सिर्फ 70 दिन में तैयार होगी चुकंदर की फसल, मार्च में करें खेती और पाएं 300 क्विंटल तक पैदावार
चुकंदर की खेती किसानों के लिए कम समय में अच्छी कमाई का विकल्प बन सकती है. यह फसल लगभग 60 से 75 दिनों में तैयार हो जाती है और बाजार में इसकी मांग भी अच्छी रहती है. सही मिट्टी, उन्नत किस्मों और उचित देखभाल के साथ किसान अच्छी पैदावार हासिल कर सकते हैं.
Beetroot Farming: खेती में अगर ऐसी फसल मिल जाए जो कम समय में तैयार हो जाए और बाजार में उसकी मांग भी अच्छी हो, तो किसानों की कमाई तेजी से बढ़ सकती है. चुकंदर ऐसी ही एक फसल है, जो कम समय में तैयार होकर अच्छा मुनाफा दे सकती है. NHRDF के कृषि वैज्ञानिक डॉ. रजनीश मिश्रा के अनुसार मार्च का महीना चुकंदर की खेती शुरू करने के लिए अच्छा समय माना जाता है. सही मिट्टी, सही किस्म और थोड़ी सी देखभाल के साथ किसान कम समय में अच्छी पैदावार लेकर अपनी आय बढ़ा सकते हैं.
मार्च में शुरू करें चुकंदर की खेती
NHRDF के कृषि वैज्ञानिक डॉ. रजनीश मिश्रा के अनुसार, मार्च का महीना चुकंदर की खेती शुरू करने के लिए काफी अच्छा माना जाता है. इस समय मौसम ऐसा होता है जिसमें बीज जल्दी अंकुरित हो जाते हैं और पौधों की बढ़वार भी अच्छी होती है. चुकंदर की खास बात यह है कि इसकी मांग पूरे साल बनी रहती है. सलाद, सब्जी और जूस में इसका इस्तेमाल खूब किया जाता है. बाजार में इसकी खपत अच्छी होने के कारण किसानों को इसकी बिक्री में ज्यादा परेशानी नहीं होती. यही वजह है कि आजकल कई किसान चुकंदर की खेती की तरफ तेजी से रुख कर रहे हैं.
कम समय में चुकंदर खेती से बढ़ सकती किसानों की आय.
इस मिट्टी में होती है बेहतर पैदावार
कृषि वैज्ञानिकों के अनुसार चुकंदर की खेती के लिए बलुई दोमट मिट्टी सबसे उपयुक्त मानी जाती है. इस मिट्टी में पौधों की जड़ें अच्छी तरह बढ़ती हैं और फसल की गुणवत्ता भी बेहतर होती है. हालांकि इसकी खेती कई तरह की मिट्टी में की जा सकती है, लेकिन खेत ऐसा होना चाहिए जहां पानी जमा न होता हो. अगर खेत में जलभराव हो जाए तो चुकंदर की जड़ें सड़ सकती हैं, जिससे उत्पादन कम हो सकता है. बुवाई से पहले बीजों का उपचार करना और खेत में सही नमी बनाए रखना भी बहुत जरूरी होता है. इससे पौधे स्वस्थ रहते हैं और फसल की बढ़वार अच्छी होती है.
60 से 75 दिनों में तैयार हो जाती है फसल
चुकंदर की फसल की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह बहुत कम समय में तैयार हो जाती है. आमतौर पर इसकी फसल 60 से 75 दिनों के अंदर तैयार हो जाती है. इतने कम समय में फसल तैयार होने की वजह से किसान एक साल में कई बार इसकी खेती कर सकते हैं. इससे खेत का बेहतर उपयोग होता है और किसानों को जल्दी आमदनी भी मिल जाती है. जब फसल पूरी तरह तैयार हो जाती है, तो किसान इसकी खुदाई कर सीधे बाजार में बेच सकते हैं. ताजी सब्जी होने की वजह से इसकी मांग बाजार में बनी रहती है.
चुकंदर की खेती से किसानों को अच्छा मुनाफा
उन्नत किस्मों से बढ़ सकती है पैदावार
विशेषज्ञों के अनुसार अगर किसान चुकंदर की उन्नत किस्मों का चुनाव करते हैं तो उन्हें ज्यादा उत्पादन मिल सकता है. अच्छी किस्मों से फसल की गुणवत्ता भी बेहतर होती है और बाजार में अच्छे दाम मिलते हैं. उन्नत किस्मों के सही इस्तेमाल और अच्छी देखभाल के साथ किसान करीब 300 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक उत्पादन हासिल कर सकते हैं. इसके लिए समय पर सिंचाई, निराई-गुड़ाई और पौधों की देखभाल करना भी जरूरी होता है. सही तकनीक अपनाने से उत्पादन और मुनाफा दोनों बढ़ सकते हैं.
रोगों से बचाव भी है जरूरी
हर फसल की तरह चुकंदर में भी कुछ रोग देखने को मिलते हैं. ज्यादा नमी और जलभराव होने पर जड़ सड़न या पत्तियों पर धब्बे जैसी समस्याएं हो सकती हैं. इससे बचाव के लिए खेत में पानी की सही निकासी की व्यवस्था रखना जरूरी है. इसके साथ ही फसल चक्र अपनाना और जैविक उपायों का इस्तेमाल करना भी फायदेमंद माना जाता है.
अगर किसान समय-समय पर फसल की निगरानी करते रहें और शुरुआती लक्षण दिखते ही उपचार करें, तो नुकसान से बचा जा सकता है. कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि बढ़ती मांग और कम समय में तैयार होने वाली फसल होने के कारण चुकंदर की खेती किसानों के लिए कमाई का अच्छा विकल्प बन सकती है. सही तकनीक अपनाकर किसान कम लागत में अच्छी पैदावार लेकर अपनी आय बढ़ा सकते हैं.