Dairy Cattle Health: दुधारू पशु अगर अचानक बेचैन रहने लगे, बिना वजह सिर झटकने लगे, बार-बार पेशाब करे या हल्की आवाज पर भी घबरा जाए, तो इसे हल्के में बिल्कुल न लें. यह हाइपोमैग्नीसिमिया यानी शरीर में मैग्निशियम की कमी का संकेत हो सकता है. पशु चिकित्सक कुंवर घनश्याम (KVK Noida) के अनुसार यह बीमारी खासकर ज्यादा दूध देने वाली गाय-भैंस में तेजी से दिखती है, क्योंकि दूध के साथ शरीर से खनिज तेजी से निकलते हैं. अगर समय पर इलाज न मिले तो पशु में मांसपेशियों का कंपन, दौड़ना, गिरना और अचानक मौत तक हो सकती है. यही वजह है कि पशुपालकों के लिए इसके लक्षण और बचाव जानना बेहद जरूरी है.
सिर झटकना, बार-बार पेशाब करना हैं शुरुआती संकेत
इस बीमारी के शुरुआती लक्षण अक्सर छोटे लगते हैं, लेकिन यही सबसे अहम चेतावनी होते हैं.
पशु बिना कारण बार-बार सिर झटकता है, कराहने जैसी आवाज निकालता है, ज्यादा पेशाब करता है और बेचैन रहता है. कई बार वह सीधा चलता है, पैर मोड़ने में दिक्कत होती है और हल्की आवाज या छूने पर भी ज्यादा चौंक जाता है. गंभीर स्थिति में पशु अचानक इधर-उधर दौड़ सकता है, पैरों को जमीन पर पटक सकता है और शरीर में कंपन शुरू हो सकता है. कई मामलों में पशु गिरकर झटके खाने लगता है. ऐसी हालत में देर करना खतरनाक हो सकता है.
यह बीमारी कब और क्यों बढ़ती है
पशु चिकित्सक कुंवर घनश्याम के अनुसार यह रोग वसंत और शुरुआती बरसात में ज्यादा देखने को मिलता है. इस समय पशु ज्यादा हरा और नरम चारा खाते हैं, जिसमें कई बार मैग्निशियम कम होता है. तेजी से बढ़ी घास में पोटाश ज्यादा होने से भी शरीर में मैग्निशियम का अवशोषण कम हो जाता है. ज्यादा दूध देने वाले पशु, बूढ़ी गायें और लगातार हरे चारे पर रहने वाले पशु इसके ज्यादा शिकार होते हैं. अगर पशु को खनिज मिश्रण नियमित नहीं दिया जा रहा है, तो खतरा और बढ़ जाता है. यही कारण है कि मौसम बदलते ही दुधारू पशुओं की खुराक पर खास ध्यान देना जरूरी है.
बचाव का आसान तरीका: रोज दें मैग्निशियम सपोर्ट
इस बीमारी से बचने का सबसे आसान तरीका है रोजाना मैग्निशियम की पूर्ति. जोखिम वाले समय में दुधारू पशुओं को लगभग 50-60 ग्राम मैग्निशियम ऑक्साइड चारे या दाने में मिलाकर देना बहुत फायदेमंद माना जाता है. इसे गुड़, दाना या मिनरल मिक्सचर के साथ मिलाकर देने से पशु आसानी से खा लेता है. इसके साथ सूखा चारा, भूसा और संतुलित मिनरल मिक्सचर भी जरूर दें. सिर्फ हरे चारे पर पशु को लंबे समय तक न रखें. अगर पशु में लक्षण दिखें, तो तुरंत नजदीकी पशु चिकित्सक से संपर्क करें. कई बार 24-48 घंटे बाद दोबारा इलाज की जरूरत पड़ सकती है. समय पर इलाज से पशु पूरी तरह ठीक हो जाता है.
सावधानी से बचेगा दूध और मुनाफा
दुधारू पशु की सेहत सीधे दूध उत्पादन और पशुपालक की कमाई से जुड़ी होती है. मैग्निशियम की कमी होने पर दूध तेजी से घट सकता है और पशु कमजोर पड़ सकता है. ऐसे में पशुपालकों को चाहिए कि मौसम बदलते समय हरा चारा + सूखा चारा + मिनरल मिक्सचर का सही संतुलन रखें. पशु चिकित्सक कुंवर घनश्याम की सलाह है कि अगर पशु ज्यादा दूध देता है, तो उसकी खुराक में मिनरल सपोर्ट कभी न छोड़ें. छोटी सी सावधानी पशु की जान बचा सकती है और दूध उत्पादन को भी स्थिर रख सकती है. सीधे शब्दों में कहें तो समय पर पहचान, रोज खनिज सपोर्ट और तुरंत इलाज ही इस बीमारी से बचने का सबसे मजबूत तरीका है.