high seas fishing: भारत में मत्स्य क्षेत्र को लेकर एक बड़ा बदलाव होने जा रहा है, जो आने वाले समय में देश के मछुआरों और समुद्री कारोबार के लिए नए रास्ते खोल सकता है. केंद्र सरकार अब “लेटर ऑफ ऑथराइजेशन” यानी अनुमति पत्र योजना शुरू करने की तैयारी में है, जिसके तहत भारतीय कंपनियों और जहाजों को अंतरराष्ट्रीय समुद्र यानी हाई सी में मछली पकड़ने की अनुमति दी जाएगी. यह कदम न सिर्फ भारत की वैश्विक भागीदारी को मजबूत करेगा, बल्कि देश के कुशल मछुआरों को विदेश जाने से भी रोकने में मदद करेगा.
हाई सी फिशिंग की ओर भारत का बड़ा कदम
अब तक भारत के मछुआरे मुख्य रूप से अपने विशेष आर्थिक क्षेत्र यानी EEZ (एक्सक्लूसिव इकोनॉमिक जोन) के भीतर ही मछली पकड़ते थे. लेकिन नई योजना के तहत उन्हें अंतरराष्ट्रीय जल क्षेत्रों में भी काम करने की अनुमति मिलेगी. इससे भारत उन देशों की कतार में शामिल हो सकेगा, जो पहले से ही बड़े पैमाने पर हाई सी फिशिंग कर रहे हैं, जैसे यूरोप के कई देश.
सरकार का मानना है कि भारतीय मछुआरों के पास गहरे समुद्र में काम करने का अच्छा अनुभव और तकनीकी कौशल है, जिसका फायदा अब देश को भी मिलना चाहिए.
भारतीय मछुआरों की बढ़ती वैश्विक मांग
भारतीय मछुआरों की मांग विदेशों में लगातार बढ़ रही है. खासकर ईरान और ओमान जैसे देशों ने पिछले 8-10 वर्षों में गहरे समुद्र में मछली पकड़ने का काम बढ़ाया है और इसके लिए उन्होंने बड़ी संख्या में भारतीय मछुआरों को काम पर रखा है.
तमिलनाडु और केरल के तटीय इलाकों से आने वाले मछुआरे अपनी कुशलता, कठिन परिस्थितियों में काम करने की क्षमता और तकनीकी समझ के लिए जाने जाते हैं. यही वजह है कि उन्हें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर काफी पसंद किया जाता है.
हाल ही में पश्चिम एशिया में तनाव के दौरान करीब 657 भारतीय मछुआरों को ईरान से निकालकर आर्मेनिया और अजरबैजान भेजा गया था, जिससे यह भी साफ होता है कि भारतीय मछुआरे विदेशों में बड़ी संख्या में काम कर रहे हैं.
क्यों जरूरी है नई योजना
बिजनेस लाइन की खबर के अनुसार, सरकार का मानना है कि अगर भारतीय मछुआरों को देश के भीतर ही बेहतर अवसर मिलें, तो उन्हें विदेशों में काम करने की जरूरत नहीं पड़ेगी. इससे उनकी आय भी बढ़ेगी और देश की अर्थव्यवस्था को भी फायदा होगा. एक अधिकारी के अनुसार, जब चीन और यूरोप के जहाज भारतीय महासागर में मछली पकड़ सकते हैं, तो भारत को भी इस क्षेत्र में अपनी हिस्सेदारी बढ़ानी चाहिए. यही सोच इस नई नीति के पीछे काम कर रही है.
नए नियम और व्यवस्था
सरकार ने पहले ही गहरे समुद्र में मछली पकड़ने के लिए कुछ नए नियम लागू किए हैं. नवंबर में जारी नियमों के तहत विदेशी जहाजों को भारतीय जल क्षेत्र में मछली पकड़ने से रोक दिया गया है. साथ ही अवैध मछली पकड़ने पर रोक लगाने के लिए राष्ट्रीय कार्य योजना भी बनाई गई है. इसके तहत बड़े और मोटर चालित जहाजों के लिए एक्सेस पास अनिवार्य किया गया है. अब तक लगभग 4,000 ऐसे पास जारी किए जा चुके हैं. देश में कुल 2.38 लाख पंजीकृत मछली पकड़ने वाले जहाज हैं, जिनमें से करीब 1.72 लाख छोटे जहाज इस नियम से बाहर हैं, जबकि 64 हजार से ज्यादा बड़े जहाजों को यह पास लेना जरूरी होगा.
व्यापार और निवेश को मिलेगा बढ़ावा
सरकार ने इस क्षेत्र में निवेश बढ़ाने के लिए कई अहम फैसले भी लिए हैं. अब हाई सी में पकड़ी गई मछलियों को भारत लाने पर उन्हें आयात नहीं माना जाएगा. इसी तरह, अगर मछली सीधे किसी दूसरे देश में बेची जाती है, तो उसे निर्यात के रूप में देखा जाएगा. इसके अलावा, विशेष तकनीकी जहाजों के संचालन और प्रशिक्षण के लिए विदेशी विशेषज्ञों के वीजा नियमों में भी ढील दी गई है. इससे आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल बढ़ेगा और भारतीय मछुआरों को बेहतर प्रशिक्षण मिल सकेगा.
छोटे मछुआरों की भूमिका और चुनौतियां
भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा मछली उत्पादक देश है और वैश्विक उत्पादन में उसकी हिस्सेदारी करीब 8 प्रतिशत है. देश में लगभग 40 लाख छोटे मछुआरे हैं, जो मुख्य रूप से तट के पास यानी 12 समुद्री मील के अंदर ही मछली पकड़ते हैं. हालांकि, इस क्षेत्र को कई चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है, जैसे तट के पास ज्यादा दबाव, जलवायु परिवर्तन का असर और बाजार में उतार-चढ़ाव. ऐसे में हाई सी फिशिंग उनके लिए नए अवसर लेकर आ सकती है.