कमजोर मॉनसून का असर! खरीफ बुवाई 23 फीसदी घटी.. धान, तिलहन और दलहन के रकबे में बड़ी गिरावट

देश में मॉनसून की 42 फीसदी कमी के कारण खरीफ फसलों की बुवाई 23 फीसदी घटकर 182.72 लाख हेक्टेयर रह गई है. धान, कपास, सोयाबीन, अरहर और तिलहन फसलों का रकबा पिछले साल की तुलना में काफी कम हुआ है. कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि जुलाई में अच्छी बारिश नहीं हुई तो उत्पादन प्रभावित हो सकता है.

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नोएडा | Updated On: 30 Jun, 2026 | 08:04 AM

Kharif Sowing Update: देश में मॉनसून की कमी का असर खरीफ फसलों की बुवाई पर साफ दिखाई देने लगा है. 29 जून तक मॉनसून सामान्य से 42 फीसदी कम रहा, जिसके चलते खरीफ फसलों की बुवाई में पिछले साल के मुकाबले 23 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई है. अभी तक खरीफ फसलों की कुल बुवाई महज 182.72 लाख हेक्टेयर में ही हुई है. कृषि विशेषज्ञ इसे उत्पादन में संभावित कमी का शुरुआती संकेत मान रहे हैं, खासकर ऐसे समय में जब सुपर अल नीनो की आशंका भी जताई जा रही है.

कृषि मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, 25 जून तक खरीफ फसलों की बुवाई 182.72 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में हुई है, जबकि पिछले साल इसी अवधि में यह आंकड़ा 236.46 लाख हेक्टेयर था. हालांकि हाल के दिनों में कुछ क्षेत्रों में मॉनसून ने रफ्तार पकड़ी है, लेकिन जुलाई का महीना खेती के लिए सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है. ऐसे में किसानों और कृषि विशेषज्ञों की नजर मॉनसून की आगे की प्रगति पर बनी हुई है. फसलों की बात करें तो गन्ना ही एकमात्र प्रमुख फसल है, जिसके रकबे में बढ़ोतरी दर्ज की गई है. वहीं धान, अरहर, सोयाबीन, मूंगफली, मक्का और कपास जैसी प्रमुख खरीफ फसलों की बुवाई पिछले साल की तुलना में कम रही है. कृषि क्षेत्र से जुड़े जानकारों का कहना है कि यदि जुलाई में अच्छी बारिश नहीं हुई, तो फसलों के उत्पादन पर असर पड़ सकता है.

खरीफ फसलों की बुवाई के आंकड़े (स्रोत: कृषि मंत्रालय)

फसल 2025 (लाख हेक्टेयर) 2026 (लाख हेक्टेयर) प्रतिशत बदलाव (%)
धान (Paddy) 34.41 25.75 -25.2
दलहन (Pulses) 21.46 14.92 -30.5
अरहर (Arhar) 8.45 3.56 -57.9
उड़द (Urdbean) 2.51 1.07 -57.4
मूंग (Moongbean) 8.63 8.37 -3.0
श्री अन्न एवं मोटे अनाज 36.07 31.84 -11.7
ज्वार (Jowar) 2.70 3.38 +25.2
तिलहन (Oilseeds) 36.41 16.99 -53.3
मूंगफली (Groundnut) 15.29 8.87 -42.0
सोयाबीन (Soybean) 19.97 6.92 -65.3

अभी तक 16.5 फीसदी हुई बुवाई

अधिकारियों के अनुसार, अभी बुवाई का सीजन शुरुआती चरण में है. 25 जून तक कुल बुवाई सामान्य सीजन के 1104.46 लाख हेक्टेयर क्षेत्र का केवल 16.5 फीसदी ही रही है, जबकि पिछले साल इसी समय तक यह 21 फीसदी से अधिक थी. उनका कहना है कि यदि अगले दो सप्ताह तक मॉनसून की स्थिति बेहतर बनी रहती है, तो बुवाई में तेजी आ सकती है, हालांकि पिछले साल के स्तर तक पहुंचना मुश्किल हो सकता है, क्योंकि 2025 में देश में अच्छा मॉनसून रहा था.

