Telangana News: तेलंगाना में इस साल आम की पैदावार में भारी गिरावट आने की संभावना है. किसानों का कहना है कि इस बार पैदावार 10 से 20 फीसदी तक ही रह सकती है. हालांकि, जनवरी में आम पेड़ों पर भरपूर फूल आए थे. ऐसे में किसान अच्छी पैदावार की उम्मीद कर रहे थे. जगतियाल, महबूबनगर और नागरकुर्नूल जिले के आम किसानों का कहना है कि इस साल उन्हें कोई खास मुनाफा नहीं होगा, क्योंकि पैदावार में गिरावट के बावजूद कीमतें काफी कम हैं. उन्होंने कहा कि खराब मौसम और थ्रिप्स व हॉपर जैसे कीटों के चलते खासकर हिमायत और बेनीशान किस्मों को ज्यादा नुकसान हुआ है.
किसानों के साथ-साथ थोक व्यापारी और निर्यात से जुड़े लोग भी मानते हैं कि इस साल आम उत्पादन कमजोर रहेगा. हालांकि, बागवानी विभाग के अधिकारियों का शुरुआती अनुमान है कि पैदावार 50 से 70 प्रतिशत तक हो सकती है, जो किसानों की जानकारी और निरीक्षण पर आधारित है. उन्होंने कहा कि सही आकलन फसल कटाई के बाद ही संभव होगा. कम सप्लाई के बावजूद इस साल आम के दाम पिछले साल की तुलना में कम मिले हैं, जिससे सामान्य आर्थिक नियम ‘कम आपूर्ति, ज्यादा मांग और ज्यादा कीमत’ इस बार लागू नहीं हो पाया. किसानों को सीजन की शुरुआत में उम्मीद थी कि कीमतें अच्छी मिलेंगी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ.
कीमतों में भी भारी गिरावट
कोरुटला (जगतियाल) के 19 एकड़ में खेती करने वाले मितपल्ली प्रताप रेड्डी ने द हिन्दू को बताया कि पिछले साल बेनीशान किस्म के आम की कीमत सीजन की शुरुआत में 80-100 रुपये प्रति किलो तक मिली थी, जो बाद में धीरे-धीरे घट गई. लेकिन इस साल शुरुआत में ही उन्हें सिर्फ 50 रुपये प्रति किलो ही मिल रहे हैं. उन्होंने कहा कि जब उत्पादन भी कम है, तो कीमतें क्यों कम हैं, यह समझ से बाहर है. किसानों को उम्मीद है कि आने वाले दिनों में दामों में सुधार होगा. हालांकि, हैदराबाद के गद्दियानाराम फल मंडी के पास खुदरा बाजार में इस हफ्ते बेनीशान आम की कीमत 100 से 150 रुपये प्रति किलो तक रही.
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मौसम में बदलाव के कारण पैदावार प्रभावित
बागवानी विभाग के अधिकारियों के अनुसार, इस साल सर्दियों में कम तापमान के कारण आम के पेड़ों में अच्छी फूलों की बहार देखी गई थी, लेकिन फरवरी में छाए कोहरे और उसके बाद हुई बेमौसम बारिश ने फसल को नुकसान पहुंचाया. अधिकारियों ने बताया कि मौसम में उतार-चढ़ाव के कारण थ्रिप्स और हॉपर जैसे कीटों का हमला बढ़ गया, जिससे आम की पैदावार प्रभावित हुई. बागवानी विभाग के संयुक्त निदेशक बी. बाबू के अनुसार, आम के फूलों को टिके रहने के लिए 40 डिग्री सेल्सियस से कम और स्थिर तापमान जरूरी होता है, लेकिन मौसम में बदलाव के कारण यह संतुलन बिगड़ गया.
थ्रिप्स और हॉपर से फसल को नुकसान
किसानों का कहना है कि इस साल मौसम में बदलाव ही मुख्य कारण है. महबूबनगर के बालानगर में बाग लगाने वाले मुरलीधर रेड्डी ने बताया कि मौसम आम के पेड़ों के लिए अनुकूल नहीं रहा, लेकिन थ्रिप्स और हॉपर जैसे कीटों के लिए सही माहौल बन गया. उन्होंने अनुमान लगाया कि इस बार उन्हें सिर्फ 5 फीसदी या उससे भी कम पैदावार मिल सकती है. वहीं गद्दियानाराम मंडी के थोक व्यापारियों का कहना है कि बाजार में आम की आवक पहले से कम है. व्यापारियों के अनुसार, यहां आने वाले ज्यादातर आम दूसरे राज्यों में भेजे जा रहे हैं. मंडी में कामगार आमों की छंटाई और पैकिंग कर उन्हें क्रेट और कार्टन में भर रहे हैं, जिन्हें बाद में राजस्थान, जम्मू-कश्मीर और अन्य राज्यों के ट्रकों में लोड किया जा रहा है.