि देश में पर्याप्त स्टॉक बना रहे ताकि आम लोगों को महंगी चीनी का सामना न करना पड़े.