Tomato Price Hike: हिमाचल प्रदेश के सोलन में टमाटर किसानों को इन दिनों दोहरी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है. एक तरफ मंडियों में टमाटर के दाम कम मिल रहे हैं, तो वहीं दूसरी तरफ कीटनाशकों की कीमत बढ़ने से खेती की लागत काफी बढ़ गई है. किसानों का कहना है कि बाजार में मिलने वाले कई कीटनाशक फसलों को कीटों से बचाने में भी असरदार साबित नहीं हो रहे हैं. सोलन कृषि उपज मंडी समिति (APMC) में टमाटर बेचने पहुंचे किसानों ने कहा कि इस सीजन में सब्जियों की फसल पर सफेद मक्खी और माइट्स जैसे कीटों का प्रकोप बढ़ गया है.
किसान पाल सिंह ठाकुर ने द ट्रिब्यून से कहा कि मुंबई की एक कंपनी के कीटनाशकों का इस्तेमाल करने के बावजूद टमाटर, खीरा और बीन्स जैसी फसलों में कीटों पर नियंत्रण नहीं हो पाया. उन्होंने कहा कि आमतौर पर माइट्स का प्रकोप मई में शुरू होता है, लेकिन इस बार कई बार कीटनाशकों का छिड़काव करने के बाद भी इन पर काबू नहीं पाया जा सका. इससे फसल की पैदावार और गुणवत्ता दोनों प्रभावित हुई हैं.
फसल की गुणवत्ता खराब हो रही है
किसान ने कहा कि कीटनाशकों की लागत करीब चार गुना तक बढ़ गई है, जबकि इसके बावजूद फसल की गुणवत्ता खराब हो रही है. कम बाजार भाव और बढ़ती उत्पादन लागत ने टमाटर किसानों की मुश्किलें और बढ़ा दी हैं. सोलन में इस सीजन टमाटर की गुणवत्ता खराब होने के कारण किसानों को बेहद कम दाम मिल रहे हैं. किसानों का कहना है कि मंडियों में मिल रही कीमत इतनी कम है कि कीटनाशकों पर खर्च हुई रकम भी वापस नहीं हो पा रही है. इससे किसानों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है.
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कीट नियंत्रण प्रभावी साबित नहीं हुए
किसानों ने डॉ. वाईएस परमार यूनिवर्सिटी ऑफ हॉर्टिकल्चर एंड फॉरेस्ट्री, नौणी के वैज्ञानिकों से बाजार में बिक रहे कीटनाशकों की गुणवत्ता और उनकी प्रभावशीलता की जांच करने की मांग की है. किसानों का आरोप है कि कई कीटनाशक कीटों पर असर नहीं कर रहे हैं, जबकि उनकी कीमत लगातार बढ़ रही है. किसानों ने केंद्र सरकार से भी उन कंपनियों के खिलाफ कार्रवाई करने और उनके ऐसे उत्पादों पर प्रतिबंध लगाने की मांग की है, जो फसलों में कीट नियंत्रण में प्रभावी साबित नहीं हुए हैं.
5,274 क्विंटल टमाटर की आवक हुई
टमाटर सोलन की प्रमुख नकदी फसल है. यहां के टमाटर अपनी गुणवत्ता के लिए देशभर में जाने जाते हैं. सोलन से टमाटर की सप्लाई नई दिल्ली, उत्तर प्रदेश, पंजाब और मुंबई समेत देश के कई बड़े बाजारों में होती है, ऐसे में इस बार फसल की गुणवत्ता और कम कीमतों ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है. हिमाचल प्रदेश के सोलन में टमाटर किसानों को इस सीजन कम कीमतों के कारण भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है. सोलन APMC के चेयरमैन रोशन ठाकुर के अनुसार, इस सीजन 7 जून से अब तक मंडी में 2,89,429 क्विंटल टमाटर की खरीद-बिक्री हो चुकी है. अकेले शुक्रवार को 5,274 क्विंटल टमाटर की आवक हुई.
मार्केट में क्या है टमाटर का रेट
उन्होंने बताया कि टमाटर की कीमतों में भारी गिरावट का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि 24 किलो की एक क्रेट करीब 400 रुपये में बिक रही है. यानी किसानों को औसतन करीब 16 रुपये प्रति किलो का भाव मिल रहा है. रोशन ठाकुर के मुताबिक, राष्ट्रीय बाजारों में बेंगलुरु से आने वाले बेहतर गुणवत्ता वाले टमाटरों के कारण सोलन के टमाटरों को कड़ी प्रतिस्पर्धा मिल रही है. इसके अलावा स्थानीय कारणों से भी कीमतों पर दबाव बना हुआ है.