हिमाचल प्रदेश के शिमला के सेब बागानों में अल्टरनेरिया फंगल बीमारी तेजी से फैल रही है. इस बीमारी की वजह से पेड़ों की पत्तियां समय से पहले झड़ने लगी हैं, जिससे सेब की फसल को नुकसान हो रहा है. कृषि विज्ञान केंद्र (KVK) शिमला की प्रमुख उषा शर्मा ने कहा है कि कम ऊंचाई वाले इलाकों में अधिक तापमान और नमी के कारण यह बीमारी तेजी से फैल रही है.
वहीं, संयुक्त किसान मंच के संयोजक हरीश चौहान ने द ट्रिब्यून से कहा कि पिछले कुछ वर्षों से बार-बार बीमारी फैलने से सेब उत्पादक किसान परेशान हैं. उन्होंने कहा कि 1980 के दशक में वैज्ञानिकों ने सीमित संसाधनों और कम फफूंदनाशकों के बावजूद एप्पल स्कैब जैसी गंभीर बीमारी पर नियंत्रण पा लिया था, लेकिन अब अल्टरनेरिया पर काबू पाना लगातार मुश्किल होता जा रहा है.
किसानों को ही जिम्मेदार ठहराया गया
पिछले कुछ वर्षों में अल्टरनेरिया बीमारी के फैलने के लिए किसानों को ही जिम्मेदार ठहराया जाता रहा है. कहा गया कि कई किसान नौणी बागवानी विश्वविद्यालय की ओर से सुझाए गए समय पर फफूंदनाशक दवाओं का छिड़काव नहीं करते. इस साल फरवरी में विश्वविद्यालय ने वैज्ञानिकों की टीमें सेब उत्पादक इलाकों में भेजी थीं और किसानों को बीमारी से बचाव के उपाय भी बताए थे. इसके बावजूद अब फिर से अल्टरनेरिया का प्रकोप बढ़ गया है, जिससे किसान चिंतित हैं.
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बीमारी पर पूरी तरह नियंत्रण नहीं हो पा रहा
वहीं, कई सेब उत्पादकों ने फफूंदनाशक दवाओं की प्रभावशीलता पर भी सवाल उठाने शुरू कर दिए हैं. उनका कहना है कि दवाओं के इस्तेमाल के बावजूद बीमारी पर पूरी तरह नियंत्रण नहीं हो पा रहा है. कई सेब उत्पादकों ने अल्टरनेरिया बीमारी के फैलने के तरीके पर भी सवाल उठाए हैं. रत्नारी के सेब किसान आशुतोष चौहान ने कहा कि यह बीमारी मुख्य रूप से डिलीशियस किस्म के सेब को ही क्यों प्रभावित कर रही है, जबकि गाला और ग्रैनी स्मिथ जैसी किस्मों में इसका असर बहुत कम दिखाई दे रहा है. किसानों का मानना है कि यह बीमारी किसी नई स्ट्रेन (प्रजाति) या नए वैरिएंट की वजह से भी हो सकती है. उन्होंने वैज्ञानिकों से इस संभावना की गहराई से जांच करने और विस्तृत शोध करने की मांग की है.
सेब का उत्पादन 37 फीसदी से ज्यादा घट सकता है
बता दें कि हमाचल प्रदेश के सेब किसान दोहरी मार झेल रहे हैं. अल्टरनेरिया फंगल से पहले मौसम के चलते भारी नुकसान उठान पड़ा है. बीते हफ्तों में भारी बारिश, भूस्खलन और ओलावृष्टि ने सेब की खेती को बड़ा नुकसान पहुंचाया है. खराब मौसम की वजह से कई बागानों में सेब पूरी तरह पकने से पहले ही पेड़ों से गिर गए, जिससे किसानों को भारी आर्थिक नुकसान हो रहा है. अनुमान है कि इस बार मॉनसून के असर से सेब का उत्पादन 37 फीसदी से ज्यादा घट सकता है. इसका असर राज्य के 4.5 लाख से अधिक सेब और स्टोन फ्रूट उत्पादक किसानों पर पड़ेगा. खासकर जिन किसानों ने बागानों के लिए कर्ज लिया है, उनके लिए आर्थिक संकट और गहरा सकता है.