Onion Mandi Rate: कर्नाटक में एलपीजी की कमी के कारण कई होटल और ढाबे अस्थायी रूप से बंद हो गए हैं, जिससे प्याज की मांग और कम हो गई है. इसके चलते प्याज की कीमतों में गिरावट शुरू हो गई है. हालांकि, अधिक उत्पादन और कमजोर मांग के चलते प्याज की कीमतों में पहले से ही कमजोर थी. ऐसे में तेज गिरावट ने किसानों की आर्थिक स्थिति दयनीय कर दी है. मौजूदा समय में प्याज के दाम घटकर 500 से 1000 रुपये प्रति क्विंटल तक पहुंच गए हैं, जबकि पहले थोक बाजार में इसकी कीमत 1200 से 2000 रुपये प्रति क्विंटल थी.
बड़ी बात यह है कि होलसेल में गिरावट आने से खुदरा मार्केट में भी प्याज सस्ता हो गया है. 100 रुपये में 8 से 10 किलो तक प्याज बिक रहे हैं, जिससे किसानों को भारी नुकसान हो रहा है. कर्नाटक के विजयपुरा, चित्रदुर्ग, गडग, बल्लारी, कोप्पल, धारवाड़, बेलगावी, बागलकोट, हावेरी और चिक्कबल्लापुर जैसे प्रमुख उत्पादन जिलों में किसान मजबूरी में कम दाम पर प्याज बेच रहे हैं. इनमें चित्रदुर्ग सबसे ज्यादा प्रभावित इलाकों में शामिल है.
30 फीसदी होटल अस्थायी रूप से बंद हो गए
दासनपुरा एपीएमसी मर्चेंट्स एसोसिएशन के अध्यक्ष श्रीराम रेड्डी ने ‘द टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट’ को बताया कि होटल और खाने-पीने के कारोबार से मांग काफी घट गई है, क्योंकि करीब 30 फीसदी होटल अस्थायी रूप से बंद हो गए हैं. इसके अलावा इस साल अच्छी बारिश के कारण उत्पादन ज्यादा हुआ, जिससे बाजार में ज्यादा सप्लाई हो गई. उन्होंने कहा कि अच्छी क्वालिटी का प्याज भी सस्ता हो गया है. पहले जो प्याज 20 रुपये प्रति किलो बिकता था, अब उसकी कीमत घटकर करीब 10 रुपये प्रति किलो रह गई है.
किसान और व्यापारी दोनों को नुकसान
किसान और व्यापारी दोनों को इस समय भारी नुकसान हो रहा है. उनका कहना है कि अगर कम कीमत के समय खपत बढ़े, तो बाजार को संभालने में मदद मिल सकती है. व्यापारियों के मुताबिक इसका असर सिर्फ प्याज तक सीमित नहीं है, बल्कि अन्य सब्जियों की कीमतें भी गिर गई हैं, क्योंकि होटल और खाने-पीने के ठिकाने बंद होने से मांग कम हो गई है. निर्यात से जुड़ा बेंगलुरु का ‘रोज प्याज’ भी इस संकट से प्रभावित हुआ है और इसके दाम गिरकर 600 से 800 रुपये प्रति क्विंटल तक आ गए हैं. इससे बेंगलुरु ग्रामीण, चिक्कबल्लापुर और कोलार जिलों के किसानों की परेशानी और बढ़ गई है.
खाड़ी देशों में प्याज निर्यात प्रभावित
बायरागनहल्ली के किसान मधु बी ने कहा कि उन्होंने खाड़ी देशों में निर्यात के लिए 400 बोरी रोज प्याज की फसल तैयार की थी, जिसे चेन्नई के जरिए भेजना था. लेकिन ईरान से जुड़े तनाव के बाद कीमतें अचानक गिर गईं, जिससे उन्हें फसल खेत में ही रखनी पड़ी. उन्होंने कहा कि ज्यादा समय तक भंडारण संभव नहीं है, क्योंकि एक महीने बाद प्याज सड़ने लगता है. वहीं चिक्कबल्लापुर के सांसद के. सुधाकर ने केंद्र सरकार से हस्तक्षेप करने की मांग की है. उन्होंने मार्केट इंटरवेंशन स्कीम के तहत खरीद शुरू करने और यूरोप, उत्तरी अमेरिका, जापान व दक्षिण कोरिया जैसे नए निर्यात बाजार तलाशने की बात कही है, ताकि किसानों को राहत मिल सके.