सोया खली निर्यात में बड़ा झटका, 4 साल के निचले स्तर पर पहुंचा कारोबार… विदेशी खरीदारों ने बनाई दूरी

मंगलवार को भारतीय बाजार में सोया खली की कीमत लगभग 64,625 रुपये प्रति टन पहुंच गई. अंतरराष्ट्रीय बाजार में जून डिलीवरी के लिए भारतीय सोया खली करीब 680 डॉलर प्रति टन के भाव पर ऑफर की जा रही है, जबकि दक्षिण अमेरिकी देश वही उत्पाद करीब 430 डॉलर प्रति टन में बेच रहे हैं.

Kisan India
नई दिल्ली | Published: 20 May, 2026 | 07:27 AM

Soymeal exports: भारत से सोया खली (Soymeal) के निर्यात में इस साल बड़ी गिरावट देखने को मिल सकती है. उद्योग से जुड़े विशेषज्ञों का कहना है कि लगातार बढ़ती कीमतों की वजह से भारतीय सोया खली अब अंतरराष्ट्रीय बाजार में काफी महंगी हो गई है. यही कारण है कि विदेशी खरीदार अब भारत की बजाय दक्षिण अमेरिका और उत्तर अमेरिका जैसे देशों से सस्ती सोया खली खरीद रहे हैं.

रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार चालू 2025-26 विपणन वर्ष में भारत का सोया खली निर्यात घटकर करीब 9 लाख टन तक पहुंच सकता है. पिछले साल यह निर्यात करीब 20.2 लाख टन था. यानी इस साल निर्यात लगभग आधा रह जाने का अनुमान है. अगर ऐसा होता है तो यह पिछले चार साल का सबसे निचला स्तर होगा.

एक महीने में 47 प्रतिशत तक बढ़ गई कीमत

रिपोर्ट के अनुसार भारतीय सोया खली की कीमतों में पिछले एक महीने के दौरान करीब 47 प्रतिशत की भारी बढ़ोतरी हुई है. वहीं अगर पूरे सीजन की बात करें तो 1 अक्टूबर से अब तक कीमतों में करीब 85 प्रतिशत तक उछाल दर्ज किया गया है.

मंगलवार को भारतीय बाजार में सोया खली की कीमत लगभग 64,625 रुपये प्रति टन पहुंच गई. अंतरराष्ट्रीय बाजार में जून डिलीवरी के लिए भारतीय सोया खली करीब 680 डॉलर प्रति टन के भाव पर ऑफर की जा रही है, जबकि दक्षिण अमेरिकी देश वही उत्पाद करीब 430 डॉलर प्रति टन में बेच रहे हैं. यही बड़ा कारण है कि विदेशी खरीदार अब भारत से दूरी बना रहे हैं. कीमतों में इतना बड़ा अंतर होने से भारतीय निर्यातकों को नए ऑर्डर मिलना लगभग बंद हो गया है.

निर्यातकों को नहीं मिल रहे नए ऑर्डर

बिजनेस लाइन की खबर के अनुसार, महाराष्ट्र ऑयल एक्सट्रैक्शन्स के प्रबंध निदेशक मनोज अग्रवाल ने कहा कि भारतीय कीमतें अब वैश्विक बाजार की तुलना में काफी ज्यादा हो चुकी हैं. उन्होंने बताया कि तेल मिलों को नए निर्यात पूछताछ तक नहीं मिल रहे हैं, सौदे होना तो बहुत दूर की बात है.

कृषि उत्पाद निर्यातक और सूरज इम्पेक्स के संस्थापक विनोद जैन का कहना है कि दक्षिण अमेरिकी देशों में सोया खली की सप्लाई काफी ज्यादा है और वहां कीमतें भी कम हैं. इसी वजह से एशियाई खरीदार अब उन देशों की ओर रुख कर रहे हैं.

दक्षिण अमेरिका को मिल रहा फायदा

भारत के निर्यात में गिरावट का सबसे ज्यादा फायदा ब्राजील, अर्जेंटीना और दूसरे दक्षिण अमेरिकी देशों को मिल रहा है. ये देश अब एशियाई बाजारों में अपनी हिस्सेदारी तेजी से बढ़ा रहे हैं. पहले बांग्लादेश, नेपाल, जर्मनी और नीदरलैंड जैसे कई देश भारत से बड़ी मात्रा में सोया खली खरीदते थे. भारतीय सोया खली की खास बात यह थी कि यह गैर-जीएम यानी Non-GMO सोयाबीन से तैयार होती है, जिसकी वैश्विक बाजार में अच्छी मांग रहती थी. लेकिन अब बढ़ती कीमतों ने भारत की प्रतिस्पर्धा कमजोर कर दी है.

आखिर क्यों बढ़ रहे हैं सोया खली के दाम?

विशेषज्ञों का कहना है कि इस बार खराब मौसम की वजह से भारत में सोयाबीन उत्पादन काफी प्रभावित हुआ है. कई राज्यों में कम बारिश और मौसम की अनियमितता के कारण उत्पादन घट गया. दूसरी तरफ देश में पोल्ट्री उद्योग की मांग लगातार मजबूत बनी हुई है. चिकन और अंडा उत्पादन में इस्तेमाल होने वाले पशु आहार में सोया खली का बड़ा उपयोग होता है. घरेलू मांग बढ़ने और उत्पादन घटने की वजह से बाजार में सप्लाई कम हो गई है, जिससे कीमतों में तेजी आई है.

महाराष्ट्र के लातूर स्थित बड़े सोयाबीन प्रोसेसर अशोक भुताडा का कहना है कि बाजार में सप्लाई काफी तंग बनी हुई है. यही वजह है कि आने वाले कुछ महीनों तक कीमतें ऊंची रह सकती हैं.

किसानों को फायदा, लेकिन निर्यातकों की चिंता बढ़ी

सोयाबीन और सोया खली की कीमत बढ़ने से किसानों को बेहतर दाम जरूर मिल रहे हैं, लेकिन निर्यातकों के लिए हालात मुश्किल होते जा रहे हैं. अगर निर्यात लगातार घटता रहा तो भारत की वैश्विक बाजार में हिस्सेदारी कम हो सकती है. साथ ही विदेशी खरीदार दूसरे देशों के साथ लंबे समय के समझौते भी कर सकते हैं, जिससे भविष्य में भारतीय निर्यातकों को और नुकसान हो सकता है.

आने वाले महीनों में क्या होगा?

विशेषज्ञों का मानना है कि अगर उत्पादन में सुधार नहीं हुआ और घरेलू मांग मजबूत बनी रही तो सोया खली की कीमतें अगले कुछ महीनों तक ऊंची बनी रह सकती हैं. ऐसे में भारत के लिए वैश्विक बाजार में प्रतिस्पर्धा करना और मुश्किल हो सकता है. फिलहाल निर्यातक सरकार और बाजार दोनों की स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं.

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