Agriculture News: ओडिशा के कोरापुट जिले में जिला प्रशासन ने गणतंत्र दिवस के मौके पर को मांस, चिकन, मछली और अंडों की बिक्री पर रोक लगा दी है. आदेश में लोगों से कहा गया है कि वे इस दिन सम्मान के तौर पर शाकाहारी भोजन अपनाएं. जिला कलेक्टर मनोज सत्यबान महाजन ने यह निर्देश ब्लॉक विकास अधिकारियों, तहसीलदारों और कार्यकारी अधिकारियों को भेजा और इसे पूरे जिले में सख्ती से लागू करने को कहा. हालांकि, कोरापुट के वकील सत्यबादी मोहापात्रा ने कहा कि यह निर्देश संविधान के अनुच्छेद 14 और 15 का उल्लंघन करता है, जो धर्म के आधार पर भेदभाव पर रोक लगाते हैं और समानता की गारंटी देते हैं.
हिन्दुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, उन्होंने सवाल उठाया कि गणतंत्र दिवस एक राष्ट्रीय पर्व है, धार्मिक नहीं, तो खाने-पीने की चीजों पर रोक क्यों लगाई जा रही है. स्थानीय निवासी बिद्युत खड़ा ने कहा कि इस प्रतिबंध से मांस और मछली बेचने वाले विक्रेता प्रभावित होंगे, क्योंकि उनकी रोजमर्रा की आमदनी इस पर निर्भर है. उन्होंने सुझाव दिया कि प्रशासन पूरी तरह प्रतिबंध लगाने की बजाय केवल दुकानों के समय को नियंत्रित कर सकता था. कोरापुट प्रशासन का यह आदेश देशभर में ऐसे निर्देशों की एक नई कड़ी है.
कब-कब लिए गए फैसले
पिछले कुछ सालों में कई राज्यों में राष्ट्रीय या धार्मिक अवसरों पर मांस और मछली की बिक्री पर प्रतिबंध लगाए गए हैं. महाराष्ट्र के कल्याण-डोंबिवली, मालेगांव, छत्रपति संभाजी नगर और नागपुर में स्वतंत्रता दिवस पर मांस की बिक्री पर रोक लगी थी, जिससे नाराजगी हुई थी. 2024 में, असम सरकार ने अयोध्या में राम मंदिर उद्घाटन से पहले मांसाहारी खाद्य पदार्थों की बिक्री पर प्रतिबंध लगाया. उसी साल, ग्रेटर हैदराबाद नगर निगम ने महावीर जयंती के मौके पर पूरे शहर में मांस की दुकानों और कसाइखानों को बंद करने का आदेश दिया.
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मांस और मछली की बिक्री पर रोक लगाई
साल 2025 में, इंदौर नगर निगम ने हिंदू और जैन धार्मिक त्योहारों के तीन दिनों के लिए मांस और मछली की बिक्री पर रोक लगाई. ऐसे आदेशों ने लोगों की भोजन चुनने की स्वतंत्रता पर सवाल खड़े कर दिए थे. वहीं, पिछले साल राजस्थान सरकार ने धार्मिक भावनाओं का सम्मान करते हुए राज्य में दो दिन 28 अगस्त (पर्युषण पर्व) और 6 सितंबर (अनंत चतुर्दशी) मांस और अंडों की बिक्री पूरी तरह बंद करने का आदेश दिया था. इस दौरान पूरे प्रदेश में नॉनवेज की दुकानें, बूचड़खाने, होटल-ढाबे और अंडे बेचने वाले ठेले बंद रहे थे. सरकार का कहना था कि यह कदम सामाजिक सौहार्द और धार्मिक आस्थाओं का सम्मान करने के लिए उठाया गया है.