धान उगाने का पुराना तरीका छोड़ DSR विधि अपना रहे किसान, कम खर्च में बढ़ रहा मुनाफा

Direct Seeded Rice Farming: धान की सीधी बुवाई तकनीक किसानों के बीच तेजी से लोकप्रिय हो रही है, क्योंकि इससे पानी, समय और मजदूरी तीनों की बचत होती है. कृषि विभाग के अनुसार, के अनुसार सही खेत का चयन, संतुलित खाद, समय पर खरपतवार नियंत्रण और उचित नमी बनाए रखने से किसान कम लागत में अच्छी पैदावार हासिल कर सकते हैं.

Isha Gupta
नोएडा | Published: 23 May, 2026 | 12:33 PM

Direct Seeding of Rice: खरीफ सीजन शुरू होते ही किसानों की तैयारियां भी तेज हो जाती हैं. धान की खेती करने वाले किसान अब पारंपरिक रोपाई के बजाय सीधी बुवाई (Direct Seeding of Rice) की तकनीक को तेजी से अपना रहे हैं. इसकी सबसे बड़ी वजह यह है कि इसमें पानी, मजदूरी और समय तीनों की बचत होती है. साथ ही कम लागत में अच्छी पैदावार भी मिल सकती है.

बिहार कृषि विभाग के अनुसार, अनुसार अगर किसान सही तरीके से धान की सीधी बुवाई करें, तो उत्पादन बढ़ाने के साथ-साथ खेती की लागत को भी काफी कम किया जा सकता है. हालांकि इसके लिए कुछ जरूरी बातों का ध्यान रखना बेहद जरूरी है.

सही खेत का चुनाव सबसे जरूरी

धान की सीधी बुवाई के लिए ऐसे खेत का चुनाव करना चाहिए, जहां बारिश का पानी आसानी से ठहर सके और खेत बराबर यानी समतल हो. अगर खेत ऊंचा-नीचा होगा, तो कहीं ज्यादा और कहीं कम पानी जमा होगा, जिससे फसल को नुकसान हो सकता है. विभाग के अनुसार, जरूरत पड़ने पर खेत को लेजर लेवलर मशीन से बराबर कर लेना चाहिए. इससे खेत में पानी हर जगह एक समान फैलता है और धान के बीज अच्छी तरह अंकुरित होते हैं, जिससे फसल बेहतर होती है.

बुवाई से पहले खरपतवार नियंत्रण जरूरी

सीधी बुवाई में खरपतवार सबसे बड़ी समस्या बन सकते हैं. इसलिए बुवाई से एक-दो दिन पहले खेत में खरपतवार नियंत्रण करना जरूरी माना जाता है. विभाग के अनुसार, अगर खेत में ज्यादा खरपतवार हों, तो ग्लूफोसिनेट अमोनियम जैसे खरपतवारनाशी का छिड़काव किया जा सकता है. इससे शुरुआती अवस्था में खरपतवार की समस्या कम होती है और फसल को बेहतर बढ़वार मिलती है.

धान की सीधी बुवाई में बीज की मात्रा का सही होना बहुत जरूरी है. प्रति एकड़ लगभग 8 से 12 किलो बीज पर्याप्त माना जाता है. अगर बीज मोटा हो तो मात्रा थोड़ी ज्यादा रखनी चाहिए, जबकि महीन बीज के लिए कम मात्रा पर्याप्त होती है. इसके अलावा बीज को 1 से 2 सेंटीमीटर की गहराई पर ही बोना चाहिए.

जीरो टिलेज मशीन से आसान होगी बुवाई

आजकल किसान धान की खेती में जीरो टिलेज मशीन का इस्तेमाल तेजी से करने लगे हैं. इस तकनीक से खेत की ज्यादा जुताई नहीं करनी पड़ती, जिससे समय और लागत दोनों की बचत होती है. धान की सीधी बुवाई करते समय बीज के साथ डीएपी खाद मिलाकर डालना फायदेमंद रहता है. इससे पौधों को शुरुआत में अच्छा पोषण मिलता है और उनकी जड़ें मजबूत बनती हैं. कृषि वैज्ञानिकों का कहना है कि धान की अच्छी बढ़वार के लिए खेत में पर्याप्त नमी होना बेहद जरूरी है.

हालांकि सीधी बुवाई में खेत में लगातार पानी भरकर रखने की जरूरत नहीं होती, लेकिन मिट्टी सूखनी भी नहीं चाहिए. खेत में हल्की नमी बनाए रखने से बीज का अंकुरण बेहतर होता है और फसल अच्छी तैयार होती है.

समय पर खाद और खरपतवार प्रबंधन करें

धान की फसल में समय-समय पर खाद देना बेहद जरूरी है. विशेषज्ञों के अनुसार शुरुआती अवस्था में यूरिया, पोटाश और जिंक जैसे पोषक तत्वों का संतुलित उपयोग करना चाहिए. इसके अलावा 15 से 20 दिन बाद खरपतवार नियंत्रण पर भी ध्यान देना जरूरी है. यदि समय रहते खरपतवार नहीं हटाए गए, तो वे फसल की बढ़वार और उत्पादन दोनों को प्रभावित कर सकते हैं.

क्यों बढ़ रही है सीधी बुवाई की लोकप्रियता?

धान की पारंपरिक रोपाई में ज्यादा पानी और मजदूरों की जरूरत पड़ती है. लेकिन सीधी बुवाई तकनीक में कम पानी, कम मजदूरी और कम समय में खेती की जा सकती है. बदलते मौसम और पानी की कमी को देखते हुए किसान अब ऐसी तकनीकों की ओर बढ़ रहे हैं, जो कम लागत में ज्यादा उत्पादन दे सकें.

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