Tamil Nadu News: तमिलनाडु में किसानों ने TVK सरकार के पहले कृषि बजट को लेकर निराशा जताई है. किसानों का कहना है कि बजट में उनकी प्रमुख समस्याओं का समाधान नहीं किया गया. उनका कहना है कि जिस तरह खेतों में खड़ी कुरुवई फसल सूख रही है, उसी तरह बजट से उनकी उम्मीदें भी टूट गई हैं. किसानों ने कहा कि इस साल कई इलाकों में कावेरी का पानी नहीं मिलने के कारण कुरुवई की खेती नहीं हो सकी. इसके बावजूद बजट में कावेरी डेल्टा क्षेत्र को सूखाग्रस्त घोषित करने का कोई ऐलान नहीं किया गया. किसानों के मुताबिक, बजट में मेकेदाटु बांध के मुद्दे पर भी कोई घोषणा नहीं की गई. खास बात यह है कि इस साल कुरुवई धान की खेती घटकर करीब 1,118.5 हेक्टेयर पर सिमट गई है.
किसानों ने कुरुवई के लिए दिए जाने वाले विशेष पैकेज को सांबा फसल तक बढ़ाने की मांग की थी, लेकिन बजट में इसका भी प्रावधान नहीं किया गया. इसके अलावा प्रभावित किसानों को 25,000 रुपये प्रति एकड़ सूखा राहत देने की मांग भी पूरी नहीं हुई. नागपट्टिनम में कुरुवई की खेती का रकबा इस साल काफी घट गया है. 2025 में जहां करीब 30,000 हेक्टेयर में कुरुवई की खेती हुई थी, वहीं इस साल यह घटकर करीब 1,118.5 हेक्टेयर रह गई है. किसानों के मुताबिक, मेट्टूर बांध खोलने में देरी इसका एक बड़ा कारण है.
भूजल के सहारे सीमित क्षेत्र में कुरुवई की खेती
जिन किसानों ने भूजल के सहारे सीमित क्षेत्र में कुरुवई की खेती की, उन्हें भी राहत नहीं मिली. लंबे समय से बारिश नहीं होने, तेज गर्मी और तेजी से गिरते भूजल स्तर के कारण खेतों में खड़ी फसल सूखने लगी है. किसानों का कहना है कि मौजूदा हालात में उन्हें आर्थिक नुकसान का सामना करना पड़ रहा है और सरकार से राहत की उम्मीद थी. नागपट्टिनम के तिरुमारुगल ब्लॉक के किसान ए. नेदुमारन ने द न्यू इंडियन एक्सप्रेस से कहा कि उनकी 14 एकड़ में लगी कुरुवई धान की पूरी फसल सूख गई है. अब उन्हें फसल बचने की कोई उम्मीद नहीं है. उन्होंने कहा कि तेज गर्मी, कम बारिश और लगातार गिरते भूजल स्तर की वजह से खेत में बोई गई पूरी फसल सूख गई. किसान के मुताबिक, पानी की कमी और गर्म मौसम ने कुरुवई की खेती को बुरी तरह प्रभावित किया है.
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किसानों ने कृषि बजट पर निराशा जताई
तमिलनाडु के किसानों ने TVK सरकार के पहले कृषि बजट पर निराशा जताई है. तमिलनाडु फार्मर्स प्रोटेक्शन एसोसिएशन के एसआर तमिलसेल्वन ने कहा कि बजट में कावेरी डेल्टा में चल रहे कृषि संकट की गंभीरता को नजरअंदाज किया गया है. उन्होंने कहा कि कावेरी का पानी नहीं मिलने के कारण हजारों किसान इस साल कुरुवई की खेती नहीं कर सके. ऐसे किसानों को सरकारी मदद से वंचित होने से बचाने के लिए कुरुवई स्पेशल पैकेज की सभी सुविधाएं सांबा फसल के लिए भी लागू की जानी चाहिए.
किसानों ने मुआवजे की मांग की
थलैनायर के किसान पी. कमल राम ने सरकार से उन किसानों को मुआवजा देने की मांग की, जो कुरुवई की खेती नहीं कर सके या जिनकी फसल खराब हो गई. उन्होंने आने वाले सांबा सीजन के लिए किसानों को तत्काल सहायता देने की भी अपील की. किसानों ने धान और गन्ने के न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) को लेकर भी सरकार पर वादा पूरा नहीं करने का आरोप लगाया. उनका कहना है कि TVK ने चुनावी घोषणापत्र में धान का MSP 3,500 रुपये प्रति क्विंटल और गन्ने का भाव 4,500 रुपये प्रति टन करने का वादा किया था, लेकिन बजट में इस संबंध में कोई घोषणा नहीं की गई. किसानों ने कहा कि बजट में चुनावी घोषणापत्र में किए गए फसल ऋण माफी के वादे का भी जिक्र नहीं है. उनके मुताबिक, कृषि क्षेत्र इस समय कई गंभीर समस्याओं से जूझ रहा है, लेकिन बजट में किसानों की तत्काल जरूरतों पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया गया.