Tomato Price Fall: इस साल बंपर पैदावार के कारण न केवल आलू और प्याज की कीमत में गिरावट आई है, बल्कि टमाटर भी सस्ता हो गया है. ऐसे में किसानों को आर्थिक नुकसान हो रहा है. देश के सबसे बड़े टमाटर उत्पादक राज्य आंध्र प्रदेश में कीमतों में कुछ ज्यादा ही गिरावट देखने को मिल रही है. ऐसे में किसान लागत भी नहीं निकाल पा रहे हैं. रिटेल मार्केट में टमाटर 20 से 30 रुपये किलो बिक रहा है. इसी तरह आलू 10 रुपये किलो हो गया है. वहीं, दिल्ली-एनसीआर में प्याज का रेट 20 से 25 रुपये किलो है. ऐसे में उत्पादक आर्थिक नुकान की मार झेल रहे हैं. जबकि, होलसेल मार्केट में टमाटर किसानों को 10 रुपये किलो से भी कम कीमत मिल रही है.
बात अगर आंध्र प्रदेश की करें तो टमाटर किसानों के लिए यह सीजन मुनाफे की जगह घाटे में बदल गया है. हालांकि, बंपर पैदावार से शुरुआत में किसान काफी खुश थे. उन्हें उम्मीद थी कि अच्छी कमाई होगी. लेकिन बाजार में टमाटर की अधिक आवक के चलते कीमतें तेजी से गिर गईं. दरअसल, इस साल चित्तूर और मदनपल्ले में टमाटर की बड़े पैमाने पर खेती हुई. कृष्णा, NTR, गुंटूर और वेस्ट गोदावरी से भारी आपूर्ति ने बाजार भर दिया. किसानों ने प्रति एकड़ लगभग 40,000 रुपये खर्च किए. वहीं अब चित्तूर और मदनपल्ले में टमाटर की खेती करने वाले किसानों का कहना है कि उच्च खर्च के बावजूद बाजार में टमाटर की कीमतें बहुत कम हो गई हैं. ऐसे में किसानों के लिए खर्च निकालना भी मुश्किल हो गया है.
200 रुपये में बिक रहा है 20 किलो टमाटर
द टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, फसल अच्छी होने के बावजूद किसानों को भारी घाटा हुआ. प्रति एकड़ 15 से 20 टन टमाटर होने के बाद भी बाजार में कीमतें बहुत कम हैं. 25 किलो के एक बक्से का टमाटर सिर्फ 200 रुपये बिक रहा है. यानी किसानों को 10 रुपये किलो से भी कम रेट मिल रहा है. कई किसान अब अपनी फसल काटने से हिचक रहे हैं, क्योंकि मजदूरी और परिवहन के खर्च में और नुकसान होने का डर है. NTR जिले के रेड्डी गुदेम के किसान पुल्लुरु सुब्बा रेड्डी ने कहा कि इस साल टमाटर की खेती घाटे वाला काम बन गई है.
कीटों ने फसल को काफी नुकसान पहुंचाया
किसानों का कहना है कि कीटों ने फसल को काफी नुकसान पहुंचाया और उन्होंने कीटनाशकों पर भारी खर्च किया. 2025 में आए कई चक्रवातों ने फसल को और नुकसान पहुंचाया. इसके बावजूद अच्छी पैदावार हुई, लेकिन कीमतें इतनी गिर गईं कि निवेश का आधा भी वापस नहीं निकल पा रहा है. खास बात यह है कि टमाटर ही नहीं, लौकी 6 रुपये प्रति किलो और भिंडी 20 रुपये प्रति किलो बिक रही है, जबकि शहरों में रिटेल कीमतें करीब दोगुना हैं. नंदीगामा के कुमार स्वामी ने कहा कि बड़ी खेपों और सीधे बाजार तक पहुंच न होने की वजह से किसानों और उपभोक्ताओं के बीच बहुत बड़ा अंतर है. उचित कीमत न मिलने की वजह से कई किसान सड़क किनारे ही सब्जियां बेच रहे हैं. ये बताता है कि अच्छी पैदावार भी बिना बाजार समर्थन के नुकसानदेह हो सकती है.
हरियाणा में एक दिन में बदल गया टमाटर का रेट
वहीं बात हरियाणा की करें, तो यहां पर भी टमाटर का वही हाल है. Agmarknet के आंंकड़ों के मुताबिक, हरियाणा के पलवल जिले के होडल एपीएमसी में 26 फरवरी को हाइब्रिड टमाटर की कीमतें 1,000 से 1,200 रुपये प्रति क्विंटल दर्ज की गई. यानी किसानों को 10 से 12 रुपये किलो रेट मिला. हालांकि, इस दिन औसत दर 1,100 रुपये प्रति क्विंटल रही. जबकि, 25 फरवरी को होडल एपीएमसी में हाइब्रिड टमाटर की न्यूनतम कीमतें 1,200 प्रति क्विंटल, अधिकतम 1,700 रुपये प्रति क्विंटल और औसत 1,500 रुपये प्रति क्विंटल थीं. यानि एक दिन के अंदर ही माटर की कीमतों में भारी गिरावट दर्ज की गई. व्यापारियों का कहना है कि आने वाले दिनों में कीमतों में और गिरावट आ सकती है.