उत्तर प्रदेश के कानपुर, फतेहपुर, कन्नौज, जालौन, औरैया समेत आसपास के जिलों के किसान पिछले महीनों बेमौसम बारिश की मार से उबर भी नहीं पाए थे कि ठंड, कोहरा और बूंदाबांदी फिर से उन पर कहर बरपाने लगे हैं. इस मौसम का फसलों खासकर हरी मटर और सरसों पर बहुत बुरा प्रभाव पड़ रहा है. किसानों का दुश्मन बना यह मौसम कीटों के लिए बड़ा मुफीद माना जाता है. जल्द ही मौसम साफ न हुआ तो इन फसलों की पैदावार निश्चित तौर पर घटेगी. क्योंकि, कई हिस्सों में इल्ली रोग और माहू कीट का प्रकोप बढ़ने लगा है.
मटर और आलू को नुकसान पहुंचने की आशंका
बिगड़ते मौसम ने किसानों की धुकधुकी तेज कर दी है. किसानों ने कहा कि देरी से बोई गई हरी मटर इस समय तैयार अवस्था में है लेकिन ठंड और नमी के कारण इल्ली रोग पत्तियों और फलियों को नुकसान पहुंचा रहा है. सरसों की फसल में भी कीट सक्रिय हो गए हैं. ठंड और नमी के कारण आलू की फसल में सड़न रोग फैलने का खतरा बढ़ गया है. वहीं, घने कोहरे के कारण सरसों की फसल में माहू कीट का प्रकोप बढ़ रहा है. मटर की फलियों में फफूंद लग रहीं हैं.
15 हेक्टेयर सरसों फसल में माहू का प्रकोप
जालौन के जिला कृषि अधिकारी आरपी शुक्ला ने कहा कि कोहरे का फसलों पर सीधा असर पड़ रहा है. सरसों की फसल में माहू कीट का प्रकोप है. लगभग 15 हेक्टेयर की सरसों की फसल में माहू कीट का प्रकोप देखा गया है. इससे बचाव के लिए किसानों को दवाओं के छिड़काव की सलाह दी गई है.
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सरसों के लिए मौसम भी बना विलेन
जिले में इस बार 27, 120 हेक्टेयर रकबा में सरसों बोई गई है. चकरनगर और बढ़पुरा ब्लॉक में अधिकांश किसान सरसों की खेती करते हैं क्योंकि सरसों में सिंचाई की कम आवश्यकता होती है और लागत भी कम होती है. इसकी तुलना में रबी की अन्य फसलें अधिक खर्चीली होती हैं. इस समय सरसों में फूल और फल आने का समय है. ऐसे में लगातार पड़ रहा कोहरा फसल की पैदावार पर विपरीत प्रभाव डालेगा. कृषि विशेषज्ञों के अनुसार सरसों पर तापमान की अपेक्षा कोहरे का ज्यादा प्रभाव पड़ता है.
मौसम साफ होने पर ही करें कीटनाशक का छिड़काव
मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसा मौसम कीटों के लिए अनुकूल माना जाता है. किसानों को सलाह दी है कि हरी मटर और सरसों की फसलों में इल्ली दिखाई देने पर तुरंत निगरानी बढ़ाएं. मौसम साफ होने पर अनुशंसित कीटनाशक का छिड़काव करें. अत्यधिक नमी के समय छिड़काव से बचें. पीली चिपचिपी ट्रैप और लाइप ट्रैप लगाकर कीटों की संख्या कम की जा सकती है. खेतों की मेड़ और आसपास की खरपतवार की सफाई भी जरूरी है.