आगामी बजट सत्र में पेश हो सकता है बीज विधेयक बिल 2026.. इस तरह के होंगे सख्त प्रावधान

केंद्र सरकार ने बीज विधेयक 2026 को अंतिम रूप दिया है. इसका उद्देश्य किसानों को उच्च गुणवत्ता वाले बीज उपलब्ध कराना, नकली बीज की बिक्री रोकना और बीज आपूर्ति में पारदर्शिता सुनिश्चित करना है. विधेयक में पंजीकरण, जुर्माने, मामूली अपराधों की गैर-फौजदारी और आयात नियंत्रण जैसे मुख्य प्रावधान शामिल हैं.

Kisan India
नोएडा | Updated On: 12 Jan, 2026 | 01:27 PM

Seed Bill: केंद्र सरकार ने बीज विधेयक, 2026 को अंतिम रूप दे दिया है और इसे आगामी बजट सत्र में लोकसभा में पेश करने की योजना है. कहा जा रहा है कि  नवंबर 2025 में जनता की राय के लिए साझा किए गए ड्राफ्ट में बड़े बदलाव की संभावना नहीं है. वर्तमान में लागू बीज अधिनियम, 1966 1968-69 में लागू हुआ था और इसका अंतिम संशोधन 1972 में किया गया, हालांकि समय-समय पर बीज नियंत्रण आदेश में बदलाव होते रहे. पहले कई बार नया बीज कानून लाने की कोशिश की गई, लेकिन राजनीतिक दलों में सहमति और किसान संगठनों के विरोध के कारण यह पारित नहीं हो पाया.

बिजनेसलाइन की रिपोर्ट के मुताबिक, कृषि मंत्री ने पिछली संसद सत्र में विधेयक पेश करने की बात कही थी, लेकिन यह संभव नहीं हो सका. सरकार के अनुसार यह विधेयक बीज और रोपण सामग्री की गुणवत्ता को नियंत्रित करेगा. यह किसानों को उच्च गुणवत्ता वाले बीज सस्ती दरों पर उपलब्ध कराएगा. नकली और खराब बीज  की बिक्री रोकी जाएगी. किसानों को नुकसान से बचाया जाएगा. साथ ही वैश्विक किस्मों तक पहुंच बढ़ेगी. बीज आपूर्ति में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित होगी.

बिल का उद्देश्य धोखाधड़ी रोकना है

साथ ही सरकार बीज विधेयक को मांग होने पर संसदीय समिति को भेजने पर विचार कर सकती है. जबकि नए ग्रामीण रोजगार कानून VB-G RAM G Act को दोनों सदनों में जल्दी पास करके तुरंत राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद लागू कर दिया गया था. ड्राफ्ट विधेयक में सबसे विवादित प्रावधान बीज बेचने के लिए निर्माताओं के पंजीकरण को अनिवार्य करने का है. सरकार का कहना है कि इसका उद्देश्य धोखाधड़ी  रोकना है, क्योंकि कुछ लोग मंडियों से सामान्य फसल खरीदकर उसे बीज के रूप में लेबलिंग करके बेचते हैं. आलोचकों का कहना है कि इससे छोटे कारोबारियों का बाजार खत्म हो जाएगा और बीज उद्योग बड़े कंपनियों के हाथ में चला जाएगा.

30 लाख रुपये तक लग सकता है जुर्माना

विधेयक में पंजीकरण से लेकर किसानों को सत्यापित और गुणवत्तापूर्ण बीज उपलब्ध  कराने तक कई सुधार किए गए हैं. नकली बीज की बिक्री पर नियंत्रण रहेगा. छोटे मामलों में जुर्माना 50,000 रुपये और बड़े या दोहराए गए मामलों में 30 लाख रुपये तक होगा. मामूली अपराधों को अब अपराध नहीं माना जाएगा. ड्राफ्ट विधेयक में छोटे अपराधों को गैर-फौजदारी (decriminalise) कर दिया गया है, जिससे व्यापार में आसानी बढ़ेगी और नियमों का बोझ कम होगा, जबकि गंभीर उल्लंघनों पर कड़े जुर्माने की व्यवस्था बनी रहेगी. विधेयक के अनुसार, किसी भी अपराध की जांच केवल सेड इंस्पेक्टर की शिकायत पर ही की जाएगी.

जुर्माने बहुत कठोर होंगे

कृषि मंत्रालय लंबे समय से नकली और घटिया बीजों के खिलाफ बोल रहा है, लेकिन डर था कि जुर्माने बहुत कठोर होंगे. विशेषज्ञों के अनुसार, विधेयक में कोई अत्यधिक कठोर प्रावधान नहीं है और ‘नकली बीज’ शब्द का इस्तेमाल नहीं किया गया है. यदि कोई कृत्रिम सामग्री बीज के रूप में किसानों को बेची जाती है, तो वह विधेयक की पहुंच से बाहर रह सकती है.

गंभीर अपराध माना जाएगा

कंपनियों/फर्मों के लिए जो घटिया बीज सप्लाई करती हैं, उन्हें गंभीर अपराध माना जाएगा, लेकिन खुद रिटेलर पर जिम्मेदारी नहीं होगी. गैर-पंजीकृत बीज किस्मों की आपूर्ति करने वालों और बिना डीलर/विक्रेता/उत्पादक पंजीकरण वाले कारोबारियों को भी बड़े अपराध में शामिल किया गया है. ‘Spurious seed’ को परिभाषित किया गया है- किसी बीज में प्रकार और गुण नहीं मिलते या आनुवंशिक शुद्धता का न्यूनतम स्तर पूरा नहीं होता.

बीज आयात को नियंत्रित करने का प्रावधान

विधेयक में पहली बार बीज आयात को नियंत्रित करने का प्रावधान है. पिछले राष्ट्रीय बीज नीति, 2002 ने सभी बीज और रोपण सामग्री का मुक्त आयात अनुमति दी थी. अब प्रस्तावित कानून के तहत विदेशी संस्थाओं को Value for Cultivation and Use (VCU) परीक्षण के लिए मान्यता दी जा सकती है, जबकि कंपनियों को इसमें शामिल नहीं किया जाएगा. धारा 27 के अनुसार, केवल भारत द्वारा मान्यता प्राप्त एजेंसी से प्रमाणित बीजों का ही आयात अनुमति पाएगा, जिससे आयात पर नियंत्रण रहेगा. हालांकि, किसानों के संगठन विधेयक की आलोचना कर रहे हैं और इसे लेकर असंतोष जताया गया है.

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Published: 12 Jan, 2026 | 01:24 PM

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