Apple Farming: प्रोटेक्शन ऑफ प्लांट वैरायटीज एंड फार्मर्स राइट्स अथॉरिटी ने किसानों द्वारा विकसित एक नई सेब किस्म ‘कंवर मझोली सिलेक्शन-1’ को आधिकारिक तौर पर पंजीकृत किया है. यह भागीदारी आधारित फसल सुधार की दिशा में एक अहम उपलब्धि मानी जा रही है. यह किस्म शिमला जिले के मझोली गांव के प्रगतिशील बागवान जोगिंदर सिंह कंवर के लंबे प्रयासों का परिणाम है. इसमें रीजनल हॉर्टिकल्चर रिसर्च एंड ट्रेनिंग स्टेशन मशोबरा के वैज्ञानिकों ने भी सहयोग किया, जो डॉ वाईएस परमार यूनिवर्सिटी ऑफ हॉर्टिकल्चर एंड फॉरेस्ट्री नौणी के अंतर्गत कार्य करता है.
RHRTS-मशोबरा के एसोसिएट डायरेक्टर डॉ दिनेश सिंह ठाकुर ने ‘द ट्रिब्यून’ से कहा है कि इस नई सेब किस्म की खोज साल 2016 में हुई थी, जब जोगिंदर सिंह कंवर ने अपने बाग में 47 साल पुराने रेड डिलीशियस पेड़ की एक निचली शाखा पर जल्दी पकने वाले और गहरे रंग के अलग तरह के फल देखे. ये फल उसी पेड़ के बाकी फलों से काफी अलग थे, जिसके बाद इस पर वैज्ञानिक जांच शुरू की गई.
इतनी ऊंचाई पर कर सकते हैं खेती
साल 2017 में वैज्ञानिकों की एक टीम, जिसमें डॉ नीना चौहान भी शामिल थीं, ने बाग का निरीक्षण किया और पाया कि यह बदलाव पूरी शाखा में हुआ एक म्यूटेशन है. इसके बाद उस शाखा से बडवुड लेकर उसे M9 रूटस्टॉक पर ग्राफ्ट किया गया, ताकि इसके गुणों और फल की गुणवत्ता को परखा जा सके. इस किस्म का अध्ययन मशोबरा में करीब 4-5 साल तक किया गया, जो समुद्र तल से 2,286 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है.
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2016 से लगातार परीक्षण के बाद मिला रिजल्ट
डॉ देविना वैद्य ने बताया कि यूनिवर्सिटी ने इस किस्म को किसान द्वारा विकसित वैरायटी के रूप में सुरक्षित करने की प्रक्रिया शुरू की और इसके लिए PPV&FRA में आवेदन किया. रीजनल हॉर्टिकल्चर रिसर्च एंड ट्रेनिंग स्टेशन मशोबरा के वैज्ञानिक 2016 से लगातार इसके परीक्षण और जरूरी डेटा तैयार करने में लगे रहे, जिसके बाद इस किस्म को आधिकारिक मान्यता मिल गई.
वहीं कुलपति प्रोफेसर राजेश्वर सिंह चंदेल ने किसान परिवार और वैज्ञानिकों को बधाई दी. उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि किसानों के नवाचार को पहचान देने और नई किस्मों के विकास को बढ़ावा देने की दिशा में अहम कदम है. ‘कंवर मझोली सिलेक्शन-1’ में रेड डिलीशियस सेब की खासियत बनी हुई है, लेकिन इसमें जल्दी पकने और गहरे रंग जैसे अतिरिक्त फायदे भी हैं.
धुंध वाले इलाकों के किसानों के लिए बेस्ट है यह किस्म
प्रोफेसर राजेश्वर सिंह चंदेल ने कहा कि यह नई सेब किस्म धुंध वाले इलाकों में खेती के लिए काफी उपयुक्त हो सकती है, जहां फलों में अच्छा रंग लाना अक्सर मुश्किल होता है. इस वजह से यह किस्म किसानों के लिए एक बेहतर विकल्प साबित हो सकती है. उन्होंने यह भी कहा कि किसान परिवार की सहमति से इस किस्म का अलग-अलग स्थानों पर परीक्षण किया जा रहा है, जिसे फिलहाल ‘कंवर रेड’ नाम से जाना जा रहा है.