कपास की बुवाई में सबसे ज्यादा गिरावट

खरीफ फसलों में सबसे ज्यादा गिरावट कपास की बुवाई में दर्ज की गई है. इस साल 25 जून तक कपास की बुवाई 29.66 लाख हेक्टेयर में हुई, जबकि पिछले साल इसी अवधि में यह 45.36 लाख हेक्टेयर थी. यानी कपास का रकबा करीब 35 फीसदी घट गया है. इसी तरह धान की रोपाई 34.41 लाख हेक्टेयर से घटकर 25.75 लाख हेक्टेयर रह गई है. दालों की बुवाई भी प्रभावित हुई है. इस साल दालों का कुल रकबा 14.92 लाख हेक्टेयर रहा, जबकि पिछले साल यह 21.46 लाख हेक्टेयर था.  अरहर की बुवाई 8.45 लाख हेक्टेयर से घटकर 3.56 लाख हेक्टेयर, मूंग 8.63 लाख हेक्टेयर से घटकर 8.37 लाख हेक्टेयर और उड़द 2.51 लाख हेक्टेयर से घटकर 1.07 लाख हेक्टेयर रह गई है.

तिलहन फसलों का रकबा भी हुआ कम

तिलहन फसलों का रकबा भी काफी कम हुआ है. तिलहन की बुवाई 36.41 लाख हेक्टेयर से घटकर 16.99 लाख हेक्टेयर रह गई. सोयाबीन की बुवाई 19.97 लाख हेक्टेयर से घटकर 6.92 लाख हेक्टेयर और मूंगफली की बुवाई 15.29 लाख हेक्टेयर से घटकर 8.87 लाख हेक्टेयर पर आ गई है. वहीं, मोटे अनाज (श्री अन्न) की बुवाई भी पिछले साल की तुलना में 11.7 फीसदी कम रही. इसका रकबा 36.41 लाख हेक्टेयर से घटकर 31.84 लाख हेक्टेयर दर्ज किया गया है. कमजोर मॉनसून के कारण अधिकांश खरीफ फसलों की बुवाई प्रभावित हुई है, हालांकि आने वाले दिनों में बारिश बढ़ने पर स्थिति में सुधार की उम्मीद जताई जा रही है.

ज्वार की बुवाई में आई तेजी

मोटे अनाज (श्री अन्न) की फसलों में ज्वार ही एकमात्र ऐसी फसल रही, जिसकी बुवाई में बढ़ोतरी दर्ज की गई है. इस साल 25 जून तक ज्वार की बुवाई 3.38 लाख हेक्टेयर में हुई, जबकि पिछले साल इसी अवधि में यह 2.70 लाख हेक्टेयर थी. वहीं, बाजरा का रकबा 13.06 लाख हेक्टेयर से घटकर 11.34 लाख हेक्टेयर, रागी 0.73 लाख हेक्टेयर से घटकर 0.66 लाख हेक्टेयर और मक्का 18.61 लाख हेक्टेयर से घटकर 15.71 लाख हेक्टेयर रह गया है.

2 से 3 दिनों में मॉनसून मध्य प्रदेश में पहुंच सकता है

मौसम विभाग के अनुसार, इसके बाद अगले 2 से 3 दिनों में मॉनसून मध्य प्रदेश के अन्य क्षेत्रों, हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर, लद्दाख, दक्षिण-पूर्वी राजस्थान और गुजरात के शेष इलाकों में भी पहुंचने की संभावना है. विशेषज्ञों का मानना है कि यदि मॉनसून की रफ्तार  बनी रहती है, तो खरीफ फसलों की बुवाई में तेजी आ सकती है और किसानों को राहत मिल सकती है.

 

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Published: 30 Jun, 2026 | 08:03 AM

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