मध्य प्रदेश में पहुंची 360 मीट्रिक टन यूरिया और 830 मीट्रिक टन डीएपी, किसानों को बड़ी राहत

कटनी जिले में किसानों के लिए यूरिया और डीएपी खाद की बड़ी खेप पहुंची है. प्रशासन ने अलग-अलग केंद्रों पर खाद भेजने की तैयारी शुरू कर दी है. इस बार खाद वितरण ई-टोकन व्यवस्था के तहत होगा ताकि कालाबाजारी रोकी जा सके और जरूरतमंद किसानों को समय पर उर्वरक आसानी से मिल सके.

Saurabh Sharma
नोएडा | Published: 26 May, 2026 | 11:30 PM

Neem Coated Urea: मध्यप्रदेश के किसानों के लिए अच्छी खबर है. जायद फसलों की खेती के लिए जिले में खाद की बड़ी खेप पहुंची है. झुकेही रैक प्वॉइंट पर खाद की दो रैक आई हैं, जिनसे जिले को 360 मीट्रिक टन नीम कोटेड यूरिया और 830 मीट्रिक टन डीएपी खाद मिली है. खाद को झुकेही रैक प्वॉइंट से अलग-अलग केंद्रों तक पहुंचाया जा रहा है. प्रशासन का कहना है कि जिले में फिलहाल खाद की पर्याप्त उपलब्धता है और किसानों को परेशान होने की जरूरत नहीं है. नीम कोटेड यूरिया में से कटनी डबल लॉक केंद्र को 140 मीट्रिक टन और मझगवां बड़वारा डबल लॉक केंद्र को 90 मीट्रिक टन खाद दी जाएगी. वहीं मार्केटिंग सोसाइटी सीएमएस उमरियापन, ढीमरखेड़ा और सीएमएस बाकल को 50-50 मीट्रिक टन उर्वरक मिलेगा. एमपी एग्रो कटनी को भी 30 मीट्रिक टन यूरिया आवंटित की गई है.

अलग-अलग केंद्रों पर बांटी जाएगी डीएपी खाद

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, मध्य प्रदेश के कटनी जिले में आई 830 मीट्रिक टन डीएपी खाद  को भी कई केंद्रों में भेजा जाएगा. डबल लॉक केंद्र कटनी और मझगवां बड़वारा को 160-160 मीट्रिक टन डीएपी मिलेगी. बहोरीबंद डबल लॉक केंद्र को 150 मीट्रिक टन डीएपी दी जाएगी. सहकारी बैंक कटनी को 120 मीट्रिक टन और एमपी एग्रो कटनी को 60 मीट्रिक टन डीएपी आवंटित की गई है. इसके अलावा सीएमएस कटनी, उमरियापान, ढीमरखेड़ा, रीठी, बड़वारा, प्रियदर्शनी विपणन और सीएमएस बाकल को 30-30 मीट्रिक टन डीएपी खाद दी जाएगी. प्रशासन का कहना है कि सभी केंद्रों पर समय पर खाद पहुंचाने के लिए लगातार निगरानी की जा रही है ताकि किसानों को किसी तरह की परेशानी न हो.

बिना ई-टोकन किसानों को नहीं मिलेगी खाद

जिले में खाद वितरण  को पारदर्शी बनाने के लिए प्रशासन ने नई व्यवस्था लागू की है. कलेक्टर ने कृषि विभाग को निर्देश दिए हैं कि बिना ई-टोकन किसी भी किसान को खाद नहीं दी जाए. अब किसान की जमीन, खसरा नंबर और बोई गई फसल के आधार पर सॉफ्टवेयर तय करेगा कि किसान को कितनी खाद दी जानी है. इससे जरूरत से ज्यादा खाद लेने और कालाबाजारी पर रोक लगाने में मदद मिलेगी. किसान अब घर बैठे पोर्टल पर ये भी देख सकेंगे कि किस केंद्र पर कितना स्टॉक मौजूद है. किसान प्राथमिक कृषि सहकारी समितियों, डबल लॉक केंद्रों, एमपी ऑनलाइन और कॉमन सर्विस सेंटर पर जाकर ई-टोकन प्राप्त कर सकते हैं. सरकार ने साफ कहा है कि अगर कोई समिति या निजी विक्रेता बिना ई-टोकन खाद बेचता पाया गया तो उसके खिलाफ उर्वरक नियंत्रण अधिनियम के तहत कार्रवाई की जाएगी.

किसानों से संतुलित खाद उपयोग करने की अपील

कृषि विभाग ने किसानों से जरूरत के अनुसार ही खाद इस्तेमाल करने की अपील की है. अधिकारियों का कहना है कि जरूरत से ज्यादा उर्वरक का उपयोग करने से खेती की लागत बढ़ती है और मिट्टी की गुणवत्ता  भी खराब होती है. किसानों को सलाह दी गई है कि वे मिट्टी की सेहत और फसल की जरूरत को ध्यान में रखते हुए संतुलित मात्रा में उर्वरक डालें. इससे फसल उत्पादन बेहतर होगा और जमीन की उर्वरक क्षमता भी बनी रहेगी. प्रशासन का मानना है कि ई-टोकन व्यवस्था और पर्याप्त खाद उपलब्ध होने से इस बार किसानों को समय पर उर्वरक मिल सकेगा और खेती का काम बिना रुकावट जारी रहेगा.

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Published: 26 May, 2026 | 11:30 PM

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