किसानों के लिए वरदान अरंडी के पत्ते, कम खर्च में मिट्टी बने उपजाऊ और कीटों से मिले पूरी सुरक्षा

Benefits of castor leaves: अक्सर किसान अरंडी को सिर्फ तेल के लिए जानते हैं, लेकिन इसके पत्ते खेती के लिए बेहद उपयोगी साबित हो सकते हैं. अरंडी के पत्ते मिट्टी की उर्वरता बढ़ाने, नमी बनाए रखने और कीटों को दूर रखने में मदद करते हैं.

नई दिल्ली | Updated On: 25 Feb, 2026 | 10:54 AM

Benefits of castor leaves: आज के समय में खेती की लागत लगातार बढ़ रही है. रासायनिक खाद और कीटनाशकों के दाम बढ़ने से किसानों पर बोझ बढ़ता जा रहा है. ऐसे में अगर खेत में ही कोई ऐसा प्राकृतिक साधन मिल जाए, जो मिट्टी को भी ताकत दे और कीटों से भी बचाए, तो यह किसी वरदान से कम नहीं है. अरंडी का पौधा ऐसा ही एक सस्ता और असरदार विकल्प है.

अक्सर किसान अरंडी को सिर्फ तेल के लिए जानते हैं, लेकिन इसके पत्ते खेती के लिए बेहद उपयोगी साबित हो सकते हैं. अरंडी के पत्ते मिट्टी की उर्वरता बढ़ाने, नमी बनाए रखने और कीटों को दूर रखने में मदद करते हैं.

मिट्टी को ताकत देने वाला प्राकृतिक खाद

जब अरंडी के पत्ते खेत में गलते हैं, तो वे मिट्टी में नाइट्रोजन, फॉस्फोरस और पोटाश जैसे जरूरी पोषक तत्व छोड़ते हैं. ये तत्व पौधों की बढ़वार के लिए बहुत जरूरी होते हैं.

अगर किसान अरंडी के पत्तों को सुखाकर या सीधे खेत में दबा दें, तो कुछ ही समय में वे जैविक खाद में बदल जाते हैं. इससे मिट्टी भुरभुरी बनती है और उसकी उपजाऊ शक्ति बढ़ती है. लगातार इस्तेमाल से जमीन की सेहत बेहतर होती है और रासायनिक खाद की जरूरत कम हो सकती है.

नमी बचाने और खरपतवार रोकने में मददगार

अरंडी के पत्तों को पौधों के चारों ओर बिछाने से मिट्टी में नमी लंबे समय तक बनी रहती है. इसे मल्चिंग की तरह इस्तेमाल किया जा सकता है. इससे पानी की बचत होती है और बार-बार सिंचाई की जरूरत कम पड़ती है. इसके अलावा पत्तों की परत जमीन पर रहने से खरपतवार कम उगते हैं. इससे मजदूरी का खर्च भी घटता है और फसल को पोषण सही तरीके से मिल पाता है.

कीटों का प्राकृतिक दुश्मन

अरंडी के पत्तों में कुछ ऐसे प्राकृतिक तत्व पाए जाते हैं, जो कीटों को दूर रखने में मदद करते हैं. इनकी गंध और रस कई हानिकारक कीटों, घोंघों और चूहों को पास नहीं आने देते.

पारंपरिक खेती में किसान अरंडी के पत्तों का घोल बनाकर फसल पर छिड़काव भी करते हैं. यह घोल प्राकृतिक कीटनाशक की तरह काम करता है और फसल को नुकसान पहुंचाने वाले कीड़ों को नियंत्रित करता है.

पौधों की जड़ों को मजबूती

अरंडी के पत्तों के विघटन से मिट्टी में मैग्नीशियम, कैल्शियम और आयरन जैसे सूक्ष्म तत्व भी मिलते हैं. ये तत्व पौधों की जड़ों को मजबूत बनाते हैं और पत्तियों को हरा-भरा रखते हैं. अगर पत्तों का हल्का घोल बनाकर पौधों की जड़ों के पास डाला जाए, तो जड़ों की वृद्धि बेहतर होती है और पौधे ज्यादा स्वस्थ दिखते हैं.

सूक्ष्मजीवों की संख्या बढ़ती है

जब खेत में अरंडी के पत्ते सड़ते हैं, तो मिट्टी में जैविक पदार्थ बढ़ते हैं. इससे लाभकारी सूक्ष्मजीवों की संख्या में इजाफा होता है. ये सूक्ष्मजीव मिट्टी को जीवंत बनाते हैं और पौधों को पोषण उपलब्ध कराने में मदद करते हैं. जैविक खेती करने वाले किसान इसे मिट्टी सुधारक के रूप में भी इस्तेमाल करते हैं.

असर बढ़ाने के आसान तरीके

अगर अरंडी के पत्तों को नीम की खली, गोबर की खाद या वर्मी कम्पोस्ट के साथ मिलाकर खेत में डाला जाए, तो इसका असर और ज्यादा बढ़ जाता है. यह मिश्रण मिट्टी को ज्यादा पोषण देता है और कीट नियंत्रण में भी कारगर साबित होता है. बीज बोने से पहले अरंडी के पत्तों के रस से बीजों को हल्का उपचार देने से अंकुरण बेहतर होता है और फफूंद का खतरा कम होता है.

कम लागत में ज्यादा फायदा

अरंडी के पत्ते आसानी से उपलब्ध होते हैं और इन पर अतिरिक्त खर्च नहीं आता. ऐसे में यह छोटे और सीमांत किसानों के लिए एक सस्ता और टिकाऊ विकल्प है. अगर किसान नियमित रूप से इसका इस्तेमाल करें, तो मिट्टी की सेहत सुधरेगी, फसल की गुणवत्ता बढ़ेगी और रासायनिक दवाओं पर निर्भरता कम होगी.

Published: 25 Feb, 2026 | 10:52 AM

Topics: