मौसम चाहे जैसा हो, प्रोटेक्टिव फार्मिंग से होगी बंपर खेती! 90 फीसदी तक सब्सिडी दे रही सरकार

बारिश, सूखा और कीटों से फसल बचाने के लिए प्रोटेक्टिव फार्मिंग किसानों का नया हथियार बन रही है. पॉलीहाउस और शेडनेट तकनीक से सालभर हाई-वैल्यू सब्जियां उगाई जा सकती हैं. अच्छी बात यह है कि सरकार इस आधुनिक खेती पर 90 फीसदी तक अनुदान भी दे रही है

Saurabh Sharma
नोएडा | Published: 20 Aug, 2026 | 06:00 AM

Protected Farming: बारिश की अनियमितता, बढ़ता तापमान, पानी की कमी और कीटों का लगातार बढ़ता प्रकोप खेती को पहले से ज्यादा जोखिम भरा बना रहा है. ऐसे समय में प्रोटेक्टिव फार्मिंग (संरक्षित खेती) किसानों के लिए एक प्रभावी और आधुनिक समाधान बनकर उभर रही है. कृषि विशेषज्ञ प्रमोद कुमार के अनुसार, पॉलीहाउस और शेडनेट हाउस जैसी संरचनाएं फसल के आसपास नियंत्रित वातावरण तैयार करती हैं, जिससे उत्पादन की गुणवत्ता और उपज दोनों में सुधार संभव होता है. बिहार में इस तकनीक को बढ़ावा देने के लिए सरकार हाईटेक हॉर्टिकल्चर योजना के तहत 90 फीसदी तक अनुदान भी उपलब्ध करा रही है.

क्या है प्रोटेक्टिव फार्मिंग और क्यों है जरूरी?

कृषि विशेषज्ञ प्रमोद कुमार के अनुसार, प्रोटेक्टिव फार्मिंग ऐसी तकनीक है जिसमें फसल को खुले मौसम  पर पूरी तरह निर्भर नहीं रहना पड़ता. पॉलीहाउस, शेडनेट हाउस और इंसेक्ट-प्रूफ नेट जैसी संरचनाओं के जरिए तापमान, नमी, प्रकाश और सिंचाई को फसल की जरूरत के अनुसार नियंत्रित किया जा सकता है. जलवायु परिवर्तन के कारण कभी अत्यधिक गर्मी, कभी असमय बारिश और कभी तेज हवाएं फसलों को नुकसान पहुंचाती हैं. संरक्षित खेती इन जोखिमों को कम करने में मदद करती है और किसानों को सालभर उच्च मूल्य वाली सब्जियां व फूल उगाने का अवसर देती है.

पॉलीहाउस में ऐसे बनता है मनचाहा वातावरण

प्रमोद कुमार बताते हैं कि पॉलीहाउस के भीतर  आधुनिक वेंटिलेशन, एग्जॉस्ट फैन, ड्रिप और स्प्रिंकलर सिंचाई जैसी तकनीकों का उपयोग किया जाता है. यदि तापमान बढ़ता है तो गर्म हवा बाहर निकाली जाती है, जबकि नमी और पानी की मात्रा पौधों की आवश्यकता के अनुसार दी जाती है. इस व्यवस्था से पानी की बचत होती है और उर्वरकों का उपयोग भी अधिक प्रभावी ढंग से किया जा सकता है. नियंत्रित वातावरण के कारण पौधों की बढ़वार समान रहती है और उत्पादन की गुणवत्ता बेहतर होती है.

कीट और बीमारियों से मिलती है बेहतर सुरक्षा

संरक्षित खेती की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि फसल सीधे बाहरी कीटों और कई प्रकार की बीमारियों के संपर्क में कम आती है. पॉलीहाउस में लगे इंसेक्ट-प्रूफ नेट कीटों के प्रवेश को काफी हद तक रोकते हैं. यदि किसी कारण से कीट अंदर पहुंच जाएं, तो ट्रैप और नियमित निगरानी के माध्यम से उन्हें जल्दी नियंत्रित किया जा सकता है. इससे रासायनिक कीटनाशकों  पर निर्भरता घटाने और स्वस्थ फसल उत्पादन में मदद मिलती है.

ऑफ-सीजन खेती और बिहार में 90 फीसदी तक अनुदान

कृषि विशेषज्ञ प्रमोद कुमार के अनुसार, प्रोटेक्टिव फार्मिंग की सबसे बड़ी ताकत ऑफ-सीजन उत्पादन है. किसान गर्मी के मौसम में भी कैप्सिकम, इंग्लिश खीरा, हाइब्रिड टमाटर तथा कई प्रकार के फूलों की खेती कर बेहतर बाजार भाव प्राप्त कर सकते हैं. बिहार सरकार की हाईटेक हॉर्टिकल्चर योजना 2026 के तहत पॉलीहाउस और अन्य संरक्षित खेती संरचनाओं पर पात्र किसानों को अधिकतम 90 प्रतिशत तक अनुदान दिया जा रहा है. आवेदन और योजना संबंधी जानकारी उद्यान विभाग के पोर्टल  तथा जिला उद्यान कार्यालयों में उपलब्ध है. विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि पॉलीहाउस बनवाने से पहले किसान फसल चयन, स्थानीय बाजार, तकनीकी प्रशिक्षण और रखरखाव की पूरी जानकारी जरूर लें. सही योजना और आधुनिक तकनीक के साथ संरक्षित खेती कम क्षेत्र में भी अधिक लाभ देने वाली टिकाऊ खेती का विकल्प बन सकती है.

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Published: 20 Aug, 2026 | 06:00 AM

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