Mango Export: ईरान-इजरायल जंग के चलते आम कारोबार पर प्रभावित हुआ है. खासकर तमिलनाडु के कोयंबटूर में संघर्ष का सीधा असर आम के निर्यात पर पड़ा है. इसके चलेत खाड़ी देशों को होने वाला निर्यात रुक गया है, जिससे व्यापारियों को काफी नुकसान हो रहा है. उक्कड़म आम मंडी से निर्यात गतिविधि बहुत कम हो गई है. वहीं, निर्यात बाजार में गिरावट के कारण आमों की कीमतों में भारी कमी आई है. अब अल्फांसो आम 150 रुपये किलो बिक रहा है. ऐसे में किसानों को भी उचित रेट नहीं मिल पा रहा है. वे नुकसान में आम बेचने को मजबूर हो गए हैं.
व्यापारियों के अनुसार, सीजन की शुरुआत में रोजाना 60 टन से ज्यादा आम विदेशों में भेजे जाते थे, लेकिन अब अंतरराष्ट्रीय हवाई यातायात बाधित होने के कारण यह मात्रा घटकर 5 टन से भी कम रह गई है. निर्यात बाजार में गिरावट के कारण आमों की कीमतों में भारी कमी आई है. कोयंबटूर से निर्यात होने वाले प्रमुख किस्म अल्फांसो आम की कीमत 300 रुपये प्रति किलो से घटकर 150 रुपये रह गई है. इसी तरह बंगलापल्ली आम, जो पहले 120 से 150 रुपये में बिकता था, अब 50 से 70 रुपये में बिक रहा है. सेंथुरम (सिंधुरा) की कीमत भी 150- 170 रुपये से घटकर 60-80 रुपये प्रति किलो हो गई है. इसी तरह इमाम पसंद आम, जो पहले 200-240 रुपये में बिकता था, अब 100-130 रुपये में मिल रहा है. वहीं तोतापुरी किस्म, जिसे ज्यादातर फैक्ट्रियों में प्रोसेसिंग के लिए इस्तेमाल किया जाता है, उसकी कीमत भी घटकर 15 से 25 रुपये प्रति किलो रह गई है.
पहले और अब कितना है आम का रेट
| आम की किस्म | पहले की कीमत (₹/किलो) | अब की कीमत (₹/किलो) |
|---|---|---|
| अल्फांसो (Alphonso) | 300 | 150 |
| बंगलापल्ली (Banganapalli) | 120- 150 | 60- 80 |
| सेंथुरम / सिंधुरा (Senthuram/Sindhura) | 150- 170 | Cell 3-3 |
| इमाम पसंद (Imam Pasand) | 200- 240 | 100- 130 |
| तोतापुरी (Totapuri) | 15 – 25 |
इन देशों में नहीं हो पा रहा आम का निर्यात
कोयंबटूर जिला आम व्यापारी कल्याण संघ के अध्यक्ष यूएम जवाहर ने द इंडियन एक्सप्रेस को बताया कि आम जल्दी खराब होने वाला फल है, इसलिए इसे समय पर भेजना बहुत जरूरी होता है. उन्होंने कहा कि खाड़ी देशों में हवाई संपर्क कई हफ्तों तक प्रभावित रहने के कारण कोयंबटूर हवाई अड्डे से दुबई, अबू धाबी और शारजाह जैसे प्रमुख शहरों के लिए कार्गो उड़ानें बुरी तरह प्रभावित हुई हैं. उन्होंने कहा कि जरा सी देरी भी आम के खराब होने और बड़े आर्थिक नुकसान का कारण बनती है. आमतौर पर रमजान के समय खाड़ी देशों में आम की भारी मांग होती है और बड़ी मात्रा में आम वहां भेजे जाते हैं, लेकिन इस साल स्थिति अलग है.
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जंग से घरेलू बाजार भी प्रभावित
उन्होंने यह भी कहा कि इस रुकावट का असर घरेलू बाजार पर भी पड़ा है. जब निर्यात नहीं हो पा रहा है, तो अतिरिक्त आम स्थानीय बाजारों में आ गया है, जिससे सप्लाई बढ़ गई और कीमतों में तेजी से गिरावट देखने को मिल रही है. व्यापारियों ने कहा कि इस साल आम का सीजन, जो आमतौर पर मार्च से जुलाई तक चलता है, पहले ही देरी से शुरू हुआ था, जिससे मुश्किलें और बढ़ गई हैं.
कोयंबटूर से होती है दूसरे राज्यों में आम की सप्लाई
जवाहर ने आगे कहा कि आमतौर पर स्थानीय निर्यातक और दूसरे राज्यों के खरीदार बड़ी संख्या में कोयंबटूर आते हैं, क्योंकि यह एक प्रमुख सप्लाई हब है. लेकिन संघर्ष बढ़ने के बाद से मांग में काफी कमी आ गई है. हालांकि, इन मुश्किल हालात में व्यापारियों को थोड़ी राहत भी मिली है. सोमवार से अब तक करीब 150 टन आम की बिक्री हुई है, क्योंकि चिथिरई कानी, तमिल नव वर्ष और विशु जैसे त्योहारों के दौरान मांग बढ़ने की उम्मीद है. लेकिन व्यापारियों का कहना है कि यह बिक्री निर्यात में आई बड़ी गिरावट से हुए नुकसान की भरपाई के लिए पर्याप्त नहीं है.