Himachal Pradesh News: हिमाचल प्रदेश के पहाड़ी इलाकों में उगने वाली लाल और मीठी चेरी अब किसानों के लिए बेहतर कमाई का जरिया बन सकती है. अडाणी एग्री फ्रेश लिमिटेड अब राज्य से सीधे चेरी की खरीद करेगी, जिससे बागवानों को अपनी फसल बेचने में आसानी होगी और उन्हें बेहतर दाम मिल सकेंगे. सेब के कारोबार में अपनी मजबूत पहचान बनाने के बाद अब अदाणी ग्रुप स्टोन फ्रूट और सॉफ्ट फ्रूट कैटेगरी में भी कदम रख रहा है. इस पहल से हिमाचल के बागवानों को बड़ा फायदा मिलने की उम्मीद है, क्योंकि अब उन्हें बिचौलियों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा और उनकी उपज का सही मूल्य सीधे मिल सकेगा.
कंपनी का कहना है कि इस कदम से किसानों की फसलों की शेल्फ लाइफ बेहतर होगी, उन्हें ज्यादा और नए बाजार मिलेंगे और उनकी उपज का सही मूल्य भी मिल सकेगा. अडाणी एग्री फ्रेश लिमिटेड (AAFL) ने हिमाचल प्रदेश में अपने छह स्थानों पर मौजूद नियंत्रित वातावरण वाले कोल्ड स्टोरेज को अब चेरी के भंडारण और सप्लाई के लिए अपग्रेड कर दिया है. कंपनी पहले से ही हिमाचल प्रदेश में सेब की खरीद, स्टोरेज और बिक्री करने वाली शुरुआती संगठित कंपनियों में शामिल रही है.
करीब 1,500 करोड़ रुपये का भुगतान
अडाणी एग्री फ्रेश ने साल 2006 में Farm-Pik ब्रांड के तहत अपना काम शुरू किया था. तब से कंपनी ने 17,000 से ज्यादा किसानों से लगभग 3 लाख टन सेब की खरीद की है और इसके बदले किसानों को सीधे करीब 1,500 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया है. कंपनी ने हिमाचल प्रदेश में 25,000 टन क्षमता वाली कोल्ड स्टोरेज सुविधाएं विकसित की हैं, जिससे सेब लंबे समय तक सुरक्षित रहते हैं और किसानों को अपने उत्पाद को दूर के बाजारों तक पहुंचाने में आसानी होती है.
फलों की छंटाई और ग्रेडिंग होगी बेहतर
अडाणी एग्री फ्रेश लिमिटेड (AAFL) फलों की छंटाई और ग्रेडिंग की एक सरल और व्यवस्थित प्रक्रिया अपनाती है. इससे फलों की गुणवत्ता के आधार पर सही कीमत तय की जाती है. इस व्यवस्था का फायदा किसानों को यह होता है कि उन्हें पारंपरिक मंडियों पर ज्यादा निर्भर नहीं रहना पड़ता और उनकी उपज का बेहतर और उचित मूल्य सीधे मिल जाता है.
किसानों और उनके परिवारों के जीवन स्तर में सुधार होगा
कंपनी ने डिजिटल मंडी की सुविधा भी शुरू की है, जिसके जरिए किसान घर बैठे ही अपनी फसल बेच सकते हैं. अब उन्हें दूर-दराज के खरीद केंद्रों तक जाने की जरूरत नहीं पड़ती. यह सुविधा धीरे-धीरे और इलाकों में भी बढ़ाई जा रही है. फिलहाल AAFL हिमाचल प्रदेश में पैदा होने वाले सेब का करीब 4 फीसदी हिस्सा सीधे किसानों से खरीदती है और आगे आने वाले समय में ज्यादा किसानों से खरीद बढ़ाने की योजना है. इसके अलावा, AAFL अडाणी फाउंडेशन के जरिए बागवानी क्षेत्रों में स्वास्थ्य, शिक्षा और ग्रामीण विकास से जुड़े कामों में भी सहयोग करती है, जिससे किसानों और उनके परिवारों के जीवन स्तर में सुधार हो सके.