जुलाई में खाद बिक्री 13 फीसदी घटी, बारिश भी कमजोर.. फसल उत्पादन में गिरावट की आशंका बढ़ी

खरीफ सीजन में यूरिया, DAP, MOP और कॉम्प्लेक्स खाद की बिक्री में गिरावट से फसल उत्पादन को लेकर चिंता बढ़ी है. जुलाई में कुल खाद बिक्री 13 फीसदी घटकर 77.44 लाख टन रही. वहीं, मॉनसून 12 फीसदी कमजोर है और कई जिलों में बारिश की भारी कमी है. 7 अगस्त तक खरीफ बुवाई भी पिछले साल से 1.8 फीसदी पीछे रही.

Kisan India
नोएडा | Updated On: 13 Aug, 2026 | 08:03 AM

Fertilizer Sales: खरीफ फसलों की बुवाई के अहम महीने जुलाई में किसानों ने यूरिया, DAP, MOP और कॉम्प्लेक्स खाद का कम इस्तेमाल किया है. इन खादों की बिक्री में गिरावट से इस साल फसल उत्पादन को लेकर चिंता बढ़ गई है. हालांकि, खरीफ फसलों की कुल बुवाई अब सामान्य रकबे से 2 फीसदी से भी कम पीछे रह गई है. आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, जुलाई 2026 में कुल खाद बिक्री 13 फीसदी घटकर 77.44 लाख टन रह गई, जो पिछले साल इसी महीने 89.41 लाख टन थी. यूरिया की बिक्री 9 फीसदी घटकर 49.28 लाख टन, DAP 1.4 फीसदी घटकर 10.7 लाख टन, MOP 21 फीसदी घटकर 1.95 लाख टन और कॉम्प्लेक्स खाद की बिक्री 29 फीसदी घटकर 15.51 लाख टन रह गई.

विशेषज्ञों का कहना है कि देर से बुवाई करने पर भी किसानों को पैदावार में नुकसान हो सकता है. जिन जिलों में बारिश सामान्य से 60 फीसदी से कम हुई है, वहां उत्पादन में गिरावट को रोकना मुश्किल हो सकता है. अगले 20 दिनों में भी मौसम से नुकसान की भरपाई की उम्मीद कम है. खास बात यह है कि अप्रैल-जुलाई में खाद की खपत 9 फीसदी घटी है.

मार्च और अप्रैल में खाद की बिक्री में तेजी

बिजनेसलाइन की रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान में 28 फरवरी से शुरू हुए युद्ध के बाद मार्च और अप्रैल में खाद की बिक्री में तेजी देखी गई थी. हालांकि, मई से इसमें गिरावट शुरू हो गई. इसके चलते चालू वित्त वर्ष के अप्रैल-जुलाई के दौरान कुल खाद की खपत 9 फीसदी घटकर 191.44 लाख टन रह गई, जो पिछले साल इसी अवधि में 210.6 लाख टन थी. इन चार महीनों में यूरिया, MOP और कॉम्प्लेक्स खाद की बिक्री में गिरावट आई, जबकि DAP की बिक्री करीब 27 लाख टन पर स्थिर रही. विशेषज्ञों के मुताबिक, इस साल खरीफ फसलों के कम रकबे के साथ बारिश के अनियमित पैटर्न ने भी किसानों के खाद इस्तेमाल के फैसले को प्रभावित किया है.

मॉनसून 12 फीसदी कमजोर, कई जिलों में बारिश की भारी कमी

विशेषज्ञों के मुताबिक, अगर सीजन के अंत तक खरीफ फसलों का रकबा पिछले साल के बराबर हो जाता है, तो देर से हुई बुवाई की कुछ भरपाई संभव है. लेकिन समय पर बुवाई फसल की अच्छी पैदावार के लिए बेहद जरूरी है. कई राज्यों में बुवाई का सही समय निकल चुका है. ऐसे में प्रमुख फसलों की पैदावार 5-7 फीसदी तक घटने की आशंका जताई गई है. हालांकि, फर्टिलाइजर एसोसिएशन ऑफ इंडिया (FAI) के महानिदेशक एसके चौधरी ने कहा कि किसानों के लिए उपलब्ध खाद और पोषक तत्व सामान्य उत्पादन के लिए पर्याप्त हैं.

12 अगस्त तक देश में 485.5 मिमी बारिश

IMD के आंकड़ों के मुताबिक, 1 जून से 12 अगस्त तक देश में 485.5 मिमी बारिश हुई है, जो सामान्य से 12 फीसदी कम है. देश के 741 जिलों में से 338 जिलों में 20 फीसदी से ज्यादा बारिश की कमी दर्ज की गई है. वहीं, 112 जिलों में सामान्य से 40 फीसदी या उससे भी कम बारिश हुई है. 191 जिलों में बारिश की कमी 30 फीसदी या उससे ज्यादा रही है. इनमें पूर्वोत्तर राज्यों के आंकड़े शामिल नहीं हैं. इस साल खरीफ फसलों की बुवाई पिछले साल के मुकाबले थोड़ी पीछे चल रही है. उड़द, सोयाबीन और मूंगफली को छोड़कर ज्यादातर प्रमुख खरीफ फसलों का रकबा कम है. 7 अगस्त तक खरीफ फसलों की कुल बुवाई 967.92 लाख हेक्टेयर में हुई है, जबकि पिछले साल इसी अवधि में 985.89 लाख हेक्टेयर में बुवाई हो चुकी थी. यानी इस साल रकबा 1.8 फीसदी कम है.

1761.6 लाख टन खाद्यान्न उत्पादन का लक्ष्य

सरकार ने खरीफ 2026 के लिए कुल 1761.6 लाख टन खाद्यान्न उत्पादन का लक्ष्य  रखा है. इसमें 1231.5 लाख टन चावल, 84 लाख टन दालें, 310.4 लाख टन मक्का और 135.6 लाख टन पोषक अनाज शामिल हैं. वहीं, सरकार ने इस खरीफ सीजन में 289.2 लाख टन तिलहन उत्पादन का लक्ष्य रखा है. इसमें सोयाबीन का लक्ष्य 148.5 लाख टन और मूंगफली का 113.5 लाख टन रखा गया है.

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Published: 13 Aug, 2026 | 07:58 AM

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