Maharashtra News: महाराष्ट्र के मेडिकल एजुकेशन मंत्री और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) नेता हसन मुश्रीफ ने चीनी की बढ़ती कीमतों के लिए मिलों की ओर से की जा रही जमाखोरी और बिक्री नियमों के कमजोर पालन को जिम्मेदार ठहराया है. उन्होंने कहा कि चीनी की कीमतों में तेजी के पीछे इथेनॉल उत्पादन की कोई भूमिका नहीं है. एक रिपोर्ट के मुताबिक, बड़े शहरों में चीनी का भाव बढ़कर 75-80 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गया था. इसके बाद केंद्र सरकार ने 10 लाख टन चीनी आयात की मंजूरी दी और जमाखोरी के खिलाफ कार्रवाई शुरू की, जिससे कीमतों में कुछ नरमी आई. हालांकि, चीनी अभी भी करीब 60 रुपये प्रति किलो बिक रही है, जो अगस्त की शुरुआत के 45 रुपये के मुकाबले काफी ज्यादा है.
महाराष्ट्र के मंत्री हसन मुश्रीफ ने कहा कि चीनी की कीमतों में हुई बढ़ोतरी कृत्रिम थी. उन्होंने आरोप लगाया कि चीनी मिलों ने तय मासिक कोटे से ज्यादा चीनी बाजार में बेच दी, लेकिन इसकी पर्याप्त निगरानी नहीं की गई. इसका सबसे ज्यादा असर गरीब और मध्यम वर्ग के परिवारों पर पड़ा. मुश्रीफ के मुताबिक, चीनी की बिक्री आवश्यक वस्तु अधिनियम (ECA) के तहत नियंत्रित होती है. उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ मिलों ने तय सीमा से ज्यादा स्टॉक जारी किया, जो पहले कभी देखने को नहीं मिला. उनके अनुसार, केंद्र सरकार की ओर से समय पर नियंत्रण नहीं किए जाने से जमाखोरी को बढ़ावा मिला और इससे चीनी के दाम बढ़ गए.
इथेनॉल के लिए सीमित चीनी का इस्तेमाल
हसन मुश्रीफ ने चीनी की कीमतों में तेजी के लिए इथेनॉल उत्पादन में चीनी के इस्तेमाल को जिम्मेदार मानने से इनकार किया. उन्होंने कहा कि इथेनॉल बनाने के लिए चीनी की केवल सीमित मात्रा का इस्तेमाल हो रहा है. गन्ने के रस से सीधे इथेनॉल बनाने पर रोक और बी-हेवी मोलासेस के इस्तेमाल पर पाबंदी के कारण चीनी मिलें मुख्य रूप से सी-हेवी मोलासेस से इथेनॉल बना रही हैं.
इथेनॉल को बताया बेगुनाह
मुश्रीफ ने कहा कि इथेनॉल चीनी की कीमत बढ़ने की वजह नहीं है और इसे इसके लिए जिम्मेदार ठहराना सही नहीं है. उन्होंने चीनी के दाम बढ़ने के मामले में पूरी जांच कराने और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की. हसन मुश्रीफ ने चीनी की कीमतों में बढ़ोतरी को लेकर केंद्रीय मंत्री अमित शाह पर लगाए जा रहे आरोपों का भी बचाव किया. किसान नेता राजू शेट्टी ने चीनी के दाम बढ़ने के लिए शाह को जिम्मेदार ठहराया था. उन्होंने आरोप लगाया था कि उत्तर भारत के राज्यों से बड़ी मात्रा में चीनी की तस्करी बांग्लादेश की गई.
अमित शाह का किया बचाव
मुश्रीफ ने कहा कि महाराष्ट्र और गुजरात में सहकारी क्षेत्र काफी मजबूत है. अमित शाह का सहकारी बैंकिंग क्षेत्र से जुड़ाव रहा है और उन्हें चीनी उद्योग की अच्छी समझ है. ऐसे में चीनी की कीमतों में बढ़ोतरी के लिए शाह को जिम्मेदार ठहराना उचित नहीं है.