छत्तीसगढ़ में खाद की कोई कमी नहीं, 7.48 लाख टन स्टॉक तैयार, जमाखोरी पर होगी सख्त निगरानी

राज्य सरकार ने यह भी साफ कर दिया है कि उर्वरकों की जमाखोरी या कालाबाजारी किसी भी हाल में बर्दाश्त नहीं की जाएगी. इसके लिए जिला स्तर पर उड़नदस्ता दल और निगरानी समितियां सक्रिय कर दी गई हैं. अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि अगर कहीं भी गड़बड़ी पाई जाती है, तो तुरंत सख्त कार्रवाई की जाए.

Kisan India
नई दिल्ली | Published: 26 Apr, 2026 | 10:27 AM

छत्तीसगढ़ में आगामी खरीफ सीजन को देखते हुए राज्य सरकार ने साफ किया है कि प्रदेश में खाद की कोई कमी नहीं है और किसानों को चिंता करने की जरूरत नहीं है. पश्चिम एशिया में चल रहे तनाव खासतौर पर अमेरिका, इजराइल और ईरान के बीच के कारण अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उर्वरकों की आपूर्ति प्रभावित होने की आशंका जरूर जताई जा रही है, लेकिन राज्य सरकार ने समय रहते तैयारी कर ली है ताकि किसानों को किसी तरह की परेशानी न हो.

खरीफ सीजन से पहले सरकार की तैयारी

छत्तीसगढ़ सरकार ने खरीफ 2026 सीजन के लिए पहले से ही उर्वरकों की पर्याप्त व्यवस्था सुनिश्चित कर ली है. मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के प्रयासों से केंद्र सरकार ने राज्य के लिए कुल 15.55 लाख मीट्रिक टन उर्वरक आवंटित किया है.

यूरिया: 7.25 लाख मीट्रिक टन

डीएपी: 3 लाख मीट्रिक टन

एमओपी: 80 हजार मीट्रिक टन

एनपीके: 2.5 लाख मीट्रिक टन

एसएसपी: 2 लाख मीट्रिक टन

यह आवंटन इस बात का संकेत है कि सरकार किसानों की जरूरतों को लेकर गंभीर है और समय पर आपूर्ति सुनिश्चित करना चाहती है.

गोदामों में पहले से ही बड़ा स्टॉक

राज्य में फिलहाल 7.48 लाख मीट्रिक टन खाद का स्टॉक उपलब्ध है, जो खरीफ सीजन की शुरुआत के लिए पर्याप्त माना जा रहा है. विभागीय आंकड़ों के अनुसार 30 मार्च तक स्टॉक की स्थिति इस प्रकार है:

यूरिया: 2,43,717 मीट्रिक टन

डीएपी: 1,05,631 मीट्रिक टन

एनपीके: 1,69,109 मीट्रिक टन

एमओपी: 50,431 मीट्रिक टन

एसएसपी: 1,78,657 मीट्रिक टन

कृषि मंत्री ने भरोसा दिलाया है कि किसानों को पारदर्शी तरीके से खाद उपलब्ध कराया जाएगा और किसी को भी कमी का सामना नहीं करना पड़ेगा.

वैश्विक संकट के बीच वैकल्पिक विकल्पों पर जोर

सरकार ने केवल रासायनिक उर्वरकों पर निर्भर रहने के बजाय वैकल्पिक उपायों पर भी ध्यान दिया है. पश्चिम एशिया में जारी तनाव को देखते हुए किसानों को हरी खाद, जैविक खाद और नैनो उर्वरकों के उपयोग के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है. इससे न केवल उर्वरकों की संभावित कमी का असर कम होगा, बल्कि मिट्टी की गुणवत्ता भी बेहतर होगी. विशेषज्ञों का मानना है कि अगर किसान इन विकल्पों को अपनाते हैं, तो लंबे समय में उनकी खेती अधिक टिकाऊ और लाभकारी बन सकती है.

जमाखोरी और कालाबाजारी पर सख्ती

राज्य सरकार ने यह भी साफ कर दिया है कि उर्वरकों की जमाखोरी या कालाबाजारी किसी भी हाल में बर्दाश्त नहीं की जाएगी. इसके लिए जिला स्तर पर उड़नदस्ता दल और निगरानी समितियां सक्रिय कर दी गई हैं. अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि अगर कहीं भी गड़बड़ी पाई जाती है, तो तुरंत सख्त कार्रवाई की जाए. इस कदम का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि खाद सही समय पर और सही कीमत पर किसानों तक पहुंचे.

डिजिटल व्यवस्था से पारदर्शिता बढ़ेगी

कृषि उत्पादन आयुक्त शहला निगार ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि किसानों का पंजीयन तेजी से पूरा किया जाए. इसके लिए पीएम किसान पोर्टल से एग्रीस्टेक पोर्टल पर डेटा अपडेट किया जा रहा है.

इसके साथ ही बीज और उर्वरक वितरण के लिए नई ई-वितरण प्रणाली लागू की जा रही है. इस व्यवस्था से पारदर्शिता बढ़ेगी और किसानों को समय पर सुविधाएं मिल सकेंगी.

खेती को मजबूत बनाने के लिए नई पहल

सरकार केवल खाद की उपलब्धता तक सीमित नहीं है, बल्कि खेती को और मजबूत बनाने के लिए कई नई पहल भी कर रही है. दलहन और तिलहन फसलों की खरीद को प्राथमिकता दी जा रही है. इसके अलावा सुगंधित धान की खेती को बढ़ावा देने और उद्यानिकी क्षेत्र में ऑयल पाम, मखाना और मसाला फसलों के विस्तार पर भी जोर दिया जा रहा है. इन कदमों से किसानों की आय बढ़ाने और कृषि को विविध बनाने की दिशा में काम किया जा रहा है.

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