तमिलनाडु कृषि विश्वविद्यालय (TNAU) ने काले तिल की कीमत को लेकर नया अनुमान जारी किया है. विश्वविद्यालय के मुताबिक, इस साल फसल के सीजन में अच्छी क्वालिटी के काले तिल का भाव 140 से 145 रुपये प्रति किलो रह सकता है. TNAU के सेंटर फॉर एग्रीकल्चरल एंड रूरल डेवलपमेंट स्टडीज (CARDS) के घरेलू और निर्यात बाजार खुफिया सेल (DEMIC) ने यह पूर्वानुमान तैयार किया है. इसके लिए इरोड जिले के सिवागिरी रेगुलेटेड मार्केट में पिछले 25 वर्षों के तिल के भाव का अध्ययन किया गया.
भारत तिल का सबसे बड़ा उत्पादक और निर्यातक
भारत दुनिया में तिल का सबसे बड़ा उत्पादक और निर्यातक है. साल 2024 में दुनिया में करीब 67 लाख टन तिल का उत्पादन हुआ था. इसमें भारत की हिस्सेदारी करीब 8.7 लाख टन यानी 12.93 फीसदी थी. इसके बाद म्यांमार और सूडान का स्थान रहा. भारत से तिल के प्रमुख खरीदारों में दक्षिण कोरिया, अमेरिका और रूस शामिल हैं. ये देश भारत से बड़ी मात्रा में तिल का आयात करते हैं.
पश्चिम बंगाल से तमिलनाडु तक तिल की खेती
भारत में तिल की खेती खरीफ और रबी दोनों सीजन में होती है. तिल से खाद्य तेल के साथ-साथ कई पोषक तत्व मिलते हैं. 2025-26 के दूसरे अग्रिम अनुमान के मुताबिक, देश में करीब 9.90 लाख हेक्टेयर में तिल की खेती हुई है. इससे करीब 3.66 लाख टन उत्पादन का अनुमान है. प्रति हेक्टेयर औसत उत्पादकता 369 किलो रही. पश्चिम बंगाल, गुजरात, मध्य प्रदेश, राजस्थान, उत्तर प्रदेश और तमिलनाडु देश के प्रमुख तिल उत्पादक राज्य हैं.
तमिलनाडु में 47 हजार हेक्टेयर में तिल की खेती
तमिलनाडु में 2024-25 के दौरान करीब 47 हजार हेक्टेयर में तिल की खेती हुई और लगभग 34 हजार टन उत्पादन हुआ. राज्य में तिल की उत्पादकता 428 किलो प्रति हेक्टेयर रही. कल्लाकुरिची, इरोड, कुड्डालोर, तिरुचिरापल्ली, तंजावुर, करूर और अरियालूर प्रमुख तिल उत्पादक जिले हैं. तिल की खेती किसानों के बीच इसलिए भी लोकप्रिय है क्योंकि यह कम बारिश में भी अच्छी तरह उग सकता है. राज्य में सफेद और काले तिल की किस्मों की खेती ज्यादा होती है. तेल निकालने के लिए भूरे और काले तिल को प्राथमिकता दी जाती है, जबकि सफेद तिल का इस्तेमाल मुख्य रूप से मिठाई और अन्य खाद्य उत्पादों में होता है.
तिल की बुवाई से पहले मौसम और बाजार पर नजर रखें
तमिलनाडु कृषि विश्वविद्यालय (TNAU) ने तिल की कीमत को लेकर जारी अपने अनुमान के साथ किसानों को सावधानी बरतने की सलाह दी है. विश्वविद्यालय के मुताबिक, तिल के भाव पर मॉनसून की स्थिति और दूसरे राज्यों से आने वाली तिल की सप्लाई का असर पड़ सकता है. TNAU ने किसानों से कहा है कि वे बुवाई का फैसला लेते समय इन दोनों बातों को ध्यान में रखें.