आम के पेड़ों में बौर आने के बाद करें ये आसान इलाज, बीमारी रुकेगी और फलों की पैदावार बढ़ेगी
आम के पेड़ों पर बौर आने के बाद सही देखभाल बहुत जरूरी होती है. इस समय अगर कीट और रोग से बचाव किया जाए तो ज्यादा फल लगने की संभावना बढ़ जाती है. विशेषज्ञों के अनुसार समय पर दवा का छिड़काव, तने की सफाई और सही पोषण देने से आम की बागवानी में बेहतर उत्पादन मिल सकता है.
Mango Blossom: देश के कई हिस्सों में आम का मौसम धीरे-धीरे शुरू हो चुका है और पेड़ों पर बौर यानी मंजरियां भी दिखाई देने लगी हैं. यह समय बागवानों के लिए बहुत महत्वपूर्ण होता है, क्योंकि इसी दौर में सही देखभाल करने से पेड़ पर ज्यादा फल लग सकते हैं. लेकिन कई बार किसानों को यह परेशानी होती है कि पेड़ों पर आए बौर अचानक गिरने लगते हैं और फल बनने से पहले ही नुकसान हो जाता है. कृषि वैज्ञानिक डॉ. रजनीश मिश्रा (संयुक्त निदेशक, NHRDF) के अनुसार सही उपचार और पौधों की देखभाल बहुत जरूरी हो जाती है. विशेषज्ञों का कहना है कि अगर किसान अभी कुछ आसान उपाय अपनाएं, तो पेड़ों पर ज्यादा फल लगने की संभावना बढ़ जाती है.
बौर के समय पेड़ों की सुरक्षा सबसे जरूरी
आम के पेड़ों में बौर आने के बाद शुरुआती 15 से 20 दिन सबसे अहम माने जाते हैं. इसी समय अगर सही देखभाल की जाए तो मंजरियों से ज्यादा फल बनने की संभावना रहती है. कृषि वैज्ञानिक डॉ. रजनीश मिश्रा (संयुक्त निदेशक, NHRDF) के अनुसार इस समय पेड़ों में कई तरह की बीमारियां और कीट लगने का खतरा रहता है. अगर किसान समय पर इनसे बचाव नहीं करते तो बौर गिरने लगते हैं और फल बनने की प्रक्रिया प्रभावित हो जाती है. इसलिए बौर आने के तुरंत बाद पौधों की सुरक्षा के लिए जरूरी दवाओं का छिड़काव करना चाहिए.
समय पर उपचार और पोषण से बढ़ेगा आम का उत्पादन.
फफूंद और कीटों से बचाने के लिए करें छिड़काव
विशेषज्ञों का कहना है कि इस समय आम के पेड़ों में फफूंदजनित रोग और कीटों का हमला ज्यादा देखने को मिलता है. खासकर खर्रा रोग और थ्रिप्स कीट बौर को काफी नुकसान पहुंचाते हैं. इनसे बचाव के लिए किसान घुलनशील गंधक लगभग 2 ग्राम प्रति लीटर पानी या अन्य उपयुक्त दवाओं का छिड़काव कर सकते हैं. इसके अलावा कार्बेन्डाजिम लगभग 2 ग्राम प्रति लीटर पानी के हिसाब से मिलाकर छिड़काव करना भी फायदेमंद माना जाता है. पहला छिड़काव तुरंत करना चाहिए और दूसरा छिड़काव करीब 10 दिन बाद दोहराना चाहिए. इससे मंजरियों को बीमारी से बचाया जा सकता है और फल बनने की प्रक्रिया बेहतर रहती है.
कीटों को रोकने के लिए अपनाएं आसान घरेलू उपाय
आम के पेड़ों को नुकसान पहुंचाने वाले कीटों में भूंगा, चींटियां और गुजिया कीट प्रमुख होते हैं. ये कीट पेड़ों पर चढ़कर फूलों और फलों को नुकसान पहुंचा सकते हैं. इनसे बचाव के लिए किसान पेड़ों के तनों की अच्छी तरह सफाई कर सकते हैं. तने को नीचे से ऊपर तक पानी से धो देना चाहिए, जिससे कई कीट हट जाते हैं. इसके अलावा तने के ऊपर एक जगह पॉलीथिन की पट्टी बांधने से नीचे से आने वाले कीट ऊपर नहीं चढ़ पाते. कुछ किसान तने के चारों तरफ लगभग दो फीट ऊंचाई तक ग्रीस या मोबिल ऑयल का लेप भी लगा देते हैं. इससे चींटियां और अन्य कीट पेड़ पर चढ़ने से रुक जाते हैं. यह तरीका गुजिया कीट को भी काफी हद तक नियंत्रित करने में मदद करता है.
आम के पेड़ों पर ज्यादा फल.
क्यों नहीं आते कुछ पेड़ों पर बौर
कई बार किसानों को लगता है कि उनके पेड़ों पर बौर क्यों नहीं आ रहे. इसका एक कारण आम के पेड़ों की प्राकृतिक विशेषता भी होती है. विशेषज्ञ के अनुसार, आम के पेड़ों में अल्टरनेट बियरिंग की प्रक्रिया होती है. यानी कई बार एक साल फल ज्यादा आता है और अगले साल कम या बिल्कुल नहीं आता. अगर किसी पेड़ पर इस साल बौर नहीं आया है, तो संभव है कि पिछले साल उस पर ज्यादा फल आए हों. लेकिन अगर किसी पेड़ पर लगातार दो या तीन साल से बौर नहीं आ रहा है, तो यह पौधे में पोषण की कमी का संकेत भी हो सकता है.
पेड़ों को सही पोषण देना भी जरूरी
आम के पेड़ों की अच्छी बढ़वार और फल उत्पादन के लिए पोषण का भी बहुत बड़ा योगदान होता है. अगर पौधों को समय-समय पर पोषक तत्व नहीं मिलते तो उनकी ताकत कम हो जाती है और बौर भी कम आते हैं. विशेषज्ञों के अनुसार पौधों को गोबर की खाद, नीम की खली और फॉस्फेट जैसी चीजें देना फायदेमंद होता है. इसके साथ ही कॉपर, जिंक और मैग्नीशियम जैसे माइक्रोन्यूट्रिएंट्स का मिश्रण भी मिट्टी में मिलाया जा सकता है. पोषण देने का सबसे अच्छा समय आमतौर पर अक्टूबर माना जाता है. इसके अलावा जरूरत पड़ने पर फरवरी-मार्च या बारिश से पहले भी पौधों को पोषक तत्व दिए जा सकते हैं. इससे पेड़ मजबूत रहते हैं और भविष्य में ज्यादा फल देने की क्षमता बढ़ जाती है.