केंद्र सरकार की ओर से बफर स्टॉक का प्याज 35 रुपये प्रति किलो की दर से बेचने के बावजूद प्याज की कीमतों में जल्द बड़ी गिरावट की उम्मीद नहीं है. इसकी मुख्य वजह कर्नाटक में इस साल खरीफ प्याज की खेती का रकबा कम होना है. खेती का रकबा घटने से आने वाले दिनों में प्याज की सप्लाई पर असर पड़ सकता है, जिससे कीमतों में तेजी बनी रहने की आशंका है. उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक, देश में प्याज का खुदरा भाव इस समय 23 से 87 रुपये प्रति किलो के बीच है. इसका औसत भाव करीब 50 रुपये प्रति किलो है. एक महीने पहले प्याज का औसत भाव 35 रुपये प्रति किलो था.
प्याज विशेषज्ञ और नेशनल हॉर्टिकल्चरल रिसर्च एंड डेवलपमेंट फाउंडेशन (NHRDF) के पूर्व अतिरिक्त निदेशक सतीश भोंडे ने अंग्रेजी अखबार बिजनेसलाइन से कहा कि इस खरीफ सीजन में प्याज की खेती कम होने से अगले साल रबी की फसल बाजार में आने तक सप्लाई की कमी रह सकती है. उन्होंने कहा कि आमतौर पर रबी सीजन में पैदा होने वाला प्याज ज्यादा समय तक सुरक्षित रखा जा सकता है. यही प्याज दिवाली तक बाजार की मांग को पूरा करता है. इसके बाद खरीफ सीजन का प्याज बाजार में आना शुरू होता है. भोंडे के मुताबिक, पर्याप्त बारिश नहीं होने के कारण इस साल प्याज की बुवाई और रोपाई में भी देरी हुई है. इसका असर अब बाजार में दिखाई दे रहा है. प्याज का थोक भाव बढ़कर करीब 40 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गया है.
खरीफ प्याज का रकबा 37 फीसदी घटा
इस साल खरीफ सीजन में प्याज की खेती का रकबा काफी कम हो गया है. अब तक देश में करीब 1.30 लाख हेक्टेयर में खरीफ प्याज की बुवाई हुई है, जबकि पिछले साल इसी अवधि में यह आंकड़ा 2.06 लाख हेक्टेयर था. यानी खेती का रकबा करीब 37 फीसदी घट गया है. कहा जा रहा है कि महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश में प्याज की खेती का रकबा पिछले साल के आसपास ही बना हुआ है. महाराष्ट्र में करीब 30,000 हेक्टेयर और मध्य प्रदेश में करीब 12,000 हेक्टेयर में प्याज की खेती हुई है. सबसे बड़ी गिरावट कर्नाटक में देखने को मिली है.
कर्नाटक में प्याज की खेती 22 हजार हेक्टेयर घटी
कर्नाटक में इस साल अब तक करीब 68,000 हेक्टेयर में प्याज की खेती हुई है, जबकि पिछले साल यह रकबा 90,000 हेक्टेयर था. यानी यहां करीब 22,000 हेक्टेयर की कमी आई है. किसानों के मुताबिक, इसका मुख्य कारण पानी की कमी है. राज्य सरकार पहले ही 239 में से 101 तालुकों में सूखा घोषित कर चुकी है. आने वाले दिनों में इसमें और इलाके जुड़ सकते हैं.
राजस्थान में लेट खरीफ प्याज की बुवाई जल्द
वहीं, राजस्थान में लेट खरीफ प्याज की बुवाई जल्द शुरू होने की उम्मीद है, जो अक्टूबर के पहले सप्ताह तक चल सकती है. किसानों ने खरीफ सीजन में बुवाई नहीं की थी. पिछले साल राजस्थान में खरीफ और लेट खरीफ मिलाकर करीब 29,500 हेक्टेयर में प्याज की खेती हुई थी. इस साल प्याज के ऊंचे भाव को देखते हुए यह रकबा बढ़कर 40,000 हेक्टेयर तक पहुंच सकता है.
अप्रैल-जून में प्याज निर्यात थोड़ा बढ़ा
वित्त वर्ष 2025-26 में प्याज की खेती का रकबा थोड़ा बढ़कर 20.14 लाख हेक्टेयर हो गया था, जबकि इससे पिछले साल यह 19.68 लाख हेक्टेयर था. हालांकि, इस दौरान प्याज का उत्पादन लगभग स्थिर रहा. 2025-26 में उत्पादन करीब 3.074 करोड़ टन रहा. वहीं, चालू वित्त वर्ष में अप्रैल से जून के बीच देश से 3.71 लाख टन प्याज का निर्यात हुआ, जिसकी कीमत करीब 8.21 करोड़ डॉलर रही. पिछले साल इसी अवधि में 3.63 लाख टन प्याज का निर्यात हुआ था, जिसकी कीमत 9.31 करोड़ डॉलर थी. हालांकि, सरकारी अधिकारियों का कहना है कि मौजूदा कीमतों में तेजी की वजह ज्यादा निर्यात नहीं है. अधिकारियों के मुताबिक, देश में प्याज की पर्याप्त उपलब्धता है.