रूस की जांच में पास हुए 3797 और सूर्या आलू, चिप्सोना फेल… हाथरस को मिला बड़ा ऑर्डर

पिछले साल उत्तर प्रदेश से तीन प्रमुख किस्मों 3797, सूर्या और चिप्सोना के आलू के सैंपल रूस भेजे गए थे. इन सैंपलों की जांच रूस की अंतरराष्ट्रीय स्तर की प्रयोगशालाओं में की गई, जहां आलू की संरचना, स्वाद, नमी, स्टोरेज क्षमता और घरेलू उपयोग की अनुकूलता जैसे कई पैमानों पर परीक्षण हुआ.

नई दिल्ली | Updated On: 13 Jan, 2026 | 10:45 AM

Potato export: घरेलू मंडियों और कोल्ड स्टोरेज पर निर्भर रहने वाला आलू अब अंतरराष्ट्रीय बाजार में अपनी जगह बना रहा है. रूस की अंतरराष्ट्रीय प्रयोगशाला से मिली ताजा रिपोर्ट ने यह साफ कर दिया है कि भारत में उगाई जा रही कुछ खास किस्में वैश्विक मानकों पर पूरी तरह खरी उतरती हैं. खास तौर पर 3797 और सूर्या किस्म के आलू ने गुणवत्ता, स्वाद और भंडारण के मामले में रूस की जांच में सफलता हासिल की है, जबकि चिप्सोना किस्म इस बार मानकों पर खरी नहीं उतर पाई.

रूस की प्रयोगशाला से मिली मंजूरी

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, पिछले साल उत्तर प्रदेश से तीन प्रमुख किस्मों 3797, सूर्या और चिप्सोना के आलू के सैंपल रूस भेजे गए थे. इन सैंपलों की जांच रूस की अंतरराष्ट्रीय स्तर की प्रयोगशालाओं में की गई, जहां आलू की संरचना, स्वाद, नमी, स्टोरेज क्षमता और घरेलू उपयोग की अनुकूलता जैसे कई पैमानों पर परीक्षण हुआ. जांच के नतीजों में 3797 और सूर्या किस्म ने सभी जरूरी मानकों को पूरा किया, जिसके बाद रूस ने इन दोनों किस्मों के आयात को बिना किसी शर्त के मंजूरी दे दी. यह फैसला भारतीय आलू निर्यात के लिए एक बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है.

APEDA की भूमिका

इस पूरी प्रक्रिया में कृषि एवं प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (APEDA) की अहम भूमिका रही है. APEDA ने न सिर्फ सैंपल भेजने और अंतरराष्ट्रीय परीक्षण की प्रक्रिया को समन्वित किया, बल्कि निर्यात के लिए जरूरी तकनीकी और गुणवत्ता संबंधी दस्तावेज भी तैयार करवाए. APEDA के चेयरमैन अभिषेक देव ने इस उपलब्धि की पुष्टि करते हुए कहा कि रूस की मंजूरी मिलने के बाद अब भारत से बड़े पैमाने पर आलू का निर्यात संभव हो सकेगा. उन्होंने यह भी बताया कि यह सिर्फ एक देश तक सीमित अवसर नहीं है, बल्कि इससे अन्य यूरोपीय और एशियाई बाजारों के दरवाजे भी खुल सकते हैं.

हाथरस से शुरू होगा नया निर्यात अध्याय

रूस से मिली मंजूरी के बाद हाथरस क्षेत्र को 3797 किस्म के आलू का करीब चार लाख पैकेट का बड़ा ऑर्डर मिला है. योजना के मुताबिक अप्रैल से पहली खेप रवाना की जाएगी और सितंबर तक निर्यात का यह सिलसिला लगातार चलता रहेगा. इससे न सिर्फ हाथरस बल्कि आसपास के जिलों में आलू उत्पादन और सप्लाई चेन को भी मजबूती मिलेगी. यह क्षेत्र पहले से ही आलू उत्पादन के लिए जाना जाता है और अब निर्यात के साथ इसकी पहचान और मजबूत होगी.

क्यों खास हैं 3797 और सूर्या किस्म

रूस की प्रयोगशाला में पास होने के पीछे इन किस्मों की कुछ खास खूबियां हैं. 3797 और सूर्या आलू का स्वाद संतुलित होता है, इनमें नमी का स्तर नियंत्रित रहता है और ये लंबे समय तक भंडारण के योग्य होते हैं. रूस में घरेलू उपयोग और प्रोसेसिंग दोनों के लिए ऐसे आलू की मांग रहती है, जो पकाने पर रंग और बनावट बनाए रखें. इन्हीं वजहों से इन किस्मों को अंतरराष्ट्रीय गुणवत्ता मानकों पर उपयुक्त माना गया.

किसानों और बाजार पर असर

निर्यात की शुरुआत से घरेलू बाजार में भी सकारात्मक असर पड़ने की उम्मीद है. जब आलू का बड़ा हिस्सा अंतरराष्ट्रीय बाजार में जाएगा, तो मंडियों पर दबाव कम होगा और कीमतों में सुधार आएगा. इससे कोल्ड स्टोरेज पर निर्भरता भी घटेगी, जहां भंडारण शुल्क और ब्याज का बोझ अक्सर परेशानी का कारण बनता है. निर्यात से जुड़े बेहतर दाम किसानों की आमदनी को स्थिर करने में मदद करेंगे.

पहले भी हो चुकी है शुरुआत

हाथरस से आलू निर्यात का प्रयास नया नहीं है. वर्ष 2019 में पहली बार यहां से 3797 किस्म का आलू विदेश भेजा गया था और उस समय कीमतों में अच्छा उछाल देखने को मिला था. अब रूस की ताजा मंजूरी इस प्रक्रिया को और मजबूत आधार देती है. आने वाले समय में अन्य देशों तक भी निर्यात बढ़ाने की संभावनाएं तलाशी जा रही हैं.

अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतें

वैश्विक बाजार में 3797 किस्म के आलू की कीमत लगभग 100 से 125 रुपये प्रति किलो तक बताई जा रही है, जबकि सूर्या आलू 85 से 125 रुपये प्रति किलो के दायरे में बिक रहा है. ये दरें घरेलू बाजार की तुलना में कहीं बेहतर हैं और यही वजह है कि निर्यात को लेकर उत्साह बढ़ा है.

Published: 13 Jan, 2026 | 10:44 AM

Topics: