हरियाणा में भूजल की गुणवत्ता को लेकर चिंता बढ़ रही है. कई इलाकों में पानी में टीडीएस (कुल घुलनशील ठोस) का स्तर काफी ज्यादा पाया गया है. ज्यादा टीडीएस वाला पानी लंबे समय तक पीने से सेहत पर असर पड़ सकता है. राज्य के 142 ब्लॉकों में से 33 ब्लॉकों में भूजल का औसत टीडीएस 1,000 से 1,974 मिलीग्राम प्रति लीटर तक पहुंच गया है. वहीं, 71 गांवों में टीडीएस का स्तर 3,000 से 9,553 मिलीग्राम प्रति लीटर तक दर्ज किया गया है. आंकड़ों से साफ है कि इन गांवों में भूजल की गुणवत्ता गंभीर चिंता का विषय बनती जा रही है.
हिन्दी अखबार दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के मुताबिक, कैथल से कांग्रेस विधायक आदित्य सुरजेवाला के सवाल के जवाब में राज्य सरकार ने यह जानकारी विधानसभा में साझा की है. सरकार के आंकड़ों के मुताबिक, हरियाणा के कई इलाकों में भूजल में टीडीएस का स्तर काफी ज्यादा है. वहीं, स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार 1,000 मिलीग्राम प्रति लीटर से ज्यादा टीडीएस वाला पानी लंबे समय तक पीना सेहत के लिए नुकसानदायक हो सकता है. इससे किडनी की बीमारी, पथरी, हाई ब्लड प्रेशर और पेट से जुड़ी समस्याओं का खतरा बढ़ सकता है.
इन ब्लॉकों में टीडीएस 1000 से ज्यादा
- नगीना1845
- हथीन1845
- पलवल1757
- ब्लॉकटीडीएस
- इन्द्री1974
- पुन्हाना1845
- पृथला1752
- खोल1572
- हसनपुर1536
- ब्लॉकटीडीएस
- अलेवा1357
- बहल1298
- पिनगवां1294
- राई 1254
- कनीना1168
- निजामपुर1165
- नूंह 1138
- तिगांव1130
- सतनाली1083
- रेवाड़ी1081
- गन्नौर1079
- महेंद्रगढ़1077
- नारनौल1070
- झोझू1058
- बावल1053
- अटेली नंगल1083
ज्यादा टीडीएस वाला पानी सेहत के लिए नुकसानदायक
चिकित्सकों के मुताबिक, ज्यादा टीडीएस वाला पानी पीने से पेट खराब, दस्त, उल्टी, कब्ज और सिरदर्द जैसी समस्याएं हो सकती हैं. लंबे समय तक ऐसे पानी का सेवन करने से कुछ मामलों में किडनी और लिवर पर भी असर पड़ सकता है. उन्होंने कहा कि पानी में कुछ मिनरल्स की मात्रा ज्यादा होने से हार्मोनल असंतुलन, ब्लड प्रेशर बढ़ने और कुछ अन्य स्वास्थ्य समस्याओं का खतरा हो सकता है.
पानी में TDS का सही स्तर सेहत के लिए जरूरी
पीने के पानी में TDS (कुल घुलित ठोस) की मात्रा बहुत ज्यादा या बहुत कम नहीं होनी चाहिए. आमतौर पर 50 से 150 PPM TDS वाला पानी पीने के लिए सबसे बेहतर माना जाता है. ब्यूरो ऑफ इंडियन स्टैंडर्ड (BIS) की रिपोर्ट के मुताबिक, पीने के पानी में TDS की मात्रा 500 मिलीग्राम प्रति लीटर से कम होनी चाहिए. वहीं, विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार 300 मिलीग्राम प्रति लीटर से कम TDS वाला पानी बेहतर माना जाता है. पानी में TDS बहुत ज्यादा होने पर इसका स्वाद और गुणवत्ता प्रभावित हो सकती है और लंबे समय तक ऐसे पानी का सेवन सेहत के लिए नुकसानदायक हो सकता है. दूसरी ओर, बहुत कम TDS होने का मतलब है कि पानी में जरूरी खनिजों की मात्रा कम हो सकती है.