सिर्फ इस चीज से करें धान के बीज का शोधन, नहीं लगेगा रोग.. होगी बंपर पैदावार

धान की बुवाई से पहले बीज का सही शोधन करना बेहद जरूरी माना जाता है. विशेषज्ञों के अनुसार नमक वाले पानी से खराब बीज आसानी से अलग किए जा सकते हैं. इससे फसल में लगने वाली कई बीमारियों का खतरा कम होता है और पौधे मजबूत बनते हैं. सही तरीके अपनाकर किसान कम खर्च में बेहतर उत्पादन हासिल कर सकते हैं.

नोएडा | Updated On: 16 May, 2026 | 07:25 PM

Paddy Farming: धान की खेती शुरू होते ही किसानों की सबसे बड़ी चिंता फसल में लगने वाली बीमारियां होती हैं. कई बार किसान अच्छे बीज खरीदने के बाद भी सही उत्पादन नहीं ले पाते, क्योंकि बीज का सही तरीके से शोधन नहीं किया जाता. बीज में मौजूद खराब दाने और फफूंदी बाद में पूरी फसल को नुकसान पहुंचा सकते हैं. ऐसे में कृषि विशेषज्ञ किसानों को धान की बुवाई से पहले बीज शोधन करने की सलाह दे रहे हैं. खास बात यह है कि इसके लिए किसी महंगी तकनीक की जरूरत नहीं होती. घर में इस्तेमाल होने वाला साधारण नमक भी बीज को साफ और स्वस्थ बनाने में मदद कर सकता है.

नमक के पानी से आसानी से करें बीज शोधन

विशेषज्ञों के अनुसार धान के बीज  को नमक वाले पानी में डालकर आसानी से शुद्ध किया जा सकता है. इसके लिए किसानों को 10 लीटर पानी में लगभग 200 ग्राम नमक मिलाना होता है. इसके बाद धान के बीज को इस पानी में डालकर अच्छी तरह हिलाना चाहिए. कुछ देर बाद खराब और हल्के बीज ऊपर तैरने लगते हैं, जबकि अच्छे और स्वस्थ बीज नीचे बैठ जाते हैं. ऊपर तैरने वाले बीजों को अलग करके गड्ढे में दबा देना चाहिए. नीचे बैठे बीज ही बुवाई के लिए सही माने जाते हैं. विशेषज्ञों का कहना है कि किसान डली वाला नमक, सेंधा नमक या साधारण नमक का इस्तेमाल कर सकते हैं. इस तरीके से कम खर्च में बड़ी मात्रा में बीज को साफ किया जा सकता है.

खराब बीज हटाने से कम होती हैं फसल की बीमारियां

धान की फसल में कई बीमारियां बीज और मिट्टी  के जरिए फैलती हैं. अगर खराब बीज खेत में चला जाए, तो पौधे कमजोर हो जाते हैं और बाद में पूरी फसल प्रभावित हो सकती है. नमक वाले पानी से बीज शोधन करने पर कमजोर और रोगग्रस्त बीज अलग हो जाते हैं. इससे पौध मजबूत बनती है और शुरुआती अवस्था में बीमारी लगने का खतरा कम हो जाता है. विशेषज्ञों के मुताबिक इस प्रक्रिया से धान में लगने वाली कई फफूंदी और जमीन से जुड़ी बीमारियों से राहत मिल सकती है. इससे पौधों की बढ़वार बेहतर होती है और उत्पादन पर भी अच्छा असर पड़ता है.

फफूंदनाशी दवा का इस्तेमाल भी है जरूरी

विशेषज्ञ किसानों को सलाह दे रहे हैं कि नमक वाले पानी के साथ फफूंदनाशी दवा  का इस्तेमाल भी करना चाहिए. इसके लिए प्रति लीटर पानी में 2 ग्राम कार्बेंडाजिम और मैनकोजेब मिलाया जा सकता है. इन दवाओं को मिलाकर बीज को लगभग 24 घंटे तक पानी में छोड़ देना चाहिए. इसके बाद बीज को निकालकर सुखाने के बाद बुवाई करनी चाहिए. इस प्रक्रिया से बीज कई तरह की फफूंदी और मिट्टी से फैलने वाली बीमारियों से सुरक्षित रहता है. इससे पौधे स्वस्थ निकलते हैं और बाद में फसल को कम नुकसान होता है.

कम खर्च में बेहतर उत्पादन पाने का आसान तरीका

धान की खेती में बीज शोधन  को सबसे जरूरी शुरुआती प्रक्रिया माना जाता है. अगर किसान बुवाई से पहले यह छोटा सा काम सही तरीके से कर लें, तो बाद में दवा और इलाज पर होने वाला खर्च काफी कम हो सकता है. विशेषज्ञों का कहना है कि स्वस्थ बीज से पौधे मजबूत बनते हैं, खेत में समान बढ़वार होती है और उत्पादन भी बेहतर मिलता है. यही वजह है कि किसानों को हर साल धान की बुवाई से पहले बीज शोधन जरूर करना चाहिए. कम लागत में किया गया यह उपाय किसानों की फसल को लंबे समय तक सुरक्षित रखने में मदद कर सकता है और अच्छी पैदावार दिलाने में भी बड़ा रोल निभा सकता है.

Published: 16 May, 2026 | 08:00 PM

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