अंगूर किसानों को राहत! बीमा दावे खारिज होने पर जांच के आदेश.. बारिश के आंकड़ों में गड़बड़ी का आरोप

महाराष्ट्र के सांगली में अंगूर किसानों के बीमा दावों को खारिज किए जाने के मामले की जांच के आदेश दिए गए हैं. किसानों का आरोप है कि बेमौसम बारिश से फसल को नुकसान हुआ, लेकिन निजी एजेंसी के वर्षा आंकड़ों के आधार पर मुआवजा नहीं दिया गया. RTI से मिले सरकारी आंकड़ों और निजी डेटा में बड़ा अंतर सामने आया है.

Kisan India
नोएडा | Published: 13 Jun, 2026 | 12:03 PM

Maharashtra Grape Farmers: महाराष्ट्र के अंगूर किसानों के लिए राहत भरी खबर है. कृषि मंत्री दत्तात्रय भरणे ने सांगली के अंगूर किसानों के बीमा दावों को खारिज किए जाने के मामले की जांच के आदेश दिए हैं. किसानों ने शिकायत की थी कि अप्रैल में हुई बेमौसम बारिश से फसल को नुकसान पहुंचा, लेकिन बीमा कंपनियों ने अलग-अलग वर्षा आंकड़ों का हवाला देकर मुआवजा देने से इनकार कर दिया.

द टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, इस मामले को गंभीरता से लेते हुए कृषि मंत्री ने पुणे स्थित कृषि आयुक्त कार्यालय को जांच करने का निर्देश दिया है. जांच में निजी एजेंसी द्वारा संचालित ऑटोमेटिक वेदर स्टेशनों (AWS) की भूमिका और बारिश के आंकड़ों  में कथित गड़बड़ियों की पड़ताल की जाएगी. सरकार का कहना है कि यदि किसानों के साथ अन्याय हुआ है तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी.

पूर्व सांसद का क्या है दावा

पूर्व सांसद संजयकाका पाटिल ने दावा किया कि किसानों ने सूचना का अधिकार (RTI) के तहत प्राप्त सरकारी आंकड़ों से पता लगाया है कि 22 अप्रैल को तासगांव तहसील के विसापुर और येलावी सर्किल में 60 मिमी से अधिक बारिश दर्ज की गई थी. अंगूर की फसल  के फूल आने के समय इतनी बारिश फसल को नुकसान पहुंचाने के लिए पर्याप्त मानी जाती है और ऐसे मामलों में किसानों को बीमा मुआवजा मिलना चाहिए.

उस दिन केवल 38 मिमी बारिश हुई

हालांकि, बीमा कंपनियों ने एक निजी एजेंसी के वर्षा आंकड़ों का इस्तेमाल करते हुए किसानों के दावे खारिज कर दिए. कंपनियों का कहना था कि उस दिन केवल करीब 38 मिमी बारिश हुई थी, जो मुआवजे के लिए तय सीमा से कम है. पाटिल ने सवाल उठाया कि एक ही दिन और एक ही क्षेत्र के लिए दो अलग-अलग एजेंसियों के वर्षा आंकड़ों में इतना बड़ा अंतर कैसे हो सकता है. उन्होंने कहा कि किसानों ने कृषि विभाग से आधिकारिक डेटा हासिल किया है, फिर भी बीमा कंपनियां निजी एजेंसी के आंकड़ों के आधार पर दावे खारिज कर रही हैं. उन्होंने कहा कि इस मुद्दे को कृषि मंत्री के सामने उठाया गया था, जिसके बाद अब मामले की जांच के आदेश दिए गए हैं.

बीमा दावों को अक्सर बड़ी संख्या में खारिज कर दिया जाता है

पूर्व सांसद संजयकाका पाटिल ने आरोप लगाया कि बागवानी फसलों, खासकर अंगूर की फसल से जुड़े बीमा दावों को अक्सर बड़ी संख्या में खारिज कर दिया जाता है, क्योंकि इन फसलों में मुआवजे की राशि अपेक्षाकृत अधिक होती है. उन्होंने कहा कि केवल तासगांव तहसील के दो सर्किलों में ही किसानों का नुकसान करीब 30 करोड़ रुपये आंका गया है. पाटिल के अनुसार, मामले की गहराई से जांच होनी चाहिए, ताकि यह पता चल सके कि किसानों को कितना नुकसान हुआ है और बीमा दावों को खारिज करने में कहीं कोई गड़बड़ी तो नहीं हुई.

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