‘वन नेशन, वन फर्टिलाइजर’ से खाद की सप्लाई मजबूत, जरूरत से ज्यादा रहा यूरिया का स्टॉक

केंद्र सरकार के मुताबिक, ‘वन नेशन, वन फर्टिलाइजर’ योजना से देश में सब्सिडी वाली खाद की सप्लाई और वितरण व्यवस्था बेहतर हुई है. खरीफ 2026 में यूरिया, डीएपी, एमओपी और एनपीकेएस की उपलब्धता जरूरत से अधिक रही. सरकार ने डिजिटल निगरानी और राज्यवार आवंटन के जरिए खाद की समय पर सप्लाई सुनिश्चित की है, जिससे किसानों को पर्याप्त खाद मिल रही है.

Kisan India
नोएडा | Updated On: 8 Aug, 2026 | 05:13 PM

केंद्र सरकार ने कहा है कि ‘वन नेशन, वन फर्टिलाइजर’ योजना से देशभर में सब्सिडी वाली खाद की उपलब्धता और वितरण व्यवस्था मजबूत हुई है. इससे खाद की समय पर सप्लाई, लॉजिस्टिक्स और किसानों तक खाद पहुंचाने की व्यवस्था में सुधार हुआ है. सरकार के मुताबिक, एक ही ब्रांड के तहत खाद मिलने से किसानों के लिए इसे खरीदना भी आसान हुआ है. वहीं, 1 अप्रैल से 29 जुलाई 2026 तक के आंकड़ों के मुताबिक, देश में प्रमुख उर्वरकों की उपलब्धता कुल जरूरत और वास्तविक बिक्री, दोनों से ज्यादा रही. इस दौरान देश में यूरिया की जरूरत 122.84 लाख मीट्रिक टन थी, जबकि उपलब्धता 177.27 लाख मीट्रिक टन रही.

खास बात यह है कि 1 अप्रैल से 29 जुलाई तक खाद की कुल बिक्री 112.53 लाख मीट्रिक टन हुई और 64.75 लाख मीट्रिक टन का स्टॉक बचा रहा. इसी तरह डीएपी की जरूरत 35.44 लाख मीट्रिक टन थी, जबकि उपलब्धता 43.03 लाख मीट्रिक टन रही. इस दौरान 26.59 लाख मीट्रिक टन डीएपी की बिक्री हुई और सीजन के अंत में 16.44 लाख मीट्रिक टन स्टॉक मौजूद था.

एमओपी और एनपीकेएस का भी पर्याप्त स्टॉक

वहीं, एमओपी की जरूरत 11.20 लाख मीट्रिक टन के मुकाबले उपलब्धता 14.31 लाख मीट्रिक टन रही. इसकी बिक्री 5.85 लाख मीट्रिक टन हुई और 8.47 लाख मीट्रिक टन स्टॉक बचा रहा. एनपीकेएस की जरूरत 53.99 लाख मीट्रिक टन थी, जबकि उपलब्धता 88.93 लाख मीट्रिक टन रही. इस दौरान 44.73 लाख मीट्रिक टन की बिक्री हुई और 44.19 लाख मीट्रिक टन का स्टॉक बचा रहा. ऐसे में सरकार के आंकड़ों से पता चलता है कि यूरिया, डीएपी, एमओपी  और एनपीकेएस सभी प्रमुख खादों का स्टॉक किसानों की जरूरत को पूरा करने के लिए पर्याप्त है.

‘भारत’ ब्रांड के तहत बिक रही सभी सब्सिडी वाली खाद

बता दें कि ‘वन नेशन, वन फर्टिलाइजर’ पहल प्रधानमंत्री भारतीय जनउर्वरक परियोजना (PMBJP) के तहत 24 अगस्त 2022 से लागू की गई थी. इसके तहत सरकारी, सहकारी और निजी क्षेत्र की सभी खाद कंपनियों को सब्सिडी वाली खाद की बिक्री ‘भारत’ (BHARAT) ब्रांड के नाम से करना अनिवार्य है. फिलहाल यूरिया, डीएपी, एमओपी और एनपीकेएस समेत सभी प्रमुख सब्सिडी वाली खाद ‘भारत’ ब्रांड के तहत बेची जा रही हैं. सरकार का कहना है कि इस योजना का मकसद बाजार में अलग-अलग ब्रांड की खाद को लेकर किसानों के बीच होने वाली उलझन को दूर करना है. साथ ही, इसका उद्देश्य देश के सभी राज्यों में किसानों को सब्सिडी वाली खाद की समान और आसान उपलब्धता सुनिश्चित करना है.

खाद की कालाबाजारी पर लगाम, सप्लाई व्यवस्था मजबूत

इससे खाद की कालाबाजारी और दूसरी गड़बड़ियों को कम करने में मदद मिली है. साथ ही, राज्यों के बीच खाद की अनावश्यक आवाजाही कम हुई है और खेती के अहम सीजन में समय पर खाद उपलब्ध कराना आसान हुआ है. सरकार ने कहा कि खाद की पर्याप्त सप्लाई बनाए रखने के लिए एक मजबूत आपूर्ति और वितरण व्यवस्था तैयार की गई है. हर फसल सीजन शुरू होने से पहले कृषि एवं किसान कल्याण विभाग, राज्य सरकारों के साथ मिलकर यह आकलन करता है कि अलग-अलग राज्यों को हर महीने कितनी खाद की जरूरत होगी.

iFMS से खाद की सप्लाई पर रियल टाइम नजर

सरकार ने खाद की आवाजाही पर नजर रखने के लिए इंटीग्रेटेड फर्टिलाइजर मैनेजमेंट सिस्टम (iFMS) को भी मजबूत किया है. यह एक वेब आधारित डिजिटल प्लेटफॉर्म है, जिसके जरिए सब्सिडी वाली प्रमुख खादों की सप्लाई चेन  में आवाजाही को ट्रैक किया जाता है. इस सिस्टम से सरकार को खाद की उपलब्धता पर रियल टाइम नजर रखने में मदद मिलती है. किसी इलाके में सप्लाई से जुड़ी समस्या सामने आने पर संबंधित विभाग उस पर तेजी से कार्रवाई कर सकता है.

 

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Published: 8 Aug, 2026 | 05:12 PM

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