ओडिशा के धान किसान परेशान, ऑनलाइन टोकन जारी होने में देरी.. मंडियों को लेकर भी शिकायतें

ओडिशा के किसानों को खरीफ सीजन में धान की खरीद में मंडियों के देर से खुलने और ऑनलाइन टोकन में समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है. बिना टोकन किसान MSP से कम दाम पर निजी व्यापारियों को धान बेचने को मजबूर हैं, जबकि राज्य सरकार खरीद की पूरी व्यवस्था तैयार होने का दावा कर रही है.

Kisan India
नोएडा | Published: 18 Jan, 2026 | 08:44 PM

Odisha News: ओडिशा के कई किसान इस खरीफ सीजन में धान की खरीद के लिए मंडियों के देर से खुलने और ऑनलाइन टोकन जारी करने में लगातार हो रही समस्याओं की वजह से बड़ी परेशानी झेल रहे हैं, जबकि राज्य सरकार लगातार कह रही है कि इस बार खरीद व्यवस्था पूरी तरह तैयार है. मुख्यमंत्री मोहन चरण मझी ने कहा था कि 10 जनवरी तक सभी जिलों में मंडियां खोल दी जाएंगी, ताकि किसानों की फसल आसानी से खरीदी जा सके और उन्हें मजबूरी में सस्ता नहीं बेचना पड़े. लेकिन जमीन पर कई जगह अभी तक खरीद केंद्र पूरी तरह काम नहीं कर रहे हैं, जिससे किसानों की कटाई हुई धान खेतों और आंगनों में पड़ा हुआ है.

किसानों ने कहा कि ऑनलाइन टोकन जारी करने में देरी ने उनकी परेशानी और बढ़ा दी है. छोटे और सीमांत किसान  बार-बार प्राथमिक कृषि सहकारी समितियों (PACS) और जिला आपूर्ति अधिकारियों के कार्यालयों में गए, लेकिन कोई हल नहीं मिला. कटक जिले के नरसिंहपुर ब्लॉक के बसंतपुर ग्राम पंचायत के किसान कमल लोचन साहू ने कहा कि मुझे दिसंबर से टोकन मिल गया है, लेकिन मेरी पंचायत की मंडी अभी तक खुली नहीं है. टोकन की वैधता खत्म होने वाली है, जब मैंने पूछना चाहा तो PACS के अधिकारियों ने कहा कि उन्हें जिला अधिकारियों से कोई निर्देश अभी तक नहीं मिला.

2,000 पंजीकृत किसान टोकन का इंतजार कर रहे हैं

किसान कमल साहू ने कहा कि बिना टोकन हम मंडी में धान नहीं बेच सकते. हमारी फसल खुले में पड़ी है और नमी और कीटों की वजह से खराब हो रही है. कौरापुट जिले के जेयपोर के एक किसान ने बताया कि लगभग 2,000 पंजीकृत किसान टोकन  का इंतजार कर रहे हैं, जबकि कई ने अपने धान पहले ही निजी व्यापारियों को बेच दिए हैं. जब उन्होंने CSO और DRCS से संपर्क किया, तो उन्हें बताया गया कि सैटेलाइट सर्वे और जमीन पर किए गए सत्यापन में कुछ अंतर है, जिसे वे अपने स्तर पर ठीक नहीं कर सकते.

गलती की संभावना बहुत कम है

कहा जा रहा है कि सैटेलाइट सर्वे  की जानकारी जमीन पर जाकर सत्यापित की जाती है, गलती की संभावना बहुत कम है. हमारे पास पूरी डॉक्यूमेंटेशन मौजूद है. शिकायत मिलने पर कलेक्टरों को फिर से जांच करने के निर्देश दिए गए हैं. मंडी देर से खुलने की वजह से किसान मजबूरी में निजी व्यापारियों को MSP से बहुत कम दाम पर धान बेचने को मजबूर हैं. जहां राज्य सरकार किसानों को प्रति क्विंटल 3,100 रुपये दे रही है, वहीं व्यापारी 1,500 से 1,800 रुपये प्रति क्विंटल पर खरीद रहे हैं.

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Published: 18 Jan, 2026 | 08:44 PM

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