ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने कहा कि राज्य में पिछले दो साल में 54 हजार करोड़ रुपये के जल ढांचे से जुड़े प्रोजेक्ट मंजूर किए गए हैं. इन परियोजनाओं से 3.2 लाख हेक्टेयर अतिरिक्त कृषि भूमि में सिंचाई की सुविधा विकसित हुई है. जल शक्ति मंत्रालय की ओर से आयोजित विभागीय बैठक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मौजूदगी में मुख्यमंत्री ने यह जानकारी दी. उन्होंने कहा कि ओडिशा की अर्थव्यवस्था में कृषि की बड़ी भूमिका है, इसलिए सरकार ने जल सुरक्षा और सिंचाई को प्राथमिकता दी है.
माझी ने कहा कि राज्य में 770 चेक डैम और 9 इन-स्ट्रीम स्टोरेज स्ट्रक्चर (ISS) पूरे किए गए हैं. इसके अलावा 1,312 पुराने चेक डैम का नवीनीकरण किया गया है. राज्य में एक बांध, एक बैराज, दो अंडरग्राउंड पाइपलाइन डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क, 6 मेगा लिफ्ट सिंचाई परियोजनाएं और 32 छोटी सिंचाई परियोजनाएं भी पूरी की गई हैं. ओडिशा सरकार अगले एक साल में 14 नए इन-स्ट्रीम स्टोरेज स्ट्रक्चर (ISS) और 6 मध्यम सिंचाई परियोजनाएं शुरू करने की तैयारी कर रही है. वहीं, 5 बड़ी और मध्यम सिंचाई परियोजनाओं, 58 मेगा लिफ्ट सिंचाई परियोजनाओं और 5 छोटी सिंचाई परियोजनाओं पर अभी काम चल रहा है.
‘छाता’ और ‘अरुआ’ योजनाओं से जल संरक्षण को बढ़ावा
मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने कहा कि ग्रामीण इलाकों में सिंचाई की सुविधा बढ़ाने के लिए राज्य में 3,224 कम्युनिटी लिफ्ट सिंचाई परियोजनाएं, 20,228 डीप बोरवेल और 8,917 सोलर पावर वाले डीप बोरवेल लगाए गए हैं. उन्होंने कहा कि ‘छाता’ योजना के तहत 20 हजार से ज्यादा रूफटॉप रेनवॉटर हार्वेस्टिंग प्रोजेक्ट पूरे किए जा चुके हैं. वहीं, भूजल स्तर सुधारने के लिए ‘अरुआ’ योजना के तहत 1,200 रिचार्ज शाफ्ट बनाए गए हैं.
2003-04 से अटकी कनुपुर परियोजना का बांध पूरा
सिंचाई व्यवस्था में किसानों की भागीदारी और पारदर्शिता बढ़ाने के लिए 40 हजार से ज्यादा पानी पंचायतों को भी मजबूत किया जा रहा है. सरकार का उद्देश्य सिंचाई प्रबंधन को ज्यादा प्रभावी बनाना और किसानों की भागीदारी बढ़ाना है. मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने बताया कि लंबे समय से अटकी कनुपुर सिंचाई परियोजना का बांध 31 अगस्त को पूरा हो गया. यह परियोजना 2003-04 से रुकी हुई थी. सरकार ने स्थानीय मां शालाबनी देवी के मंदिर को दूसरी जगह स्थानांतरित करने से जुड़ी समस्या का समाधान किया और भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) के साथ समन्वय कर परियोजना को पूरा कराया.
कनुपुर परियोजना की नहरें एक साल में होंगी पूरी
उन्होंने बताया कि केंद्रीय जल आयोग और IIT रुड़की की ओर से परियोजना में तकनीकी मदद भी दी गई. कनुपुर परियोजना की नहरों का काम अगले एक साल में पूरा होने की उम्मीद है. इसके बाद करीब 25 हजार हेक्टेयर कृषि भूमि को सिंचाई की सुविधा मिलेगी. माझी ने कहा कि जल प्रबंधन के क्षेत्र में बेहतर काम के लिए ओडिशा को पांचवें राष्ट्रीय जल पुरस्कारों में देश का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाला राज्य चुना गया है. बैठक में केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सीआर पाटिल, छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय, जल संसाधन मंत्री और कई राज्यों के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे.