शीतलहर में आलू और पत्तेदार सब्जियों को बचाने के 3 आसान उपाय

शीतलहर और कोहरे के मौसम में आलू व पत्तेदार सब्जियों की फसल पर रोग का खतरा बढ़ जाता है. ठंड और नमी के कारण झुलसा व गलन तेजी से फैलते हैं. सही समय पर आसान उपाय अपनाकर किसान फसल को नुकसान से बचा सकते हैं और पैदावार सुरक्षित रख सकते हैं पूरे मौसम भर आसानी.

नोएडा | Published: 3 Jan, 2026 | 08:41 PM

Potato Farming : सर्दी के मौसम में जब शीतलहर और घना कोहरा लगातार बना रहता है, तब किसानों की चिंता बढ़ना लाज़मी है. खासकर आलू और पत्तेदार सब्जियों की खेती करने वाले किसानों के लिए यह समय बेहद संवेदनशील होता है. ठंड और नमी का मेल फसलों में झुलसा और गलन जैसे रोगों को तेजी से फैलने का मौका देता है. लेकिन राहत की बात यह है कि अगर समय रहते कुछ आसान और कारगर उपाय अपना लिए जाएं, तो फसल को बड़े नुकसान से बचाया जा सकता है. मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, शीतलहर के दौरान तीन खास कदम उठाकर किसान अपनी फसल सुरक्षित रख सकते हैं.

शीतलहर में क्यों बढ़ जाता है झुलसा और गलन रोग

मीडिया रिपोर्ट्स बताती हैं कि लगातार ठंड, कोहरा और खेत  में अधिक नमी रहने से फफूंद जनित रोग तेजी से पनपते हैं. आलू की फसल में अगेती झुलसा रोग का खतरा सबसे ज्यादा रहता है. इस रोग में पत्तियों पर पहले हल्के भूरे धब्बे दिखाई देते हैं, जो धीरे-धीरे बढ़कर पूरी पत्ती को खराब कर देते हैं. कुछ ही दिनों में पौधा कमजोर होकर गलने लगता है. यही स्थिति पालक, मेथी और अन्य पत्तेदार सब्जियों में भी देखने को मिलती है, जहां गलन रोग तेजी से फैलता है.

पहला उपाय: फफूंदनाशी दवाओं का समय पर छिड़काव

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, शीतलहर और कोहरे के मौसम में सुरक्षात्मक छिड़काव बेहद जरूरी हो जाता है. आलू और पत्तेदार सब्जियों  में फफूंदनाशी दवाओं का उपयोग करने से झुलसा और गलन रोग को रोका जा सकता है. किसान मैन्कोजेब या कार्बेन्डाजिम तत्व युक्त दवाओं का इस्तेमाल कर सकते हैं. 2 से 2.5 ग्राम दवा प्रति लीटर पानी में घोल बनाकर पहला छिड़काव करें. इसके बाद 15 दिन के अंतराल पर दूसरा छिड़काव करना फायदेमंद माना जाता है.

दूसरा उपाय: हल्की सिंचाई से रखें खेत में संतुलन

शीतलहर के दौरान खेत को बिल्कुल सूखा भी न छोड़ें और जरूरत से ज्यादा गीला भी न रखें. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, हल्की सिंचाई करते रहने से खेत में नमी का संतुलन बना रहता है और पाले का असर कम होता है. इससे पौधों की जड़ों  को ठंड से बचाव मिलता है और फसल की बढ़वार पर भी बुरा असर नहीं पड़ता.

तीसरा उपाय: धुआं करके पाले से करें बचाव

शीतलहर और पाले से बचाव के लिए एक पुराना लेकिन कारगर तरीका है-धुआं करना. रिपोर्ट्स के अनुसार, शाम के समय खेत के किनारों पर सूखी पत्तियां, भूसा या कचरा जलाकर हल्का धुआं किया जाए, तो खेत का तापमान कुछ हद तक बढ़ जाता है. इससे आलू और पत्तेदार सब्जियों को ठंड से बचाने में मदद मिलती है.

समय पर सावधानी ही है फसल की सुरक्षा

कुल मिलाकर, शीतलहर के दौरान थोड़ी-सी लापरवाही भी फसल को भारी नुकसान पहुंचा सकती है. लेकिन अगर किसान समय रहते दवाओं का छिड़काव  करें, हल्की सिंचाई रखें और पाले से बचाव के उपाय अपनाएं, तो आलू और पत्तेदार सब्जियों को झुलसा व गलन रोग से सुरक्षित रखा जा सकता है. यही समझदारी आगे चलकर अच्छी पैदावार और बेहतर कमाई की राह खोलती है.

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