हरियाणा में कथित 5000 करोड़ के धान घोटाले के खिलाफ किसानों का प्रदर्शन, ADC को सौंपा ज्ञापन

हरियाणा में BKU चढूनी ने कथित 5,000 करोड़ रुपये के धान घोटाले के खिलाफ प्रदर्शन किया और सीबीआई जांच की मांग की. ज्ञापनों में किसानों और जनता की समस्याओं जैसे स्वास्थ्य, शिक्षा और कृषि संकट को उजागर किया गया. कर्ज माफी, MSP गारंटी और नकली बीज रोकने की भी मांग शामिल है.

Kisan India
नोएडा | Published: 11 Jan, 2026 | 10:58 AM

Haryana News: भारतीय किसान यूनियन (BKU) चढूनी ने कुरुक्षेत्र में हरियाणा में कथित करोड़ों रुपये के धान घोटाले के खिलाफ प्रदर्शन किया और सीबीआई से जांच की मांग की. किसानों ने हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के नाम कुरुक्षेत्र के ADC विवेक आर्य को एक विस्तृत ज्ञापन सौंपा, जिसमें 2025- 26 के धान खरीदी सत्र में कथित 5,000 करोड़ रुपये से अधिक के बड़े पैमाने पर गड़बड़ी और संभावित घोटाले की जांच की मांग की गई. ADC ने ज्ञापन प्राप्त करते हुए किसानों को कानून के अनुसार पूरी जांच और कार्रवाई का आश्वासन दिया.

द टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, BKU चढूनी ने एक और ज्ञापन भी सौंपा, जिसमें जनता और किसानों की चिंताओं को उजागर किया गया. शिकायत में मेरि फसल मेरा ब्यौरा (MFMB) पोर्टल, सत्यापन प्रक्रियाओं और राज्य की खरीदी एजेंसियों, मंडी प्रशासन और कृषि एवं किसान कल्याण विभाग द्वारा किए गए संचालन में गंभीर गड़बड़ियों और धोखाधड़ी का आरोप लगाया गया है. ज्ञापन के अनुसार इन गड़बड़ियों से राज्य और केंद्र दोनों को भारी राजस्व नुकसान हुआ और किसानों के अधिकारों का गंभीर उल्लंघन हुआ.

ज्ञापन में इन समस्याओं को उठाया गया

शिकायतकर्ता ने हरियाणा सरकार से कहा कि केवल एक स्वतंत्र और बाहरी एजेंसी, जैसे सीबीआई, ही पूरे कथित घोटाले की जिम्मेदारी तय कर सकती है और इसका वास्तविक आकार सामने ला सकती है. हरियाणा के मुख्यमंत्री को भेजे गए दूसरे ज्ञापन में आम जनता और किसानों की समस्याओं को उजागर किया गया है और सरकार से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की गई है. इसमें बढ़ती महंगाई और स्वास्थ्य, शिक्षा व कृषि क्षेत्रों की प्रणालीगत समस्याओं का जिक्र किया गया है, जो लोगों की जिंदगी को कठिन बना रही हैं. स्वास्थ्य क्षेत्र में कथित रूप से unchecked commercialization की शिकायत की गई है, जिसमें निजी और मल्टीनेशनल अस्पताल मरीजों से मनमाने तरीके से शुल्क वसूलते हैं, क्योंकि इलाज की दरें नियंत्रित नहीं हैं. इसके अलावा, दवाइयां ऊंचे एमआरपी पर बेची जा रही हैं, जबकि सरकारी अस्पतालों में डॉक्टर, दवाइयां और जांच सुविधाओं की कमी है.

गुणवत्ता युक्त स्वास्थ्य सेवाओं की मांग की गई

ज्ञापन में सस्ती, सुलभ और गुणवत्ता युक्त स्वास्थ्य सेवाओं की मांग की गई है. शिक्षा के मामले में इसमें निजी स्कूलों और कॉलेजों में बढ़ती व्यावसायिकता पर चिंता जताई गई है. बार-बार किताबें बदलना और तय विक्रेताओं से यूनिफॉर्म, बैग, जूते और पढ़ाई का सामान खरीदना अभिभावकों पर आर्थिक बोझ डाल रहा है. ज्ञापन में निजी शिक्षण संस्थानों को नियंत्रित करने और बढ़ती फीस पर रोक लगाने की अपील की गई है ताकि गरीब और मध्यम वर्ग के बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिल सके.

बढ़ती इनपुट लागत से किसानों को हो रहा नुकसान

कृषि के संबंध में ज्ञापन में कहा गया है कि किसानों पर बढ़ती इनपुट लागत और उचित फसल मूल्य न मिलने के कारण भारी कर्ज का बोझ है. इसमें पूरी तरह से कृषि कर्ज माफी, ठोस ऋण राहत नीति और सभी फसलों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) की कानूनी गारंटी देने की मांग की गई है. इसके अलावा, बीज बिल की समीक्षा, नकली बीजों पर सख्त कार्रवाई, जुर्माने में वृद्धि और कृषि अनुसंधान के लिए अधिक धनराशि देने की भी मांग की गई है. ज्ञापन में हरियाणा के लोगों को राहत दिलाने के लिए जल्द कार्रवाई करने का आग्रह किया गया है.

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