बहुआ और दीघा आम को जीआई टैग मिलेगा, बिहार के सोनाचूर चावल और टिपिया धान को भी GI Tag
बिहार में दूधिया मालदा आम उत्पादक समिति से जुड़े किसानों ने जीआई टैग के लिए आवदेन दिया है. इस वर्ष दूधिया मालदा के 50 हजार अतिरिक्त पेड़ लगाने का लक्ष्य रखा गया. कृषि विश्वविद्यालय सबौर की मीठापुर स्थित शाखा जिसे कृषि अनुसंधान संस्थान मीठापुर के नाम से भी जानते हैं, इस प्रयास का नेतृत्व कर रहा है.
बिहार के कई कृषि उत्पादों को जीआई टैग दिलाने के लिए आवेदन किया गया है. इनमें दीघा का मालदा आम, बहुआ आम, सोनाचूर चावल और टिपिया धान को जीआई टैग दिलाने के लिए कृषि विभाग की ओर से जीआई टैग निबंधन कार्यालय को आवेदन भेजे गए हैं. जीआई टैग मिलते ही इन उत्पादों की अच्छी कीमत और बाजार मिलने का रास्ता साफ हो जाएगा. बता दे कि इससे पहले बिहार के जर्दालू आम, मर्चा धान को भी जीआई टैग मिल चुका है.
सोनाचूर चावल और टिपिया धान के लिए जीआई टैग आवेदन
बिहार के कृषि मंत्री राम कृपाल यादव ने बीते दिन फार्मर आईडी को लेकर मीडिया से बात कर रहे थे. इस दौरान उद्यान विभाग के कृषि निदेशक सौरभ सुमन यादव ने कहा कि दीघा के मालदा को जीआई टैग देने के लिए प्रस्ताव भेजा जाएगा. अधिकारियों ने बताया कि पटना में दीघा का दुधिया मालदा, शाहाबाद क्षेत्र का सोनाचूर चावल मुंगेर का टिपिया धान, समस्तीपुर के बहुआ आम को जीआई टैग के लिए भेजा गया है.
दूधिया मालदा आम उत्पादक समिति ने किया आवेदन
पटना के दूधिया मालदा को भौगोलिक संकेतक (जीआई) टैग दिलाने की तैयारी जोरशोर से की जा रही है. बिहार में दूधिया मालदा आम उत्पादक समिति से जुड़े किसानों ने जीआई टैग के लिए आवदेन दिया है. इस वर्ष दूधिया मालदा के 50 हजार अतिरिक्त पेड़ लगाने का लक्ष्य रखा गया. कृषि विश्वविद्यालय सबौर की मीठापुर स्थित शाखा जिसे कृषि अनुसंधान संस्थान मीठापुर के नाम से भी जानते हैं, इस प्रयास का नेतृत्व कर रहा है.
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जीआई टैग दिलाने की कागजी प्रक्रिया पूरी
मीठापुर स्थित कृषि अनुसंधान संस्थान के अधिकारियों ने कहा कि सिमट रही दूधिया मालदा प्रजाति के आम की खेती और बागान को जीवित रखने के साथ-साथ जीआई के लिए जरूरी वैज्ञानिक प्रमाणीकरण के लिए दस्तावेज जुटाने की दिशा में संस्थान काम कर रहा है. जीआई टैग दिलाने के लिए सारी कागजी प्रक्रिया लगभग पूरी हो गई है. अब जीआई टैग निबंधन के लिए राज्य सरकार से अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) मांगा गया है. एनओसी मिलने के साथ ही जीआई टैग के लिए चेन्नई स्थित जीआई कार्यालय में आवेदन किया जाएगा. दूसरी तरफ दूधिया मालदा उत्पादक किसानों ने जीआई निबंधन के लिए ‘पटना दूधिया मालदा आम उत्पादक समिति’ संगठन बनाया जा चुका है.
दूधिया मालदा के 50 हजार पौधे लगाएगा उद्यान विभाग
मीठापुर कृषि अनुसंधान संस्थान के अधिकारियों के अनुसार दीघा के दूधिया मालदा की 50 हजार पौधा संस्थान द्वारा तैयार करने का लक्ष्य है. 25 हजार पौधा तैयार हो चुका है. जबकि अगले डेढ़ दो महीने शेष 25 हजार दीघा दूधिया मालदा के पौधे तैयार हो जाएगा. उन्होंने बताया कि दीघा सहित पटनावासियों को दूधिया मालदा आम के पौधे लगाने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है. 1970 के दशक में पटना में दूधिया मालदा के पेड़ फतुहा से बिहटा तक गंगा तट से लेकर पुनपुन और दनियांव तक की पट्टी में फैले हुए थे. यहां कई बड़े-बड़े बागान थे. पटना व आसपास के शहरीकरण होने और जमीन की कीमत में इजाफा होने के कारण दूधिया मालदा आम के पौधे अपने उत्पादक क्षेत्र में सिमटते चले गए. अभी यह दीघा के कुछ इलाकों में ही यह आम का क्षेत्र सिमट गया है.
बिहार में इन कृषि उत्पादों को मिला है जीआई टैग
- शाही लीची मुजफ्फरपुर
- जर्दालु आम : भागलपुर
- मखाना दरभंगा
- सिलाव का खाजा नालंदा
- मगही पान नालंदा
- मधुबनी मर्चा चावल भागलपुर