Indonesia peanut import policy: इंडोनेशिया ने मूंगफलीके आयात को लेकर एक नया नियम लागू किया है, जिससे भारत के निर्यातकों के सामने बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है. यह बदलाव ऐसे समय में आया है जब भारत से इंडोनेशिया को बड़े पैमाने पर मूंगफली का निर्यात होता रहा है. नए नियम का मकसद भले ही इंडोनेशिया में घरेलू उत्पादन को बढ़ावा देना है, लेकिन इसका सीधा असर भारतीय व्यापार पर पड़ सकता है.
क्या है नया नियम और क्यों हुआ लागू
इंडोनेशिया सरकार ने हाल ही में मूंगफली आयात के लिए कोटा प्रणाली लागू की है. इसके तहत अब केवल तय सीमा के भीतर ही आयात किया जा सकेगा. साथ ही गुणवत्ता मानकों को भी काफी सख्त कर दिया गया है.
इस नियम के लागू होने के साथ ही व्यापारियों को तैयारी के लिए बहुत कम समय दिया गया है. आमतौर पर ऐसे बदलावों के लिए करीब 90 दिन का समय मिलता है, लेकिन इस बार सिर्फ 14 दिन का समय दिया गया. इससे निर्यातकों के सामने अचानक नई मुश्किल खड़ी हो गई है.
भारतीय निर्यात पर पड़ सकता है बड़ा असर
भारत इंडोनेशिया को मूंगफली निर्यात करने वाले प्रमुख देशों में शामिल है. ऐसे में यह नया नियम भारतीय निर्यात को बुरी तरह प्रभावित कर सकता है. खास बात यह है कि अब निर्यातकों को ग्लोबल गुड एग्रीकल्चरल प्रैक्टिस यानी GAP सर्टिफिकेट लेना जरूरी होगा.
यह सर्टिफिकेट लेना आसान नहीं है और इसमें 3 से 6 महीने तक का समय लग सकता है. इसका मतलब है कि आने वाले कुछ महीनों तक भारत से इंडोनेशिया को मूंगफली का निर्यात लगभग ठप पड़ सकता है.
कीमतों में भारी उछाल की आशंका
जब निर्यात रुक जाएगा और बाजार में आपूर्ति कम होगी, तो कीमतों पर असर पड़ना तय है. विशेषज्ञों का मानना है कि मूंगफली की कीमतों में 60 से 80 प्रतिशत तक बढ़ोतरी हो सकती है, और कुछ मामलों में कीमतें दोगुनी भी हो सकती हैं. यह स्थिति केवल भारत ही नहीं, बल्कि अन्य देशों के लिए भी चुनौतीपूर्ण होगी, क्योंकि यह नियम सभी देशों पर समान रूप से लागू किया गया है.
APEDA के प्रयासों पर असर
भारत में कृषि और प्रसंस्कृत खाद्य उत्पादों के निर्यात को बढ़ावा देने वाली संस्था APEDA ने इंडोनेशिया में बाजार मजबूत करने के लिए कई प्रयास किए थे. लेकिन नए नियम से उन कोशिशों पर भी असर पड़ सकता है. यह नियम मूंगफली के दाने और छिलके वाली मूंगफली दोनों पर लागू होगा, हालांकि भुनी हुई मूंगफली पर यह नियम लागू नहीं है.
पहले भी आ चुके हैं गुणवत्ता को लेकर विवाद
यह पहली बार नहीं है जब इंडोनेशिया ने भारतीय मूंगफली पर सख्ती दिखाई है. पिछले साल सितंबर में इंडोनेशिया ने गुणवत्ता मानकों का हवाला देते हुए आयात रोक दिया था. खासकर अफ्लाटॉक्सिन के स्तर को लेकर आपत्ति जताई गई थी. बाद में निरीक्षण के बाद नवंबर में निर्यात दोबारा शुरू हुआ, लेकिन तब भी नियम काफी सख्त कर दिए गए थे. अफ्लाटॉक्सिन की सीमा 15 पीपीबी तय की गई, जिसे पूरा करना कई निर्यातकों के लिए मुश्किल साबित हुआ.
आंकड़ों से समझें व्यापार का महत्व
इंडोनेशिया भारत के मूंगफली निर्यात का एक बड़ा बाजार रहा है. पिछले कुछ वर्षों में भारत की कुल मूंगफली निर्यात का लगभग एक-तिहाई हिस्सा इंडोनेशिया जाता रहा है. वित्त वर्ष 2024-25 में भारत ने कुल 7.46 लाख टन मूंगफली का निर्यात किया, जिसकी कीमत करीब 795 मिलियन डॉलर थी. इसमें से 2.77 लाख टन मूंगफली इंडोनेशिया को भेजी गई, जिसकी कीमत लगभग 280 मिलियन डॉलर रही. वहीं 2025-26 के अप्रैल से फरवरी के बीच भारत ने कुल 6.34 लाख टन मूंगफली का निर्यात किया, जिसमें से 1.54 लाख टन इंडोनेशिया को गया, जिसकी कीमत करीब 161.52 मिलियन डॉलर रही.
क्या है चुनौतियां
नया नियम लागू होने के बाद भारतीय निर्यातकों के सामने सबसे बड़ी चुनौती GAP सर्टिफिकेट हासिल करना है. इसके अलावा सख्त गुणवत्ता मानकों को पूरा करना भी जरूरी होगा. अगर जल्द समाधान नहीं निकला, तो भारत के मूंगफली निर्यात पर इसका लंबा असर पड़ सकता है. इससे किसानों, व्यापारियों और पूरे सप्लाई चेन पर दबाव बढ़ेगा.