पश्चिम एशिया संकट का असर चाय कारोबार पर, कूनूर नीलामी में नहीं बिकी 22 फीसदी पत्ती चाय

Coonoor tea auction: कूनूर चाय नीलामी दक्षिण भारत के चाय व्यापार का एक अहम केंद्र है. यहां से बड़ी मात्रा में चाय देश के अलग-अलग हिस्सों के साथ-साथ विदेशों में भी भेजी जाती है. लेकिन हाल के वैश्विक हालात ने इस कारोबार को कुछ समय के लिए प्रभावित कर दिया है.

Kisan India
नई दिल्ली | Published: 16 Mar, 2026 | 02:07 PM

Coonoor tea auction: दुनिया भर में बदलते हालात का असर अब भारतीय चाय उद्योग पर भी दिखाई देने लगा है. खासकर पश्चिम एशिया में चल रहे संकट ने चाय के निर्यात पर असर डाला है. इसके चलते तमिलनाडु के कूनूर में होने वाली चाय नीलामी में इस बार पत्ती वाली चाय की अच्छी-खासी मात्रा बिक नहीं पाई. निर्यातकों की मांग कम होने से बाजार थोड़ा सुस्त नजर आया और कई ग्रेड की चाय की कीमतों पर भी दबाव देखा गया.

कूनूर चाय नीलामी दक्षिण भारत के चाय व्यापार का एक अहम केंद्र है. यहां से बड़ी मात्रा में चाय देश के अलग-अलग हिस्सों के साथ-साथ विदेशों में भी भेजी जाती है. लेकिन हाल के वैश्विक हालात ने इस कारोबार को कुछ समय के लिए प्रभावित कर दिया है.

नीलामी में बड़ी मात्रा में चाय नहीं बिकी

बिजनेसलाइन की खबर के अनुसार,  चाय व्यापार से जुड़े लोगों का कहना है कि कूनूर में आयोजित सेल 11 की नीलामी में पत्ती चाय की बिक्री उम्मीद के मुताबिक नहीं हो पाई. नीलामी में पेश की गई पत्ती चाय का करीब 22 प्रतिशत हिस्सा बिना बिके ही रह गया. व्यापारियों के मुताबिक पश्चिम एशिया में चल रहे तनाव के कारण कई निर्यातकों ने फिलहाल खरीद टाल दी है. यही वजह है कि नीलामी में मांग कम दिखाई दी. जब निर्यातकों की भागीदारी कम होती है तो बाजार की रफ्तार भी धीमी हो जाती है. इस बार भी ऐसा ही देखने को मिला.

कितनी चाय नीलामी में पेश की गई

ग्लोबल टी ऑक्शनियर्स के अनुसार इस नीलामी में पत्ती चाय की कुल 8,20,499 किलोग्राम मात्रा पेश की गई थी. इसमें से करीब 75 प्रतिशत चाय की बिक्री हो सकी, जबकि बाकी चाय खरीदारों की कमी के कारण नहीं बिक पाई.

दूसरी ओर डस्ट ग्रेड चाय के मामले में स्थिति थोड़ी बेहतर रही. इस श्रेणी में कुल 2,73,671 किलोग्राम चाय नीलामी के लिए लाई गई थी, जिसमें से लगभग 84 प्रतिशत चाय बिक गई. घरेलू खरीदारों की मौजूदगी के कारण इस श्रेणी में बाजार को कुछ सहारा मिला.

पत्ती चाय की कीमतों में गिरावट

मांग कम होने का असर कीमतों पर भी पड़ा. बेहतर गुणवत्ता वाली और अच्छी खुशबू वाली पत्ती चाय की कीमतों में 3 से 4 रुपये प्रति किलो तक गिरावट देखी गई. हालांकि कुछ अच्छी क्वालिटी के लॉट को 2 से 3 रुपये प्रति किलो अधिक कीमत भी मिली, लेकिन कुल मिलाकर बाजार कमजोर ही रहा. मध्यम गुणवत्ता वाली पत्ती चाय की कीमतों में भी 1 से 2 रुपये  प्रति किलो तक की गिरावट दर्ज की गई. खासकर CTC पत्ती चाय के कारोबार में मांग सामान्य से कम रही.

डस्ट चाय के बाजार को मिला सहारा

जहां पत्ती चाय की मांग कमजोर रही, वहीं CTC डस्ट चाय के बाजार में घरेलू खरीदारों ने अच्छी दिलचस्पी दिखाई. इस श्रेणी में उच्च गुणवत्ता वाली और बेहतर स्वाद वाली चाय की कीमतें लगभग स्थिर रहीं और कुछ मामलों में 3 से 4 रुपये तक बढ़ोतरी भी देखी गई. हालांकि मध्यम गुणवत्ता वाली डस्ट चाय की कीमतों में 2 से 3 रुपये  प्रति किलो की गिरावट भी दर्ज की गई. वहीं बेहतर गुणवत्ता वाली ऑर्थोडॉक्स डस्ट चाय के दाम गुणवत्ता के आधार पर 4 से 5 रुपये तक बढ़े. दूसरी ओर सेकेंडरी और महीन डस्ट चाय की कीमतें लगभग स्थिर रहीं या कुछ मामलों में 1 से 2 रुपये तक कम हो गईं.

वैश्विक हालात का असर बाजार पर

चाय व्यापार से जुड़े विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक हालात का असर नीलामी बाजार पर तुरंत दिखाई देता है. पश्चिम एशिया भारत की चाय के लिए एक महत्वपूर्ण बाजार है. जब वहां मांग कम होती है या व्यापारिक गतिविधियां प्रभावित होती हैं, तो इसका असर भारत के चाय कारोबार पर भी पड़ता है. हालांकि घरेलू बाजार की मांग ने कुछ हद तक स्थिति संभालने में मदद की है. अगर आने वाले समय में अंतरराष्ट्रीय हालात सामान्य होते हैं तो चाय की मांग और कीमतों में फिर से सुधार देखने को मिल सकता है.

फिलहाल चाय उत्पादक, व्यापारी और निर्यातक सभी बाजार में स्थिरता लौटने का इंतजार कर रहे हैं, ताकि नीलामी में फिर से अच्छी बिक्री हो सके और कारोबार सामान्य गति से चल सके.

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