Natural rubber price: देश में प्राकृतिक रबर की कीमतों में लगातार तेजी देखने को मिल रही है. हालात ऐसे हैं कि रबर के दाम अब रिकॉर्ड स्तर तक पहुंच गए हैं. बाजार में प्राकृतिक रबर का भाव 253 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गया है, जबकि केरल के कोट्टायम बाजार में कुछ सौदे 260 रुपये प्रति किलो तक होने की खबरें सामने आई हैं.
दरअसल, रबर की सप्लाई कम होने, पश्चिम एशिया में जारी तनाव, बढ़ती गर्मी और बारिश की कमी की वजह से बाजार में यह तेजी आई है. दूसरी तरफ उद्योगों की लगातार मांग ने भी कीमतों को ऊपर बनाए रखा है. ऐसे में रबर की बढ़ती कीमतों ने किसानों में नई उम्मीद जगाई है. खासकर केरल के रबर उत्पादक किसानों को लग रहा है कि लंबे समय बाद उन्हें अपनी फसल का बेहतर दाम मिल सकता है.
क्यों बढ़ रहे हैं रबर के दाम?
भारतीय रबर डीलर्स फेडरेशन के अनुसार रबर की कीमतों में तेजी के पीछे कई बड़ी वजहें हैं. सबसे बड़ी वजह पश्चिम एशिया में बढ़ता तनाव माना जा रहा है. वैश्विक बाजार में अनिश्चितता बढ़ने से कई वस्तुओं की कीमतें प्रभावित हुई हैं और इसका असर रबर बाजार पर भी पड़ा है. इसके अलावा रबर उत्पादन वाले इलाकों में तेज गर्मी और बारिश की कमी ने उत्पादन को प्रभावित किया. फरवरी, मार्च और अप्रैल के दौरान कई इलाकों में अत्यधिक तापमान के कारण रबर टैपिंग का काम काफी प्रभावित रहा.
उत्पादन घटने से बाजार में सप्लाई कम
बिजनेस लाइन की खबर के अनुसार, जॉर्ज वैली इंडियन रबर डीलर्स फेडरेशन (IRDF) के अध्यक्ष का कहना है कि इस समय बाजार में रबर की उपलब्धता कम हो गई है. रबर उत्पादन वाले कई क्षेत्रों में टैपिंग यानी पेड़ों से रबर निकालने का काम कुछ समय के लिए बंद करना पड़ा. इससे बाजार में कच्चे माल की सप्लाई घट गई. जब सप्लाई कम होती है और मांग बनी रहती है तो कीमतें तेजी से बढ़ने लगती हैं. यही स्थिति इस समय रबर बाजार में देखने को मिल रही है.
वैश्विक बाजार का भी असर
भारत में रबर की कीमतें अंतरराष्ट्रीय बाजार के रुझान के अनुसार भी बढ़ रही हैं. जानकारों के मुताबिक वैश्विक बाजार में रबर की कीमत करीब 288 रुपये प्रति किलो तक पहुंच चुकी है. दक्षिण-पूर्व एशिया के कई देशों में उत्पादन प्रभावित होने और कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आने से अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी रबर महंगा हुआ है. इसका सीधा असर भारतीय बाजार पर भी दिखाई दे रहा है.
किसान रोक रहे हैं स्टॉक
बाजार में तेजी को देखते हुए कई किसान अभी अपना स्टॉक रोककर बैठे हैं. उन्हें उम्मीद है कि आने वाले दिनों में कीमतें और बढ़ सकती हैं. हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि किसान लंबे समय तक रबर स्टोर नहीं कर सकते क्योंकि इससे गुणवत्ता खराब होने का खतरा रहता है. इसके बावजूद फिलहाल बाजार में सीमित सप्लाई की वजह से दाम मजबूत बने हुए हैं.
आने वाले दिनों में क्या कीमतें घट सकती हैं?
खबर के अनुसार आने वाले समय में बाजार कुछ हद तक नरम पड़ सकता है. पश्चिम एशिया में तनाव कम होने के संकेत मिल रहे हैं. इसके अलावा रबर उत्पादन वाले इलाकों में हाल के दिनों में अच्छी बारिश हुई है. इससे उत्पादन बढ़ने की उम्मीद है. अगर मौसम सामान्य रहा और मानसून अच्छा रहा तो बाजार में रबर की सप्लाई बढ़ सकती है.
मानसून से किसानों को उम्मीद
रबर उत्पादक किसान अब दक्षिण-पश्चिम मानसून का इंतजार कर रहे हैं. मौसम विभाग के अनुसार मई के मध्य तक मानसून सक्रिय हो सकता है. अच्छी बारिश होने पर रबर उत्पादन में तेजी आने की उम्मीद है. दरअसल, बारिश शुरू होने के बाद पेड़ों से ज्यादा मात्रा में लेटेक्स निकलता है, जिससे उत्पादन बढ़ता है.
केरल सरकार से भी उम्मीदें बढ़ीं
हाल ही में केरल में नई सरकार बनने के बाद रबर किसानों की उम्मीदें और बढ़ गई हैं. किसानों को उम्मीद है कि सरकार चुनावी वादों के अनुसार प्राकृतिक रबर के लिए 250 रुपये प्रति किलो का न्यूनतम समर्थन मूल्य लागू कर सकती है. अगर ऐसा होता है तो किसानों को बाजार में बेहतर सुरक्षा मिलेगी और कीमतों में गिरावट की स्थिति में भी नुकसान कम होगा.
उद्योगों पर भी पड़ रहा असर
रबर की कीमतें बढ़ने से टायर, ऑटोमोबाइल और रबर आधारित उद्योगों की लागत भी बढ़ सकती है. भारत में प्राकृतिक रबर का उपयोग सबसे ज्यादा टायर उद्योग में होता है. ऐसे में लगातार बढ़ती कीमतों का असर उत्पादन लागत पर पड़ सकता है. हालांकि उद्योगों की मजबूत मांग फिलहाल बाजार को सहारा दे रही है.
किसानों के लिए सुनहरा मौका?
कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि मौजूदा हालात रबर किसानों के लिए अच्छा मौका हो सकते हैं. आने वाले महीनों में कीमतें मजबूत बनी रहती हैं तो किसानों की आमदनी में अच्छा इजाफा हो सकता है. कई किसान अब पहले से बंद पड़े इलाकों में भी दोबारा टैपिंग शुरू कर रहे हैं ताकि बढ़ती कीमतों का फायदा उठाया जा सके.