‘बीमार’ खेतों के इलाज का अभियान हुआ शुरू, रायसेन में बोले शिवराज- मिट्टी बचेगी, तभी खेती बचेगी

शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि हरेक किसान का सॉयल हेल्थ कार्ड बनना जरूरी है, ताकि वह अपनी भूमि की वास्तविक जरूरत को समझकर उर्वरकों का उपयोग कर सके. इससे खेती की लागत घटेगी, उत्पादन में वृद्धि होगी और मिट्टी की उत्पादकता लंबे समय तक बनी रहेगी.

Kisan India
नोएडा | Published: 1 Jun, 2026 | 03:07 PM

हमारे खेत बीमार हैं. हमारे खेतों की मिट्टी बीमार है. यह खेत बीमार होंगे, तो देश बीमार होगा. इसीलिए अब बात हो रही है खेती की सेहत सुधारने की. इसी सिलसिले में एक महीने का अभियान शुरू हुआ है, जिसका शुभारंभ केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने किया. अपने गृह राज्य मध्य प्रदेश के रायसेन में रमासिया गांव से उन्होंने अभियान की शुरुआत की. अभियान शुरू करते हुए उन्होंने किसानों को साफ संदेश दिया कि मिट्टी बचेगी तो खेती बचेगी, किसान मजबूत होगा और देश समृद्ध बनेगा. उन्होंने संतुलित उर्वरक उपयोग, मिट्टी परीक्षण, सॉयल हेल्थ कार्ड, प्राकृतिक खेती, जल संरक्षण और वैज्ञानिक कृषि पद्धतियों को बढ़ावा देने का आह्वान किया.

1 जून से 30 जून तक देशभर में चलने वाले इस अभियान के शुभारंभ अवसर पर केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि धरती हमारी माता है और उसकी सेहत की रक्षा करना हम सभी का दायित्व है. उन्होंने किसानों से आग्रह किया कि वे रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों का अंधाधुंध उपयोग करने के बजाय मिट्टी की जांच के आधार पर आवश्यकता अनुसार ही खाद का प्रयोग करें. उन्होंने कहा कि रासायनिक पदार्थों के अत्यधिक उपयोग से मिट्टी की उर्वरता कम होती है और उसमें मौजूद लाभकारी सूक्ष्म जीव नष्ट हो जाते हैं, जिससे उत्पादन क्षमता प्रभावित होती है और खेती की लागत भी बढ़ती है.

केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि ‘खेत बचाओ अभियान’ केवल एक सरकारी कार्यक्रम नहीं, बल्कि धरती माता के संरक्षण का राष्ट्रीय संकल्प है. उन्होंने बताया कि इस अभियान के तहत कृषि वैज्ञानिक, कृषि विश्वविद्यालयों के विशेषज्ञ, कृषि विज्ञान केंद्रों के अधिकारी, कृषि विभाग की टीमें तथा जनप्रतिनिधि गांवगांव जाकर किसानों को जागरूक करेंगे. किसानों को मिट्टी परीक्षण, संतुलित पोषण प्रबंधन, प्राकृतिक खेती, आधुनिक बुवाई तकनीक, जल संरक्षण और उन्नत कृषि पद्धतियों की जानकारी दी जाएगी.

हर किसान के लिए सॉयल हेल्थ कार्ड जरूरी

उन्होंने कहा कि हरेक किसान का सॉयल हेल्थ कार्ड बनना जरूरी है, ताकि वह अपनी भूमि की वास्तविक जरूरत को समझकर उर्वरकों का उपयोग कर सके. इससे खेती की लागत घटेगी, उत्पादन में वृद्धि होगी और मिट्टी की उत्पादकता लंबे समय तक बनी रहेगी. चौहान ने स्पष्ट किया कि सरकार किसानों को रियायती दरों पर उर्वरक उपलब्ध करा रही है, लेकिन इसका अर्थ यह नहीं है कि उनका आवश्यकता से अधिक उपयोग किया जाए. उन्होंने कहा कि संतुलित मात्रा में उर्वरकों का प्रयोग ही टिकाऊ और लाभकारी खेती का आधार है.

चौहान ने कहा कि खेती को अधिक लाभकारी और टिकाऊ बनाना केंद्र सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है. उन्होंने जानकारी दी कि सोयाबीन, धान और दलहन फसलों के लिए विभिन्न क्षेत्रों में विशेष प्रदर्शन आयोजित किए जाएंगे. किसानों को उन्नत बीज, वैज्ञानिक बुवाई तकनीक, लेजर लेवलर जैसी आधुनिक कृषि तकनीकों तथा जल संरक्षण आधारित खेती के तरीकों से परिचित कराया जाएगा. कृषि विज्ञान केंद्रों और विशेषज्ञ संस्थानों के सहयोग से नियमित प्रशिक्षण कार्यक्रम भी संचालित किए जाएंगे.

महिलाओं के लिए इस अभियान में विशेष व्यवस्था

केंद्रीय मंत्री ने महिला सशक्तिकरण को भी इस अभियान का महत्वपूर्ण हिस्सा बताया. उन्होंने कहा कि स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से महिलाओं को रोजगार, आय संवर्धन और स्वरोजगार के अवसरों से जोड़ा जाएगा. पात्र महिलाओं को समूहों से जोड़कर उन्हें प्रशिक्षण, वित्तीय सहायता और छोटे उद्यम स्थापित करने के अवसर प्रदान किए जाएंगे, जिससे वे आत्मनिर्भर बन सकें और परिवार की आय में योगदान दे सकें.

युवाओं के संदर्भ में भी श्री चौहान ने विशेष जोर दिया. उन्होंने कहा कि युवाओं के लिए मार्गदर्शन, प्रशिक्षण और तैयारी के अवसरों का विस्तार किया जाएगा. उनके अनुसार ग्रामीण विकास केवल सड़क, आवास और अन्य बुनियादी सुविधाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि गांवों में रोजगार, आय वृद्धि और आत्मनिर्भरता के नए अवसर सृजित करना भी उतना ही महत्वपूर्ण है.

अधिकारियों को नियमित रूप से गांवों का दौरा करने के निर्देश

शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि रमासिया गांव से शुरू हुआ यह अभियान आगे चलकर जनभागीदारी का व्यापक आंदोलन बनेगा. उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि वे नियमित रूप से गांवों का दौरा करें, किसानों को तकनीकी सहायता उपलब्ध कराएं और खेती को बचाने के इस संकल्प को धरातल पर प्रभावी ढंग से लागू करें. उन्होंने किसानों, महिलाओं और युवाओं से विकास अभियानों में सक्रिय भागीदारी का आह्वान करते हुए कहा कि सरकार और समाज के सामूहिक प्रयासों से ही समृद्ध गांव, सशक्त किसान, आत्मनिर्भर महिलाएं और उज्ज्वल भविष्य का निर्माण संभव है.

उन्होंने बताया कि किसानों को उनके क्षेत्र की एग्रोक्लाइमैटिक परिस्थितियों के अनुरूप उपयुक्त फसलों, बेहतर बीजों, कृषि प्रणाली, बीज उपचार तकनीकों और अन्य वैज्ञानिक उपायों की जानकारी भी दी जाएगी. इसके साथ ही हरित खाद के महत्व पर विशेष जोर दिया जाएगा, क्योंकि मिट्टी की सेहत बनाए रखने में इसकी महत्वपूर्ण भूमिका है. अभियान के माध्यम से किसानों को केंद्र और राज्य सरकार की विभिन्न कृषि एवं ग्रामीण विकास योजनाओं की जानकारी देकर उनका लाभ भी दिलाया जाएगा.

 

 

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