सरसों की फसल पर माहू कीट का खतरा बढ़ा, समय रहते जानें बचाव के आसान उपाय
सरसों की फसल पर माहू कीट का खतरा किसानों की चिंता बढ़ा रहा है. यह कीट फूलों का रस चूसकर उत्पादन कम कर देता है. विशेषज्ञ समय पर कीटनाशक या जैविक उपाय अपनाने की सलाह दे रहे हैं, ताकि फसल सुरक्षित रहे और पैदावार प्रभावित न हो सके.
Mustard Crop: सरसों की पीली-पीली फसल जब खेतों में लहराती है, तो किसान अच्छी पैदावार और कमाई के सपने देखने लगते हैं. लेकिन इसी समय एक छोटा-सा कीट पूरी मेहनत पर पानी फेर सकता है. इन दिनों सरसों की फसल पर माहू कीट का खतरा बढ़ रहा है. अगर समय पर नियंत्रण नहीं किया गया तो यह कीट उत्पादन को काफी नुकसान पहुंचा सकता है.
फसल पर क्यों बढ़ रहा है खतरा
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, सरसों की फसल जब फूल से फल बनने की अवस्था में पहुंचती है, तब माहू कीट सबसे ज्यादा सक्रिय हो जाता है. मौसम में नमी और बादल होने पर इसका प्रकोप तेजी से फैलता है. यही वजह है कि इस समय किसानों को अपनी फसल की निगरानी और देखभाल पहले से ज्यादा करनी पड़ रही है. सरसों की खेती कम लागत में अच्छी कमाई देने वाली फसल मानी जाती है. इसलिए इस कीट का हमला किसानों के लिए चिंता का कारण बन जाता है.
कैसे पहचानें माहू कीट का हमला
माहू कीट को पहचानना ज्यादा मुश्किल नहीं है. पौधों के कोमल हिस्सों और फूलों के आसपास छोटे-छोटे काले कीड़े झुंड में दिखाई देने लगते हैं. ये कीट पौधों और फूलों का रस चूसते हैं, जिससे पौधे कमजोर होने लगते हैं. धीरे-धीरे पौधे का ऊपरी हिस्सा काला पड़ जाता है और उसकी बढ़वार रुक जाती है. दाने छोटे रह जाते हैं या ठीक से बन नहीं पाते. अगर समय रहते रोकथाम न की जाए, तो पैदावार पर सीधा असर पड़ सकता है.
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रासायनिक तरीके से करें नियंत्रण
विशेषज्ञों के अनुसार, जैसे ही खेत में माहू कीट दिखाई दे, तुरंत नियंत्रण के उपाय शुरू कर देने चाहिए. इसके लिए क्यूनालफास डस्टिंग पाउडर का इस्तेमाल प्रभावी माना जाता है. इसे पौधों पर या मिट्टी में भुरकाव के रूप में प्रयोग किया जा सकता है. सही समय पर इसका इस्तेमाल करने से कीट का फैलाव जल्दी रुक जाता है और फसल सुरक्षित रहती है. किसानों को सलाह दी जा रही है कि वे सुबह और शाम खेत का नियमित निरीक्षण करते रहें, ताकि किसी भी समस्या का पता समय पर चल सके.
जैविक खेती करने वालों के लिए देसी उपाय
जैविक खेती करने वाले किसानों के लिए भी माहू कीट से बचाव के आसान उपाय मौजूद हैं. गोमूत्र और पुरानी छाछ का घोल बनाकर फसल पर छिड़काव करना एक असरदार देसी तरीका माना जाता है. इस घोल की गंध के कारण माहू कीट पौधों के पास नहीं आता. इससे फसल सुरक्षित रहती है और उत्पादन पर भी अच्छा असर पड़ता है. ये तरीका सस्ता और पर्यावरण के लिए सुरक्षित भी है. समय पर निगरानी, संतुलित देखभाल और सही उपाय अपनाकर किसान अपनी सरसों की फसल को इस काले दुश्मन से बचा सकते हैं. सही प्रबंधन के साथ सरसों की खेती किसानों के लिए बेहतर मुनाफा देने वाली साबित हो सकती है.