GMO चावल विवाद पर भारत सख्त, चीन के आरोपों को नकारा… अब APEDA देगा चुनौती

सरकार और वैज्ञानिक संस्थानों से मिली इस स्पष्ट जानकारी के बाद APEDA अब चीन के फैसले को चुनौती देने की तैयारी कर रहा है. भारत यह साबित करेगा कि उसके चावल पर लगाए गए आरोप सही नहीं हैं. यह कदम इसलिए भी जरूरी है क्योंकि चावल भारत का एक बड़ा निर्यात उत्पाद है और इससे लाखों किसानों की आजीविका जुड़ी है.

Kisan India
नई दिल्ली | Published: 30 Apr, 2026 | 01:46 PM

Non-GMO rice export: हाल ही में भारत के चावल को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक बड़ा विवाद सामने आया, जब चीन ने भारतीय चावल की कुछ खेप को यह कहकर खारिज कर दिया कि उसमें जेनेटिकली मॉडिफाइड (GM) तत्व हो सकते हैं. इस खबर के बाद किसानों, व्यापारियों और निर्यातकों के बीच चिंता बढ़ गई. लेकिन अब भारत सरकार और वैज्ञानिक संस्थानों ने इस पूरे मामले पर पूरी तरह साफ स्थिति रख दी है. उनका कहना है कि भारत में उगाया जाने वाला चावल पूरी तरह नॉन-GMO है और इसमें किसी तरह का GM इस्तेमाल नहीं होता.

क्या है पूरा मामला?

चीन द्वारा भारतीय चावल को खारिज किए जाने के बाद यह सवाल उठने लगा कि क्या भारत में GM चावल की खेती हो रही है. इस पर स्थिति स्पष्ट करने के लिए APEDA अब जो जवाब सामने आया है, वह भारत के पक्ष को पूरी तरह मजबूत करता है.

पर्यावरण मंत्रालय ने क्या कहा?

बिजनेस लाइन की खबर के अनुसार, भारत सरकार के पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (MoEFCC) ने साफ कहा है कि देश में GM चावल को खेती के लिए कभी मंजूरी नहीं दी गई है. सरकार के तहत काम करने वाली आनुवंशिक इंजीनियरिंग मूल्यांकन समिति (GEAC) ने भी किसी GM चावल को हरी झंडी नहीं दी है. इसका मतलब साफ है कि भारत में जो चावल उगाया जा रहा है, वह पूरी तरह प्राकृतिक और सुरक्षित है.

ICAR ने भी किया साफ

इस मामले पर ICAR ने भी अपनी बात रखी है. ICAR के वैज्ञानिकों ने बताया कि भारत में किसी भी GM चावल की न तो सिफारिश की गई है और न ही इस पर कोई सक्रिय शोध चल रहा है. उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि देश में जो बीज किसानों को दिए जाते हैं, वे सभी नॉन-GM हैं. यानी खेत से लेकर बाजार तक, हर जगह चावल पूरी तरह GM मुक्त है.

जीनोम एडिटिंग को लेकर भ्रम दूर

सरकार ने यह भी बताया कि कुछ जीनोम-एडिटेड पौधों (SDN1 और SDN2) को कुछ नियमों में छूट दी गई है, लेकिन यह GM फसलें नहीं होतीं. इनमें बाहर से कोई DNA नहीं डाला जाता, इसलिए इन्हें सुरक्षित माना जाता है. इससे यह साफ हो गया कि भारत में GM चावल की कोई अनुमति नहीं है.

अब चीन को दिया जाएगा जवाब

सरकार और वैज्ञानिक संस्थानों से मिली इस स्पष्ट जानकारी के बाद APEDA अब चीन के फैसले को चुनौती देने की तैयारी कर रहा है. भारत यह साबित करेगा कि उसके चावल पर लगाए गए आरोप सही नहीं हैं. यह कदम इसलिए भी जरूरी है क्योंकि चावल भारत का एक बड़ा निर्यात उत्पाद है और इससे लाखों किसानों की आजीविका जुड़ी है.

किसानों और व्यापार पर क्या असर?

अगर इस तरह के आरोप लंबे समय तक चलते हैं, तो इससे किसानों और निर्यातकों को नुकसान हो सकता है. लेकिन अब सरकार के साफ रुख से उम्मीद है कि स्थिति जल्द सामान्य हो जाएगी और भारत का चावल पहले की तरह अंतरराष्ट्रीय बाजार में अपनी पहचान बनाए रखेगा.

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