Uttar Pradesh Fisheries: उत्तर प्रदेश में मछली पालन को बढ़ावा दिया जा रहा है. मछली पालकों को प्रोत्साहित करने के लिए तरह-तरह की योजनाएं चलाई जा रही हैं. इससे किसानों की दिलचस्पी मछली पालन के प्रति बढ़ गई है. यही वजह है कि उत्तर प्रदेश अब मछली पालन के मामले में देश का तीसरा सबसे बड़ा राज्य बन गया है. वहीं, मछली उत्पादन पीछले 6 साल में दोगुना होकर सालाना 13.3 लाख मीट्रिक टन हो गया है. इससे किसानों की कमाई में इजाफा भी हुआ है.
दरअसल, ये बातें केंद्रीय मत्स्य पालन, पशुपालन, डेयरी और पंचायती राज राज्यमंत्री प्रो. एसपी सिंह बघेल ने उत्तर प्रदेश में पहली बार मीन महोत्सव (एक्वा एक्सपो-2026) के आयोजन पर कही. उन्होंने कहा कि किसानों की आय बढ़ाने के लिए उन्नत पशुपालन और उन्नत मछली पालन जरूरी है. उन्होंने मछली पालकों को सस्ती बिजली उपलब्ध कराने और उत्तर प्रदेश में एनएफडीबीके सेंटर खोलने के लिए कदम उठाने की भी सलाह दी.
यूपी में मछली विकास दर 115.5 फीसदी है
प्रदेश के मत्स्य मंत्री डॉ. संजय कुमार निषाद ने बताया कि राज्य में मत्स्य विकास दर 115.5 फीसदी है. उन्होंने अमृत सरोवरों को मछली पालन योग्य बनाने, तालाबों के पट्टे समय पर दिलाने और मत्स्य पालन में विज्ञान और तकनीक के उपयोग पर जोर दिया. साथ ही, अनुदान और तकनीकी प्रशिक्षण के जरिए मत्स्य पालकों के विकास और सशक्तीकरण पर ध्यान दिया.
प्रदेश में 6 लाख से अधिक जलक्षेत्र मौजूद हैं
अपर मुख्य सचिव मत्स्य मुकेश कुमार मेश्राम ने बताया कि प्रदेश में 6 लाख से अधिक जलक्षेत्र मौजूद हैं. मत्स्य पालक, विशेषज्ञ, उद्यमी और निवेशक मिलकर मत्स्य प्रसंस्करण और मूल्य संवर्धन के जरिए उत्पादन, उत्पादकता और किसानों की आय बढ़ा सकते हैं. इसके साथ ही, मथुरा में पशु चिकित्सा विज्ञान विश्वविद्यालय और दुवासु में मत्स्य विज्ञान पर शोध कार्य शुरू हो गया है.
मछली उत्पादन दोगुना होकर 13.3 लाख मीट्रिक टन हो गया
महानिदेशक मत्स्य धनलक्ष्मी के ने बताया कि मत्स्य पालन ग्रामीण आजीविका का मुख्य साधन है और उत्तर प्रदेश भारत में तीसरा सबसे बड़ा मत्स्य उत्पादक राज्य है. पिछले 6 वर्षों में राज्य का सलाना मछली उत्पादन दोगुना होकर 13.3 लाख मीट्रिक टन हो गया है. विजन-2047 के तहत उत्तर प्रदेश अंतर्देशीय मत्स्य पालन में पहला राज्य बनना चाहता है. इसे ध्यान में रखते हुए मुख्यमंत्री ने वर्ष 2026-27 के बजट में मत्स्य विभाग के लिए 114.20 करोड़ रुपये की नई सहायता की घोषणा की है. इसके तहत राज्य में इंटीग्रेटेड एक्वापार्क स्थापित किए जाएंगे, 3 मत्स्य मंडियां बनेंगी, मोती की खेती को बढ़ावा देने के लिए 3 करोड़ रुपये और गोरखपुर में वर्ल्डफिश प्रोजेक्ट सेंटर के लिए 6 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है. यह पहल राज्य में मत्स्य पालन को औद्योगिक स्तर पर विकसित करने और किसानों की आय बढ़ाने में मदद करेगी.
कार्यक्रम में देश और प्रदेश के 1000 मत्स्य पालक शामिल हुए
दरअसल, उत्तर प्रदेश में पहली बार मीन महोत्सव (एक्वा एक्सपो-2026) का आयोजन किया गया. केंद्रीय मत्स्य पालन, पशुपालन, डेयरी और पंचायती राज राज्यमंत्री प्रो. एसपी सिंह बघेल और प्रदेश के कैबिनेट मंत्री डॉ. संजय कुमार निषाद ने इसका उद्घाटन किया. कार्यक्रम में देश और प्रदेश के 1000 मत्स्य पालक शामिल हुए, जबकि 50 कंपनियों ने औद्योगिक प्रदर्शनी और स्टॉल लगाए. फिश फूड कोर्ट और प्रोटीन जागरूकता कार्यक्रम भी आयोजित किए गए.
इस मौके पर आलोक बिसवाल (डेलॉयट) ने प्रदेश की अर्थव्यवस्था को एक ट्रिलियन डॉलर तक पहुंचाने में मत्स्य क्षेत्र की भूमिका पर प्रस्तुति दी. रजनीश कुमार (एक्वाएक्स) ने मत्स्य विकास की संभावनाओं और प्रोटीन उपलब्धता व रोजगार सृजन में मत्स्य क्षेत्र के महत्व पर प्रकाश डाला. तकनीकी सत्र के पहले दिन डॉ. संजय श्रीवास्तव (मेधा हैचरी, महराजगंज) ने मत्स्य बीज उत्पादन, राजीव रंजन सिंह (आर.एन.आर. एक्वा, लखनऊ) ने कैट फिश फार्मिंग, मनोज शर्मा ने झींगा पालन, मनीष वर्मा ने केज कल्चर और शुभम सिंह ने आर्नामेंटल फिश फार्मिंग पर प्रस्तुति दी.