क्लस्टर बनाकर बागवानी फसलों का उत्पादन बढ़ाने पर जोर, लीची-केला की खेती से लाभ कमाएंगे किसान

बिहार सरकार क्लस्टर बागवानी योजना के जरिए किसानों की आय दोगुनी करने की तैयारी में है. 25 एकड़ के समूह में अमरूद, पपीता और ड्रैगन फ्रूट जैसी फसलें उगाने पर 2 लाख रुपये तक की सब्सिडी मिलेगी. आधुनिक तकनीक और बेहतर बाजार व्यवस्था से अब खेती मुनाफे का सौदा बनेगी. इच्छुक किसान ऑनलाइन या जिला बागवानी अधिकारी से संपर्क करें.

नोएडा | Published: 29 Jan, 2026 | 12:48 PM

Cluster Horticulture Scheme : बिहार के खेतों में अब सिर्फ फसल नहीं, खुशहाली लहलहाएगी. सरकार की नई क्लस्टर बागवानी योजना ने किसानों के लिए तरक्की के नए द्वार खोल दिए हैं. अब किसान अकेले नहीं, बल्कि समूह (क्लस्टर) में खेती करेंगे और सरकार उन्हें तकनीक से लेकर बाजार तक हर कदम पर मदद करेगी. बिहार की धरती सोना उगलती है, बस जरूरत है उसे सही दिशा और तकनीक देने की. इसी सोच के साथ कृषि भवन में एक भव्य कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जहां निवेशकों और कृषि-उद्यमियों को बिहार की बागवानी शक्ति से रूबरू कराया गया. सरकार का स्पष्ट संदेश है कि खेत किसान का और तकनीक सरकार की और मुनाफा सबका.

क्या है क्लस्टर वाली खेती और इससे क्या बदलेगा?

आम भाषा में समझें तो क्लस्टर का मतलब है एक जैसा काम करने वालों का समूह. अगर किसी गांव या इलाके के किसान मिलकर कम से कम 25 एकड़ जमीन पर एक ही तरह की फसल (जैसे आम, लीची या केला) उगाते हैं, तो उसे क्लस्टर कहा जाता है. अकेले खेती करने पर किसान को बीज, खाद और बाजार ढूंढने में दिक्कत होती है, लेकिन क्लस्टर में खेती करने से सरकार  सीधे आपके पास आती है. इसमें हाई-क्वालिटी के पौधे मिलते हैं और कटाई के बाद फसल खराब न हो, इसके लिए कोल्ड स्टोरेज और पैक-हाउस की सुविधा भी दी जाती है.

कौन सी फसलों से होगी ज्यादा कमाई

सरकार ने उन फसलों को चुना है जिनकी बाजार में भारी मांग है.

सरकार दे रही है लाखों की सब्सिडी

खेती में सबसे बड़ा डर लागत का होता है. सरकार ने इस डर को खत्म करने के लिए सब्सिडी का पिटारा खोल दिया है. सामान्य फसलों के लिए जैसे-अगर आप अमरूद, आंवला या पपीता  जैसी फसलें लगाते हैं, तो सरकार प्रति एकड़ 1 लाख रुपये तक की मदद देगी. इसके साथ ही प्रीमियम फसलों के लिए- अगर आप ड्रैगन फ्रूट या स्ट्रॉबेरी जैसी महंगी फसलें चुनते हैं, तो सब्सिडी की राशि बढ़कर 2 लाख रुपये प्रति एकड़ तक हो जाती है. मतलब, लागत की चिंता सरकार की और मेहनत किसान की.

मंत्री जी का विजन-बिहार बनेगा निवेश का हब

कृषि मंत्री राम कृपाल यादव का मानना है कि बिहार के युवाओं को रोजगार  के लिए बाहर जाने की जरूरत नहीं है. इस योजना के जरिए गांव-गांव में पैक-हाउस और प्रोसेसिंग यूनिट लगेंगी. जब बिहार की लीची और मखाना ब्रांड बनकर विदेशों में बिकेंगे, तो पैसा सीधे बिहार के किसान की जेब में आएगा. इससे न केवल फसल की बर्बादी रुकेगी, बल्कि युवाओं के लिए स्थानीय स्तर पर सम्मानजनक नौकरियां भी पैदा होंगी.

आवेदन कैसे करें और कहां मिलेगी मदद?

अगर आपके पास या आपके समूह के पास 25 एकड़ जमीन है, तो इस सुनहरे मौके को हाथ से न जाने दें. आवेदन की प्रक्रिया बहुत ही सरल रखी गई है. आप सीधे उद्यान निदेशालय की आधिकारिक वेबसाइट https://horticulture.bihar.gov.in पर जाकर ऑनलाइन फॉर्म भर सकते हैं. यदि आप आमने-सामने बात करना चाहते हैं, तो अपने जिले के बागवानी अधिकारी से मिलकर पूरी जानकारी और फॉर्म प्राप्त कर सकते हैं. वहीं, जो निवेशक बड़े स्तर पर बिजनेस या प्रोसेसिंग यूनिट लगाना चाहते हैं, वे बिहार हॉर्टिकल्चर डेवलपमेंट सोसाइटी (BHDS) के माध्यम से अपना प्रस्ताव दे सकते हैं. सरकार आपको तकनीक और बाजार दोनों उपलब्ध कराने के लिए तैयार है.

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